छ्पी-अनछपी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा आज, नोएडा की 400 कंपनियों में बवाल

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। 14 अप्रैल 2026 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपने कार्यकाल का अंतिम दिन होगा और वह अपने इस पद से इस्तीफा देंगे। कम तनख्वाह मिलने के खिलाफ नोएडा और आसपास के इलाकों में कर्मचारियों ने भारी बवाल मचाया और तोड़फोड़ की है। अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना पर पोप ने कहा- मैं ट्रंप से नहीं डरता।

और जानिएगा कि अमेरिकी पाबंदी से छूट मिलने के बाद 7 साल में पहली बार ईरान से कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचे दो टैंकर।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार बिहार में सरकार के नेतृत्व परिवर्तन की सारी तैयारियां पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपने पद से त्याग पत्र देंगे। वे 11 बजे दिन में अपनी सरकार की अंतिम कैबिनेट की बैठक में शामिल होने के बाद पद से त्याग पत्र देने लोकभवन जाएंगे। वहां से सरकारी आवास लौटेंगे। दोपहर में भाजपा विधायक दल की बैठक में नेता का चुनाव होगा। भाजपा विधायक दल के नेता ही एनडीए सरकार के नए मुख्यमंत्री होंगे। शपथ ग्रहण बुधवार 11 बजे दिन में लोकभवन में होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और कुछ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।

3:00 बजे भाजपा और 4:00 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक

प्रभात खबर के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक के बाद दोपहर 3:00 बजे भारतीय जनता पार्टी और 4:00 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी। इसी बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा हो जाएगी। इसी दिन नयी सरकार के गठन का दावा भी पेश कर दिया जायेगा, जबकि 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे लोक भवन में शपथ ग्रहण के साथ भाजपा पहली बार राज्य की सत्ता की कमान संभालेगी.

‘2025 से 30, फिर से नीतीश’ का होर्डिंग हटा

भास्कर के अनुसार जदयू कार्यालय में लगी ‘2025 से 30 फिर से नीतीश’ लिखी होर्डिंग सोमवार को हट गई। मंगलवार को बिहार के नए मुख्यमंत्री का ऐलान होगा। पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री होगा। यह काम केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की देखरेख में होगा। वही नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे। नई सरकार का शपथ ग्रहण बुधवार को होगा। मुख्यमंत्री समेत कुल 21 मंत्रियों के शपथ लेने की बात है। दो डिप्टी सीएम होंगे। दोनों जदयू के हो सकते हैं। मंगलवार को नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक होगी। इसके बाद वे अपना पद छोड़ देंगे। सोमवार को नई सरकार को लेकर खासकर जदयू और भाजपा के पाले में मैराथन बैठकें चलीं। दोनों पार्टियों के नेताओं ने भी आपस में बातचीत की। नीतीश ने 7 सर्कुलर रोड (सरकारी भवन) को देखा। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वे इसी आवास में रहेंगे। वे यहां पहले भी रह चुके हैं।

कम तनख्वाह मिलने के खिलाफ नोएडा में भारी बवाल

हिन्दुस्तान के अनुसार वेतन वृद्धि की मांग कर रहे श्रमिकों का प्रदर्शन सोमवार को हिंसक हो गया, इससे एनसीआर सुलग उठा। नोएडा में प्रदर्शन में शामिल उपद्रवियों ने 400 से अधिक कंपनियों में तोड़फोड़ की। करीब एक हजार वाहनों में तोड़फोड़ की और कई में आग लगा दी। फरीदाबाद और पलवल में भी श्रमिकों ने घंटों प्रदर्शन किया। इससे फरीदाबाद से दिल्ली-नोएडा तक महाजाम लग गया। श्रमिकों ने नोएडा फेज दो स्थित मदरसन कंपनी में साेमवार सुबह प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव किया और पुलिसकर्मियों की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। इसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया और धीरे-धीरे नोएडा के अन्य क्षेत्रों तथा ग्रेटर नोएडा तक पहुंच गया। उपद्रवियों ने कंपनियों को जबरन बंद कराया और श्रमिकों को बाहर निकाल दिया। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने नोएडा, पलवल और फरीदाबाद में सड़कों पर जाम लगाया। इससे दिल्ली और गाजियाबाद तक जाम लग गया।

मैं ट्रंप से नहीं डरता: पोप

जागरण के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पोप लियो 14वें के बीच विवाद गहरा गया है और बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने पोप पर तीखा हमला करते हुए उन्हें अपराध पर कमजोर और विदेश नीति के मामले में बेहद खराब बताया है। उन्होंने कहा कि मैं व्हाइट हाउस में हूं, इसलिए लियो वेटिकन में पोप हैं। यह प्रतिक्रिया पोप द्वारा अमेरिका की विदेश नीति, विशेषकर ईरान और पश्चिम एशिया के सैन्य संघर्षों पर शांति व संवाद की अपील के बाद आई है। वहीं, पोप ने भी अपने जवाब में कहा है कि उनको ट्रंप प्रशासन का डर नहीं है और युद्ध के खिलाफ वह बोलते रहेंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी ने पोप की आलोचना करने पर ट्रंप की कड़ी निंदा की है। पेजेशकियान ने एक्स पर लिखा कि महामहिम पोप लियो, मैं ईरान की ओर से आपके अपमान की निंदा करता हूं और यह घोषणा करता हूं कि शांति और भाईचारे के पैगंबर यीशु मसीह का अपमान किसी भी स्वतंत्र व्यक्ति को स्वीकार्य नहीं है। इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी ने भी ट्रंप की आलोचना की है।

होर्मुज स्ट्रेट पर अलग थलग पड़ा अमेरिका

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने सोमवार को यह जानकारी दी। ईरान ने भी पलटवार की चेतावनी दी है। इससे तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई से अरब और ओमान की खाड़ी के साथ अरब सागर और होर्मुज भी प्रभावित होगा। वहीं, ईरान ने धमकी दी कि वह फारस और ओमान की खाड़ी स्थित बंदरगाहों को निशाना बनाएगा। अमेरिका ने कहा कि ईरान का कोई युद्धपोत नाकेबंदी के आसपास आता है तो हम उसे खत्म कर देंगे।

अमेरिका दुनिया में अकेला पड़ गया

होर्मुज स्ट्रेट और ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी के ऐलान के बाद अमेरिका दुनिया में अकेला पड़ गया है। नाटो, ब्रिटेन, जापान ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने अमेरिकी नाकेबंदी का समर्थन नहीं किया है। ब्रिटेन के खुलकर कहा कि वह इसका समर्थन नहीं करेगा। जापान ने होर्मुज में माइनस्वीपर तैनाती का फैसला टाल दिया है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि उन्हें अमेरिका की तरफ से इसको लेकर कोई संदेश नहीं मिला है। नाटो के सहयोगी देशों ने सोमवार को कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी योजना में सीधे शामिल नहीं होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वे केवल संघर्ष समाप्त होने के बाद ही किसी हस्तक्षेप पर विचार करेंगे।

अमेरिका ने एक महीने के लिए पाबंदी में ढील दी, ईरान से तेल पहुंचा

जागरण के अनुसार लगभग सात वर्षों में पहली बार ईरानी कच्चा तेल लेकर दो बड़े टैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर स्थित बंदरगाह पहुंचे हैं। पिछले महीने ईरानी तेल की खरीद पर अमेरिका द्वारा दी गई एक महीने की छूट के बाद यह टैंकर भारतीय बंदरगाह पहुंचे हैं। 19 अप्रैल तक जारी इस छूट के तहत सिर्फ उस ईरानी तेल की बिक्री हो सकेगी, जो पहले से ही रास्ते में था। अनुमान है कि समुद्र में जहाजों पर लगभग 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जिसमें से 5.1 करोड़ बैरल तेल भारत को बेचा जा सकता है। नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी द्वारा संचालित एक बहुत बड़े टैंकर ‘फेलिसिटी’ रविवार देर रात गुजरात तट पर पहुंचा। इसमें लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था और इसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से भरा गया था। रविवार देर रात ही एक दूसरा टैंकर ‘जया’ ओडिशा के तट पर पारादीप के पास आकर रुका।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार सरकार अब मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर सरसों और चना की खरीद पर करेगी
  • बिहार से हज यात्रा की शुरुआत 18 अप्रैल से होगी, 15 अप्रैल को हज भवन में होगी दुवाइया मजलिस
  • लैंड फॉर जॉब्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की की अर्जी खारिज की
  • हंगरी में 16 साल तक प्रधानमंत्री रहे विक्टर ओर्बन हारे, पीटर मैग्यार बने नए प्रधानमंत्री
  • नवादा के गोविंदपुर थाना क्षेत्र में स्कूल वैन पलटने से छात्रा की मौत, 20 बच्चे घायल

अनछपी: बिहार से महाराष्ट्र ले जाए जा रहे अररिया के 163 बच्चों के बारे में कल यह खबर आई थी कि उन्हें मजदूरी करने के लिए ले जाया जा रहा है लेकिन बाद में पुलिस के हवाले से यह दावा किया गया है कि बिहार के बच्चों को महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में कट्टर बनाया जा रहा है। अखबारों के अनुसार इस मामले में अब इंटेलिजेंस ब्यूरो की भी एंट्री हो गई है और आईबी के एक दल ने गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की है। बच्चों को मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने ट्रेन से उतारा था और उनके मां-बाप को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। खबरों में बताया गया है कि बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है। जिन बच्चों को पुलिस ने ट्रेन से उतारा उनमें सब के सब मुस्लिम थे। पुलिस का कहना है कि कटनी पहुंचे कुछ मां-बाप ने बताया है कि वह अपने बच्चों को मदरसे भेज रहे थे। खबरों में यह कहा गया है कि पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि जब बिहार में बड़े मदरसे हैं तो दूसरे प्रदेशों में बच्चों को क्यों भेजा जा रहा था। यह सही है कि इतने छोटे बच्चों को, जिनकी उम्र 6 साल से 15 साल तक है, दूसरे राज्यों के मदरसों में भेजे जाने पर सवाल होना चाहिए लेकिन यह कहना कि उन्हें कट्टरता की शिक्षा दी जा रही थी बेहद आपत्तिजनक और आधारहीन है। मदरसा की शिक्षा का यह कतई अर्थ नहीं होता है। इस मामले को मदरसों को बदनाम करने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। जो लोग बच्चों को इस तरह मदरसे ले जाए जाने के बारे में जानते हैं उनका यह कहना है कि दरअसल इसके पीछे मदरसों में बच्चों की संख्या बढ़ाने और उसे दिखाकर चंदा हासिल करना होता है। यह भी कहा जा रहा है कि इसमें कमीशन पर काम होता है और बच्चों के मां-बाप को भी लालच दिया जाता है इसलिए ऐसे मामले सामने आते हैं। ऐसे में बेहतर यह होगा कि बच्चों को स्थानीय तौर पर शिक्षा देने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए और मां-बाप को भी लालच में ना पड़ने के लिए उनकी काउंसलिंग की जाए। फिर भी जो मां-बाप बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे राज्य के मदरसों में अपने बच्चों को भेजना चाहते हैं उनकी पूरी जांच पड़ताल के बाद पुलिस को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए और मदरसों को बदनाम करने की साजिश बंद होनी चाहिए।

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