छपी-अनछपी: बंगाल में ईडी के सामने डटीं दीदी, भारत पर 500% टैरिफ का खतरा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। कोलकाता में ईडी ने प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित आई पैक के दफ्तर छापेमारी की तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह कहते हुए सामने डंट गईं कि यह उनकी चुनावी रणनीति को चुराने की कोशिश है। रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर अमेरिका 500% तक का टैरिफ  लगा सकता है। ईडी ने बिहार समेत छह राज्यों में छापेमारी कर 40 सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी नौकरी देकर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है।

और, जानिएगा कि सरकारी ठेकों में चीन की कंपनियों पर रोक हटेगी।

पहली ख़बर

भास्कर की खबर है कि पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन इससे पहले ही गुरुवार को कोलकाता में बड़ा सियासी ड्रामा हुआ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दो टीमें सुबह-सुबह इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के दो ठिकानों पर पहुंची। ईडी 2020 के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच कर रही है। एक टीम ने आई-पैक के डायरेक्टर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर तो दूसरी ने सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा। प्रतीक बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की आईटी सेल के प्रमुख भी हैं। वही ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति बनाते हैं। इसलिए जब सीएम ममता को छापे की सूचना मिली तो वे पुलिस अफसरों के साथ सीधे प्रतीक के घर पहुंच गईं। 20-25 मिनट यहीं रहीं और फिर एक फाइल फोल्डर लेकर निकल गईं। इसके बाद वे प्रतीक के दफ्तर गईं। यहां से करीब 3:30 घंटे बाद निकलीं। देश में संभवतः पहली बार है, जब किसी सीएम ने छापे के बीच ऐसा कदम उठाया हो। ईडी ने इस मामले में देशभर में 10 ठिकानों पर छापे मारे। इनमें 6 बंगाल तो 4 दिल्ली के हैं।

कौन हैं प्रतीक जैन?

प्रतीक आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और आई पैक के सह संस्थापक और डायरेक्टर हैं। आईपैक की शुरुआत चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी लेकिन पीके के हटने के बाद प्रदीप और दो अन्य डायरेक्टर बन गए थे।

भारत पर 500 फ़ीसद टैरिफ लगने का ख़तरा

प्रभात ख़बर के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और कड़ा करने वाले एक अहम विधेयक का समर्थन कर दिया है. इसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर 500% तक का भारी शुल्क लगाया जा सकता है. रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप ने इस बिल को संसद में पेश करने की हरी झंडी दे दी है. बिल का नाम ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ है. इसे अगले हफ्ते वोटिंग के लिए लाया जायेगा. इस से व्हाइट हाउस को भारत और चीन जैसे देशों पर दबाव बनाने का हथियार मिल सकता है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद रहे हैं. अमेरिका का आरोप है कि तेल से मिलने वाला राजस्व मॉस्को को युद्ध जारी, रखने में मदद कर रहा है.

66 अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से तोड़ा रिश्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के कई निकायों और भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन समेत 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर निकालने का फैसला किया है. ट्रंप ने इन संस्थाओं को अमेरिकी हितों, सुरक्षा और संप्रभुता के विरुद्ध बताते हुए इस संबंध में एक आधिकारिक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये. इन संगठनों में 31 संयुक्त राष्ट्र निकाय और 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन हैं. सभी विभागों और एजेंसियों को इन संगठनों में अमेरिका की भागीदारी व वित्तपोषण तुरंत समाप्त करने के निर्देश दिये हैं. अमेरिका उन संस्थाओं को वित्तपोषित नहीं करेगा.

40 सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी नौकरी देकर ठगी

हिन्दुस्तान के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को बिहार समेत छह राज्यों में छापेमारी कर 40 सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी नौकरी देकर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। छापे के बाद ईडी ने खुलासा किया कि गिरोह ने देशभर के विभिन्न सरकारी विभागों व संगठनों के नाम पर फर्जी नौकरी दी और इसके बदले अभ्यर्थियों से जमकर मोटी रकम की उगाही की। शातिरों ने अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिए थे। कई मामलों में दो से तीन महीने का शुरुआती वेतन भी दिया गया, ताकि नौकरी असली लगे। जांच एजेंसी ने गुरुवार को बिहार में मुजफ्फरपुर और मोतिहारी, यूपी में गोरखपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, तमिलनाडु में चेन्नई, गुजरात में राजकोट और केरल के चार शहरों सहित कुल 15 ठिकानों को खंगाला। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। इनमें ई-मेल ट्रेल, फर्जी लेटरहेड, बैंक खाता संबंधी कागजात और फर्जी नियुक्ति पत्र शामिल हैं।

ट्रंप पुलिस ने नागरिकता जांच के नाम पर महिला को गोली से उड़ाया…अमेरिका सुलगा

अमेरिका में प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर तनाव बढ़ गया है। मिनियापोलिस शहर में ट्रम्प की पुलिस रेनी निकोल यानी आईसीई के एक अफसर ने नागरिकता जांच के दौरान एक महिला को गोली मार दी। बुधवार सुबह हुई घटना में 37 साल की रेनी निकोल गुड की सिर में गोली लगने से मौत हो गई। घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि महिला कार को घुमा रही थी। उसी वक्त अफसर ने गोली चला दी। घटना के बाद सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन किया। शहर में स्कूल भी बंद कर दिए गए। एक साल में इमिग्रेशन नीति के चलते यह पांचवीं मौत है। मेयर जैकब फ्रें ने आईसीई को शहर छोड़ने को कहा है। हालांकि, होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने साफ किया कि एजेंट्स कहीं नहीं जा रहे। अब इसके विरोध में कई शहरों में प्रदर्शन की तैयारी है।

सरकारी ठेकों मैं चीन की कंपनियों पर रोक हटेगी

हिन्दुस्तान के अनुसार दो सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत का वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर पांच साल पुराने प्रतिबंधों को खत्म करने की योजना बना रहा है। इसकी वजह सीमा पर तनाव कम होने के माहौल में वाणिज्यिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की भारत की कोशिश बताई जा रही है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई घातक झड़प के बाद 2020 में लगाए गए प्रतिबंधों के तहत चीनी बोलीदाताओं को भारतीय सरकार की एक समिति के साथ पंजीकरण कराना और राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक था। इन उपायों के चलते चीनी कंपनियों को भारतीय सरकार के उन ठेकों के लिए प्रतिस्पर्धा करने से प्रभावी रूप से रोक दिया गया, जिनका अनुमानित मूल्य 700 अरब डॉलर से 750 अरब डॉलर के बीच था।

कुछ और सुर्खियां:

  • कथित नौकरी के बदले जमीन घोटाले में लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ आरोप तय करने पर आज हो सकता है फैसला
  • पटना एम्स में ₹42.98 लाख का घोटाला, चीफ कैशियर अरेस्ट
  • भारत से चल रही तनातनी के बीच बांग्लादेश ने दिल्ली सहित अपने प्रमुख मिशनों में वीजा सेवाएं रोकीं
  • अरुणाचल प्रदेश में बाहरियों और अल्पसंख्यकों/मुसलमानों के खिलाफ आज 12 घंटे का बंद

अनछपी: मथुरा से खबर आई है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े पसमांदा मुस्लिमों को तेजी से आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने को कदम उठाएगा। आएएसएस न जाने कब यह कदम उठाएगा लेकिन उसे यह बताने वाला कोई होना चाहिए कि जिस पसमांदा समुदाय की बात वह कर रहा है वह दरअसल अपने ऊपर हो रहे जानलेवा हमलों से परेशान है और इसमें वही वर्ग शामिल है जो आएएसएस के नजदीक माना जाता है। यहां यह बात नोट की जाने वाली है कि ऐसे किसी भी मामले में आरएसएस तुरंत यह कह देता है कि उसका उस संगठन से कोई संबंध नहीं है लेकिन सब यह जानते हैं कि ऐसे हमले और मॉब लिंचिंग में शामिल रहने वाले संगठनों की विचारधारा आरएसएस की विचारधारा है और वह वहीं से प्रेरणा लेते हैं। अब आरएसएस यह भी कह रहा है कि वह कथित पसमांदा मुसलमानों को अपनी विचारधारा से जोड़ेगा और इस काम में अग्रणी भूमिका राष्ट्रीय मुस्लिम मंच निभाएगा। दुनिया जानती है कि यह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच दरअसल उन पिट्ठुओं का मंच है जो आरएसएस के कहने पर थोड़ा सा लाभ लेने के लिए कुछ भी कहते-करते रहते हैं। वैसे, दावा है कि यह मंच पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा है, जिसमें और तेजी लाने के लिए कहा गया है।  बताया गया है कि संघ की बैठक में पसमांदा मुस्लिम समाज को लेकर गहन चर्चा हुई। पसमांद में ज्यादातर कारीगर, बुनकर जैसी जातियां हैं, जो शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में काफी पिछड़ी हैं। आरएसएस के हवाले से यह भी दावा किया गया कि मुस्लिम समाज में उन्हें आगे बढ़ाने की कोई चिंता नहीं है। ऐसी स्थिति में पसमांद लंबे समय से सामाजिक न्याय और आरक्षण के पुनर्गठन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ध्यान देने की बात यह है कि जब इसी पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए शेड्यूल्ड कास्ट यानी एससी के दर्जे की मांग की जाती है तो खुलकर या छिपकर सबसे पहले आरएसएस ही इसका विरोध करता है। दरअसल इसका मकसद मुस्लिम समाज में फूट डालने का है और अगर ऐसा नहीं है तो आरएसएस को चाहिए कि वह पसमांदा मुस्लिम समाज को एससी का दर्जा देने के समर्थन में आंदोलन करे।

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