छपी-अनछपी: बिना इजाज़त सीबीआई-ईडी कार्रवाई रोकने को अध्यादेश की मांग, राहल से माफी की मांग

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसयिों के खिलाफ विपक्षी दल अपनी बात मजबूती से रख रहे हैं। इस मुद्दे पर बिहार विधानसभा में यह मांग की गयी कि बिना अनुमति उन्हें राज्य में कार्रवाई न करने के लिए अध्यायदेश लाया जाए जैसा कुछ दूसरे राज्यों में किया गया है। उधर, राहुल गांधी के लंदन में दिये गये भाषण पर संसद में इतनी बहस हुई कि ठप हो गयी। ये दोनों खबरें अखबारों की सबसे बड़ी सुर्खियां बनी हैं।

जागरण की पहली खबर है: अध्यादेश लाकर बग़ैर अनुमति प्रदेश में सीबीआई-ईडी कार्रवाई रोकें: राजद। केंद्रीय एजेंसियों सीबीआई, ईडी और आयकर की लगातार होने वाली छापेमारी से त्रस्त राजद ने सोमवार को विधानसभा में यह मामला उठाया कि राज्य सरकार इस तरह का अध्यादेश लाए कि बगैर सरकार की अनुमति के केंद्रीय एजेंसियों को बिहार में अपने ऑपरेशन की अनुमति नहीं मिले। इस क्रम में कहा गया कि कई राज्य सरकारों ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है। जिस समय राजद द्वारा इस मसले को उठाया गया उस वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में मौजूद थे जबकि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अनुपस्थित थे। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान राजद के भाई वीरेंद्र ने कहा कि वह व्यवस्था के प्रश्न के लिए खड़े हुए हैं और कुछ कहना चाह रहे हैं। अध्यक्ष ने उन्हें बात रखने की अनुमति दे दी। इस पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी सीबीआई, ईडी और आयकर द्वारा विपक्ष के नेताओं को परेशान करने को छापेमारी की जा रही है। राज्य सरकार यह अध्यादेश लाए  कि बगैर उसकी अनुमति की छापेमारी नहीं होगी। इससे सम्बंधित हिन्दुस्तान की सुर्खी है: देश में सबसे ज्यादा छापे मेरे परिवार पर: तेजस्वी।

पुलिसकर्मियों को बिना-ब्याज क़र्ज़

हिंदुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: पुलिसकर्मियों को गंभीर बीमारी में ब्याजमुक्त लोन। पुलिस मुख्यालय ने अपने सभी रैंक के पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों को गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक सहायता देने से संबंधित नई योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत गंभीर रोग से पीड़ित किसी भी रैंक के पुलिसकर्मी को तीन लाख रुपये तक ब्याजमुक्त लोन तत्काल मिलेगा। इस लोन को वे छह माह में चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि के आने पर लौटा सकते हैं। अगर चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि से भी यह राशि एडजस्ट नहीं होती है, तो आगामी छह महीने के दौरान संबंधित कर्मी के वेतन से समान किस्तों में इसकी कटौती की जाएगी। यह ऋण मुख्यालय के पास मौजूद पुलिस परोपकार फंड से दिया जाएगा।

समलैंगिक विवाह पर सुनवाई

संविधान पीठ समलैंगिक विवाह पर सुनवाई करेगी। समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दिए जाने के आग्रह वाली याचिकाओं पर संविधान पीठ सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास यह मामला भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि यह मुद्दा एक ओर संवैधानिक अधिकारों और दूसरी ओर विशेष विवाह अधिनियम सहित विशेष विधायी अधिनियमों का एक-दूसरे पर प्रभाव है। पीठ ने कहा, हमारी राय है कि यदि उठाए गए मुद्दों को संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के संबंध में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा हल किया जाता है तो यह उचित होगा।

राहुल के लंदन भाषण पर संसद ठप

हिन्दुस्तान की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: राहुल गांधी के बयानों पर संसद से सड़क तक तकरार। जागरण की दूसरी सबसे अहम सुर्खी यही है: राहुल के लंदन भाषण पर संसद ठप। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लंदन में दिए बयान पर सोमवार को संसद से सड़क तक तकरार हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने लंदन जाकर भारत को बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे राहुल गांधी को सदन में माफी मांगने का निर्देश दें। वहीं, संसद के बाहर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ऐसे बयान पर देशद्रोह के आरोप में कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमें किसी कॉलेज में लोकतंत्र की बात कहने पर देशद्रोही कहा जाता है, जबकि प्रधानमंत्री विदेशों में भारत के 70 वर्षों के योगदान को नकारते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राज्यसभा के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनके बयान पर चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने पीयूष गोयल के बयान कार्यवाही से हटाने की मांग की।

शिक्षा का बजट पास

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: बिहार में इस साल 2,99,812 शिक्षकों की बहाली। अखबार के अनुसार सातवें चरण की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए केंद्रीकृत एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए नई नियमावली बनाई जा रही है। यह घोषणा शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने विधानसभा में सोमवार को विभाग के बजट पेश करने के दौरान की। मंत्री ने शिक्षा विभाग का 40450 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसे विपक्ष की अनुपस्थिति में सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। मंत्री ने कहा, हर जिले में अच्छी सुविधा युक्त उच्च माध्यमिक विद्यालयों से पूरे राज्य में लगभग 85 उच्च माध्यमिक विद्यालयों को अनुकरणीय विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कुछ और सुर्खियां

  • मधेपुरा में हाइवा ट्रक ने ऑटो को मारी टक्कर, पांच की मौत
  • ऑस्कर में एवरीथिंग एवरीव्हेयर ऑल ऐट वन्स को 7 पुरस्कार
  • दो भारतीय फिल्मों -आरआरर व एलीफेंट व्हिस्परर्स- ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रचा
  • एच3एन2: एम्स में 30 और पीएमसीएच में 26 बेड तैयार
  • पानी के मसले पर तीन वर्षों में 112 हत्याएं
  • मुजफ्फरपुर में एक दिन में डेढ़ सौ लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा
  • विराटनगर में नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में जुटेंगे 300 साहित्यकार
  • सैनिक स्कूल के लिए अदानी वर्ल्ड स्कूल के साथ मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग
  • 1 अप्रैल से बीएस II दो मानकों से बनेंगी गाड़ियां, 50,000 तक महंगी होंगी कारें
  • एमसीएच के लापता डॉक्टर के बारे में बताने पर 2,00,000 इनाम

अनछपी: भारत के संसदीय इतिहास में यह अजीब दौर है कि जब कोई नेता लोकतंत्र पर खतरे के बारे में लंदन में भाषण देता है तो उससे पूरी सरकारी पार्टी तिलमिला जाती है। राजनाथ सिंह जैसे मंजे हुए और गंभीर माने जाने वाले नेता ने भी राहुल गांधी से माफी की मांग कर भारतीय जनता पार्टी के नीति को उजागर कर दिया है। संसदीय इतिहास का यह वह दौर है जब प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ या उनकी सरकार के खिलाफ कोई भी बयान पूरे भारत के खिलाफ बयान बता दिया जाता है। ऐसे में तो सरकार की कोई आलोचना देशद्रोह बताई जा सकती है। जब सरकार को यही करना है तो फिर विपक्ष के रहने की जरूरत ही क्या है। माना यह जाता है कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका में सरकार की आलोचना शामिल है। राहुल गांधी ने देश के प्रति संवेदनशील मुद्दे पर ऐसी कोई बात नहीं की जो देश के विरुद्ध हो। यही वह वक्त है जब नागरिकों का रोल बढ़ जाता है कि वह यह देखें कि सरकार अपनी आलोचना को देश की आलोचना के रूप में पेश करने का धोखा क्यों दे रही है। विपक्षी दलों को भी यह बात जोर-जोर से रखने की ज़रूरत है कि उनकी आलोचना देश की सरकार की है, देश की नहीं। जब जब सरकार यह कोशिश करें कि उसकी गलत नीतियों की आलोचना को देश की आलोचना बताया जाए तब यह समझना चाहिए कि की आलोचना बिल्कुल जरूरी है और इसे करने में कभी नहीं रुकना या डरना चाहिए।

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