छ्पी-अनछपी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- NEET की पवित्रता प्रभावित हुई, दो सीएम की शपथ आज

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मेडिकल दाखिला इम्तिहान NEET की पवित्रता प्रभावित हुई है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के मुख्यमंत्री आज शपथ लेंगे। केंद्र के नए मंत्रिमंडल में 39 फ़ीसद मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की तरह भारत में भी अगले वर्ष से कॉलेज में दो बार एडमिशन होगा। यह हैं आज के अखबारों की प्रमुख खबरें।

प्रभात खबर की सबसे बड़ी सुर्खी है: सुप्रीम कोर्ट ने ‘नीट’ मामले में मांगा जवाब, काउंसलिंग पर रोक नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी 2024 को फिर से कराने के अनुरोध वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार और एनटीए से जवाब मांगा। कोर्ट कथित तौर पर नीट यूजी प्रश्न पत्र लीक होने और अन्य गड़बड़ियों की सुनवाई कर रहा है। शिवांगी मिश्रा और एमबीबीएस के नौ अन्य उम्मीदवारों ने परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में नीट यूजी 2024 रिजल्ट को वापस लिए जाने और फिर से परीक्षा कराये जाने व पूरे मामले की जांच एसआईटी से करने की मांग की गई है। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस अमानुल्लाह की अवकाशकालीन पीठ ने प्रश्न पत्र लीक होने एवं अन्य गड़बड़ियों के आरोप पर संज्ञान लेते हुए कहा कि परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई है। इसलिए हमें जवाब चाहिए। हालांकि कोर्ट ने काउंसलिंग रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। इस मामले की अगले सुनवाई अब 8 जुलाई को होगी।

720/720 लाने वाले सभी 67 फरीदाबाद के!

भास्कर के अनुसार नीट यूजी 2024 परीक्षा को लेकर सनसनीख़ेज़ दावा किया गया है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तंखा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “720 में से 720 अंक पाने वाले सभी 67 छात्र फरीदाबाद क्षेत्र से हैं। इससे परीक्षा की पारदर्शिता पर कई सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठ रहे हैं। एनटीए इस मामले में पूरी तरह बेनकाब हो गया है जिसने 24 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया।”

चंद्रबाबू चौथी बार मुख्यमंत्री

हिन्दुस्तान के अनुसार टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू बुधवार को चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की उम्मीद है। मंगलवार को चंद्रबाबू को आंध्र प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेता चुन लिया गया। नायडू का विजयवाड़ा के बाहरी इलाके में गन्नावरम हवाई अड्डे के पास केसरपल्ली आईटी पार्क में बुधवार पूर्वाह्न 11.27 बजे शपथ लेने का कार्यक्रम है। नायडू के साथ कुछ और नेताओं के शपथ लेने की संभावना है।

मोहन माझी ओडिशा के सीएम

भाजपा नेता मोहन चरण माझी ओडिशा के नए मुख्यमंत्री होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में घोषणा करते हुए बताया कि के.वी. सिंह देव और प्रभाती परिदा को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नई सरकार का बुधवार को भुवनेश्वर के जनता मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा। मोहन चरण माझी को विधायक दल ने सर्वसम्मति से नेता चुना है। 52 वर्षीय मोहन चरण माझी ने हालिया विधानसभा चुनाव में क्योंझर विधानसभा क्षेत्र से बीजद की मीना माझी को 11,577 मतों से हराया था। वह पिछली सरकार में भाजपा के मुख्य सचेतक थे।

39 फ़ीसद मंत्रियों पर आपराधिक मामले

एनडीए सरकार के मंत्रियों ने मंगलवार को पदभार संभालने के बाद अपना-अपना कामकाज शुरू कर दिया है। इस बीच, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल 39 फीसदी मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रिमंडल में शामिल 28 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 19 पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है।

कॉलेजों में साल में दो बार एडमिशन

जागरण के अनुसार विदेशी विश्वविद्यालय की तर्ज पर भारतीय विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों में अब साल में दो बार दाखिला हो सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसी साल से विश्वविद्यालय को इस पर अमल की मंजूरी दी है। इस दौरान छात्रों को दाखिले का पहला मौका जुलाई अगस्त में और दूसरा मौका जनवरी-फरवरी में मिलेगा। इसके साथ ही यूजीसी ने साल में दो बार दाखिला देने के इच्छुक विश्वविद्यालयों से भी इससे जुड़ी व्यवस्था को जुटाने के निर्देश दिए हैं। मौजूदा समय में विश्वविद्यालय सहित दूसरे सभी शिक्षण संस्थानों के नियमित पाठ्यक्रमों में साल में एक बार यानी जुलाई अगस्त के बीच ही दाखिला मिलता है।

ज़मीन रजिस्ट्री का चालान घर बैठे

हिन्दुस्तान की खास खबर है कि बिहार सरकार जमीन निबंधन में आने वाली परेशानी को देखते हुए निबंधन पोर्टल में कई अहम बदलाव करने जा रही है। अब लोग जमीन निबंधन के लिए चालान घर बैठे जमा कर सकेंगे। साथ ही टोकन भी घर से ही ले सकेंगे। इस प्रक्रिया के लिए अब निबंधन कार्यालय का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे जुड़ी तमाम प्रक्रिया ऑनलाइन होने के साथ ही इतनी सरल हो जाएगी कि कोई भी इसका लाभ खुद प्राप्त कर सकता है। निबंधन विभाग अपनी वेबसाइट में कई सुविधाएं लोगों को मुहैया कराने जा रहा है।

कुछ और सुर्खियां

  • 77 साल के हुए लालू…जन्मदिन पर 77 पाउंड का केक काटा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई नेताओं ने दी बधाई
  • गया-कोडरमा के बीच पटरी पर बम मिला, ढाई घंटे तक रुकी रहीं ट्रेनें
  • लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी बनेंगे नए थलसेना अध्यक्ष
  • केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मुसलमानों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलना नफरत का संकेत: तेजस्वी
  • तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा अब 19 से 22 जुलाई तक
  • पटना समेत 14 जिलों में लू का अलर्ट, बक्सर का अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री
  • गया में अग्निवीर जीडी भर्ती रैली 25 जून से

अनछपी: मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ की पवित्रता के प्रभावित होने के बारे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी स्वागत योग्य है लेकिन इससे यह उम्मीद नहीं जागती कि जो प्रभावित परीक्षार्थी हैं उन्हें कोई खास लाभ होने वाला है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग पर रोक लगाने की मांग को ठुकरा दिया जिसका मतलब होगा कि एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। एक बार जब एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और 8 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा तो क्या यह संभव हो सकेगा कि सारी प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए? परीक्षार्थियों के लिहाज से देखा जाए तो पहले दिन से इस परीक्षा पर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) साफ तौर पर इंकार कर रहा है कि इसमें कोई गड़बड़ी हुई है। अगर कोई गड़बड़ी नहीं हुई है तो इतने बड़े पैमाने पर परीक्षार्थी शिकायत क्यों कर रहे हैं? अगर कोई गड़बड़ी नहीं हुई है तो पुलिस पेपर लीक की जांच क्यों कर रही है? अगर गड़बड़ी नहीं हुई है तो पुलिस जांच में एनटीए वह जानकारी क्यों नहीं दे रही है जो उससे मांगी जा रही है? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है लेकिन सरकार और सुप्रीम कोर्ट के रवैया को देखकर ऐसा नहीं लगता कि छात्रों को इंसाफ मिल सकेगा। ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट एनटीए को कुछ डांट फटकार लगाने के बाद इस मामले को निपटा देगा। ऐसे में आखिरी उम्मीद केंद्र सरकार से बचती है जो शायद इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों की शिकायत को ध्यान में रखकर कुछ ऐसा फैसला ले जो सबको स्वीकार्य हो। लेकिन इसकी भी संभावना कम बनती है क्योंकि सरकार ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है और एनटीए सरकार के इशारे पर ही चलती है। सवाल यह है कि क्या विपक्षी दल परीक्षार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई आंदोलन चलाएंगे? क्या परीक्षार्थियों का यह आंदोलन इसी तरह समाप्त हो जाएगा या इसका कोई असर भी होगा? यह सोचकर कितना अजीब लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा की पवित्रता प्रभावित होने की बात तो मानी लेकिन इसकी काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अगर सुप्रीम कोर्ट से भी प्रभावित परीक्षार्थियों को इंसाफ नहीं मिला तो वह किसका दरवाजा खटखटाएंगे? कहीं ऐसा ना हो कि परीक्षार्थी खुद को बदकिस्मत मानकर सारी नाइंसाफी सहने को मजबूर हो जाएं।

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