छपी-अनछपी: महिला आरक्षण 2026 के बाद, शिक्षा सेवक-विकास मित्रों का मानदेय बढ़ा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा महिला आरक्षण बिल लाने की खबर के बाद यह मालूम हुआ कि यह 2026 के बाद लागू किया जाएगा। इससे जुड़ी खबर तो सभी जगह है लेकिन इस बात को अधिकतर अखबारों ने नजरअंदाज कर दिया है। शिक्षा सेवक और विकास मित्रों का मानदेय बढ़ाने की खबर भी सभी जगह प्रमुखता से ली गई है।

भास्कर की पहली खबर है: महिला आरक्षण 2026 के बाद। अख़बार लिखता है की नई संसद में लोकतंत्र की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार ने लंबे समय से अटके महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पेश कर दिया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से पेश संविधान के 128वें संशोधन में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान है। एससी/एसटी के लिए आरक्षित सीटों में महिलाओं के लिए भी एक तिहाई कोटा होगा। बुधवार को इस पर लोकसभा में चर्चा और वोटिंग होगी। इसके बाद बिल राज्यसभा जाएगा। सरकार इसे 22 सितंबर तक चलने वाले विशेष सत्र में पास करना चाहती है। इस साल के विधानसभा चुनाव या 2024 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू होना मुश्किल है क्योंकि मसौदे के मुताबिक कानून बनने के बाद पहली जनगणना और परिसीमन में महिला आरक्षित सीटें तय होगी। 2021 में होने वाली जनगणना अब तक नहीं हो सकी है ऐसे में महिला आरक्षण 2026 से पहले लागू होने की संभावना कम है। कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने बिल पेश करते हुए कहा इससे लोकसभा में महिलाओं की संख्या 82 से 181 हो जाएगी। इसमें 15 साल के आरक्षण का प्रावधान है।

नीतीश ने स्वागत किया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि संसद में जो महिला आरक्षण बिल लाया गया है, वह स्वागत योग्य कदम है। हम शुरू से ही महिला सशक्तीकरण के हिमायती रहे हैं। बिहार में हमलोगों ने कई ऐतिहासिक कदम उठाये हैं। वर्ष 2006 से हमने पंचायती राज संस्थाओं और वर्ष 2007 से नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को ट्वीट कर अपनी बात कही है।

राबड़ी देवी ने कहा- धोखा

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल एससी, एसटी, पिछड़ी, अति पिछड़ी व अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ धोखा है। बिल निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन के बाद लागू होगा। परिसीमन जनगणना के बाद होगा। और केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना को ठंडा बस्ती में डाल दिया है। यानी यह बिल झाल बजाने और शोर मचाने का शगुफा भर है।

संसद की नई इमारत

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: लोकतंत्र का नया मुकाम। देश के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सांसदों ने संसद के नए भवन में प्रवेश किया। इससे पहले पुरानी संसद के केंद्रीय कक्ष में आखिरी बार आयोजित दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। इसके बाद मंत्रिपरिषद के सदस्य और सांसद पैदल चलकर नए संसद भवन पहुंचे। नए भवन का माहौल बदला हुआ था। पूरी तरह से डिजिटल नए सदन में हर सीट पर टैबलेट है। पेपरलेस सदन में सांसदों को सारी सूचनाएं इसी टैबलेट पर मिलती हैं। इसे पूरी तरह चलाने की दिक्कत भी बैठक के दौरान सामने आई, जब सदन में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया।

मानदेय दोगुना हुआ

भास्कर की खबर है: 70692 शिक्षकों की भर्ती होगी, शिक्षा सेवक विकास मित्रों का मानदेय बढ़ा। राज्य सरकार ने त्योहार से पहले शिक्षक अभ्यर्थियों और अनुबंधकर्मियों को बड़ी सौगात दी है। दूसरे चरण के तहत प्रदेश में जल्द 70692 शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला लिया गया है। वहीं, 74256 सैप, विकास मित्र, शिक्षा सेवक और शिक्षा सेवक (तालीमी मरकज) के मानदेय में भारी वृद्धि की गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने इन प्रस्तावों पर मुहर लगाई। तालीमी मरकज के शिक्षा सेवक को पहले 11000 रुपए मासिक मिल रहे थे, अब उन्हें ₹22000 मासिक मिलेंगे। इसी तरह विकास मित्रों को अभी 13700 मिल रहे हैं, बढ़े हुए मानदेय के बाद उन्हें ₹25000 मिलेंगे।

कनाडा से संबंध बिगड़े

भारत ने दिल्ली में तैनात कनाडा के एक राजनयिक को मंगलवार को निष्कासित करने का ऐलान किया। यह कार्रवाई कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूड्रो के विवादित बयान के बाद की गई। उन्होंने खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ होने का आरोप लगाया था। साथ ही भारतीय राजनयिक को निष्कासित कर दिया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा के उच्चायुक्त को तलब किया और वरिष्ठ राजनयिक को निष्कासित करने के फैसले की जानकारी दी।

निज्जर को 2020 में आतंकी घोषित किया गया

हिन्दुस्तान के अनुसार कनाडा में रह रहे हरदीप सिंह निज्जर (45) को भारत ने जुलाई, 2020 में सर्वाधिक वांछित आतंकवादी घोषित किया था। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था। एनआईए ने सितंबर, 2020 में देश में निज्जर की संपत्ति कुर्क कर ली थी। कनाडा की सरे पुलिस ने उसे वर्ष 2018 में नजरबंद किया था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया।

शराब बेचने में पुलिस पर कार्रवाई

बक्सर जिले में जब्त शराब बेचने की कोशिश में बह्मपुर थाने के चार पुलिसकर्मियों समेत छह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। मामले में ब्रह्मपुर थाने के दारोगा कुंवर कन्हैया प्रसाद और सिपाही विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रह्मपुर थानाध्यक्ष, दो पुलिसकर्मी और दो चौकीदार के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गयी है। इस मामले में संलिप्त छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। ब्रह्मपुर पुलिस ने 12 सितंबर को पुरवा गांव के समीप फोरलेन पर शराब लदा कंटेनर जब्त किया था। शराब ब्रह्मपुर थाने में रखी गई। एसपी ने बताया कि यह जानकारी मिली कि जब्त शराब बेचने के लिए बगल के कमरे में रखी गयी है। इसकी जांच के लिए डुमरांव के एसडीपीओ को भेजा गया था।

कुछ और सुर्खियां

  • होमगार्ड की डीजी शोभा ओहतकर पर डीआईजी अनुसूया सिंह ने 6.5 करोड़ की गड़बड़ी रोकने पर प्रताड़ना का आरोप लगाया
  • बीपीएससी द्वितीय इंटर स्तरीय 11098 पदों पर नियुक्ति के लिए 27 से आवेदन
  • ट्रांसफर पेपर पर जबरदस्ती साइन करने के मामले में पूर्व सांसद साधु यादव की 3 साल की सजा बरकरार
  • जेईई में 24 जनवरी से, नीट यूजी 5 मई को
  • अब सभी विश्वविद्यालय में प्री पीएचडी के लिए एक साथ परीक्षा होगी
  • झारखंड का कुड़मी आंदोलन वापस, रेलवे की ट्रेन सेवा रहेगी सामान्य

अनछ्पी: जिस महिला आरक्षण बिल की इतने तामझाम से चर्चा की जा रही थी उसके बारे में सच्चाई सामने आने पर अधिकतर लोगों को निराशा हाथ लगी है। कहा जा रहा था कि 27 साल से अटका महिला आरक्षण बिल पास कर लिया जाएगा तो उम्मीद की गयी थी कि इसे अगले चुनाव में लागू भी किया जाएगा। जब हकीकत में यह संसद में बिल पेश हुआ तो पता चला कि अभी इसे लागू करना संभव नहीं है क्योंकि पहले जनगणना होगी और उसके बाद परिसीमन। इन दोनों कामों में काफी वक्त लगेगा और उम्मीद की जा रही है कि अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 2026 के बाद से लोकसभा और विधानसभा में 33% महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा। महिला आरक्षण बिल से दूसरी मायूसी इस बात पर हुई है कि इसमें आरक्षण लागू नहीं किया गया है। यानी जिन 33% सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण होगा उसके अंदर ओबीसी का आरक्षण नहीं दिया गया है। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी तो चाहते हैं कि महिला आरक्षण में मुस्लिम महिला का भी आरक्षण हो। लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण के अंदर आरक्षण नहीं होने का मतलब यह बताया जा रहा है कि जो प्रभावशाली वर्ग की महिलाएं होंगी वहीं उन पर चुनकर आएंगी और इस तरह अनुसूचित जाति जनजाति और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व कम ही होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बिल पर बहस के दौरान इस इन मुद्दों को गंभीरता से उठाया जाएगा और सरकार भी इस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करेगी। फिलहाल तो यह बिल संसद से पास होने के बावजूद किसी काम का नहीं रहेगा क्योंकि जो तारीख़् दी गई है उसमें अभी लंबा वक्त लगेगा। इसके अलावा महिला आरक्षण में भी अगर आरक्षण लागू नहीं किया गया तो इसका विरोध होगा और संसद से इसे पास करना इतना आसान नहीं होगा।

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