छ्पी-अनछपी: बिहार को नहीं मिला रेल मंत्रालय, गर्मी बर्दाश्त से बाहर-स्कूल फिर बंद

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एनडीए के अच्छे प्रदर्शन के बाद यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि रेल मंत्रालय बिहार को मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारतीय जनता पार्टी ने सभी कोर विभाग अपने पास रखे हैं। गर्मी बर्दाश्त से बाहर हो रही है और बच्चे बेहोश हो रहे थे इसलिए बिहार में स्कूलों में एक बार फिर छुट्टी कर दी गई है। मणिपुर में मुख्यमंत्री के काफिले पर हमला हुआ है जिसमें एक जवान घायल हो गया। महाराष्ट्र में राजनीतिक उठापटक जारी है और सरकार गिरने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। यह हैं आज के अखबारों की अहम खबरें।

हिन्दुस्तान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किया। उन्होंने राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्री, अमित शाह को गृह मंत्री, निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री और एस. जयशंकर को विदेश मंत्री के पद पर बरकरार रखा है। पिछली कैबिनेट से शामिल किए गए 12 प्रमुख मंत्रियों को उनके मंत्रालयों में बरकरार रखा गया है। नितिन गडकरी को फिर से सड़क परिवहन मंत्रालय दिया गया है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया,अश्विनी वैष्णव, गजेंद्र सिंह शेखावत और किरेण रिजिजू का कद बढ़ा है।

बिहार को कौन मंत्रालय मिला?

कैबिनेट मंत्री के रूप में बीजेपी के गिरिराज सिंह को कपड़ा मंत्रालय, जदयू के ललन सिंह को पंचायती राज व पशुपालन मंत्रालय, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी को एमएसएमई और लोजपा (रामविलास) के चिराग पासवान को फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय दिया गया है। राज्य मंत्री के रूप में बीजेपी के नित्यानंद राय गृह राज्य मंत्री बने रहेंगे। जदयू के रामनाथ ठाकुर कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री बने। भाजपा के सतीश चंद्र दुबे को कोयला और खान भूतत्व राज्य मंत्री बनाया गया और भाजपा के ही राजभूषण चौधरी जल शक्ति राज्य मंत्री बने।

गर्मी बर्दाश्त से बाहर, स्कूल बंद

भास्कर की सुर्खी है: गर्मी… अब बर्दाश्त से बाहर। बिहार में अभी गर्मी से निजात नहीं मिलेगी। 14 जून तक पटना समेत 24 जिलों में लू चलेगी। पछुआ हवा चलने से मौसम के तेवर और तल्ख हुए हैं। सोमवार को इस सीजन में पहली बार पटना समेत 13 जिलों में लू और 7 जिलों में भीषण लू चली। इससे पहले 9 जून 2024 को 12 जिले लू की चपेट में रहे थे। गर्मी की छुट्टी के बाद खुले स्कूलों में पहले दिन ही सोमवार को भीषण गर्मी के कारण विभिन्न जिलों में 50 स्कूली बच्चे बेहोश हो गए। बिहार सरकार ने भीषण गर्मी व लू के चलते सभी स्कूलों को बंद कर दिया। स्कूल 11 जून से 15 जून तक बंद रहेंगे। 16 को रविवार है और 17 को बकरीद की छुट्टी है। इसलिए स्कूल आप 18 जून से खुलेंगे।

मणिपुर में मुख्यमंत्री के काफिले पर हमला

हिन्दुस्तान के अनुसार संदिग्ध उग्रवादियों ने कांगपोकपी जिले में सोमवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के सुरक्षा काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। इसमें एक जवान घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री का काफिला हिंसा प्रभावित जिरीबाम जिले की ओर जा रहा था, तभी राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर कोटलेन गांव के पास सुबह करीब साढ़े दस बजे उस पर हमला हुआ। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों के वाहनों पर कई गोलियां दागी गईं।

आरएसएस ने पूछा…मणिपुर पर कौन ध्यान देगा?

भास्कर की सुर्खी है: मणिपुर एक साल से जल रहा है… उस पर ध्यान कौन देगा: भागवत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा और लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के रवैया पर कई बड़ी बातें कही हैं। नागपुर में संघ कार्यकर्ताओं के विकास वर्ग कार्यक्रम के समापन पर भागवत ने कहा, एक साल से मणिपुर शांति की राह देख रहा है। “इससे पहले 10 साल शांत रहा और अचानक जो कलह वहां पर उपजी या उपजाई गई उसकी आग में मणिपुर अभी तक जल रहा है, त्राहि त्राहि कर रहा है। इस पर कौन ध्यान देगा?” गौरतलब है कि मणिपुर हिंसा में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 50000 लोग राहत शिविर में रहने को मजबूर हैं। ध्यान रहे कि मणिपुर में कथित डबल इंजन की सरकार है। वहां भारतीय जनता पार्टी के बीरेन सिंह मुख्यमंत्री हैं।

महाराष्ट्र में सरकार पर खतरा

भास्कर की सुर्खी है: चार माह बाद विधानसभा चुनाव, शिवसेना-एनसीपी के 20 विधायकों की वापसी संभव। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में एनडीए को 24 सीटों का नुकसान हुआ है जिससे भाजपा, सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी में बेचैनी है। गठबंधन को डर है कि अगर लोकसभा चुनाव का ट्रेंड जारी रहा तो 4 महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें हर का सामना करना पड़ेगा। इस बीच शिंदे और अजीत गुट के 15-20 विधायक घर वापसी की राह तलाश रहे हैं यानी वह उद्धव ठाकरे और शरद पवार के पास वापस लौटना चाहते हैं।

पप्पू यादव पर एक करोड़ रंगदारी मांगने का केस

जागरण के अनुसार पूर्णिया के नवनिर्वाचित निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के विरुद्ध सोमवार को पूर्णिया के मुफस्सिल थाने में एक करोड़ की रंगदारी मांगने का केस दर्ज किया गया। इस मामले में पप्पू का खास आदमी बताते हुए अमित यादव को भी नामजद किया गया है। शहर के बाईपास स्थित मां फर्नीचर के मालिक राजा कुमार ने यह केस किया है। नहीं देने पर पूर्णिया छोड़कर चले जाने व जान से मारने की धमकी देने की बात कही गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

कुछ और सुर्खियां

  • बीमा भारती के इस्तीफ़े के बाद खाली हुई रुपौली विधानसभा सीट पर 10 जुलाई को होगा उपचुनाव
  • मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ की काउंसलिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी गई
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 दिन दिल्ली में रहने के बाद पटना लौटे
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांवों और शहरों में बनेंगे तीन करोड़ नए घर
  • तेजस्वी बोले- बिहार निर्णायक भूमिका में, विशेष राज्य का दर्जा मिले, इस बार पीएम इधर-उधर बोलकर नहीं निकल सकते
  • वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी का बयान- निषाद को आरक्षण नहीं तो पीएम को बधाई नहीं
  • बिहार को केंद्रीय करों में 14000 करोड़ की हिस्सेदारी मिली

अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार में मंत्रालयों का बंटवारा हो गया लेकिन बिहार को जो उम्मीद थी कि शायद यहां के किसी मंत्री को रेल मंत्रालय मिले वह उम्मीद पूरी नहीं हो पाई। रेल मंत्रालय से बिहार का गहरा रिश्ता रहा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कभी रेल मंत्री रहे हैं। इसके अलावा लालू प्रसाद ने भी रेल मंत्रालय संभाला है। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती की रेल मंत्रालय मिलने का मतलब होता है बड़े जनसमूह से सीधे संपर्क का रास्ता। बड़ी संख्या में मजदूरों और कामगारों के बिहार से बाहर आने जाने के कारण रेल मंत्रालय का इस राज्य के लिए बहुत महत्व रहता है। ऐसा समझा जा रहा था कि बीजेपी की सीट घटकर 240 रहने के बाद वह सहयोगी दलों के लिए कुछ गुंजाईश निकलेगी लेकिन सभी कोर मंत्रालय अपने पास रखकर उसने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह सहयोगी दलों के दबाव से बाहर है। जदयू के लिहाज से देखा जाए तो ललन सिंह राजनीति में अपनी सीनियरिटी की वजह से रेल मंत्री बनाए जा सकते थे। गिरिराज सिंह की छवि विवादास्पद है लेकिन वह भी बीजेपी के सीनियर मंत्री हैं और उन्हें भी यह पद दिया जा सकता था। जो लोग भी मंत्री बने हैं वह अपने मंत्री बनने पर ही खुश हैं। उनसे अगर पूछा जाएगा तो वह यही कहेंगे कि हर मंत्रालय महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए अपनी पार्टी के इकलौते सांसद जीतन राम मांझी इस स्थिति में नहीं हैं कि पहली बार सांसद बनने पर ही मंत्री बनाए जाने के बाद किसी खास मंत्रालय की मांग कर सकें। लेकिन उन्हें जो मंत्रालय दिया गया है उसमें वह बिहार के लिए काफी काम कर सकते हैं। छोटे उद्योगों की मदद कर वह बिहार के लिए एक मिसाल कायम कर सकते हैं। इसी तरह चिराग पासवान फूड प्रोसेसिंग में मक्का, लीची और अन्य अनाज उपजाने वाले किसानों को बड़ी राहत दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें बिहार में कई जगहों पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोलनी पड़ेगी। ललन सिंह के विभाग में डेयरी भी शामिल है और डेयरी उद्योग में बिहार में काफी संभावनाएं पाई जाती हैं। फिलहाल तो यही उम्मीद की जा सकती है कि बिहार के मंत्रियों को जो भी मंत्रालय मिले हैं वह उसका उपयोग बिहार के लिहाज से भी करें ताकि उनकी लोकप्रियता बनी रहे और राज्य को लाभ हो।

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