छ्पी-अनछपी: 116 प्रिंसिपल की नियुक्ति पर राजभवन की रोक, कश्मीर में चार दर्जन टूरिस्ट सेंटर बंद
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। राजभवन ने बिहार के विश्वविद्यालयों के कांस्टीट्यूएंट कॉलेजों के लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा सफल घोषित 116 प्रिंसिपल की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। कश्मीर में 48 टूरिस्ट सेंटर बंद करने की घोषणा की गई है। निगरानी विभाग ने एलईओ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को दो लाख रुपये घूस लेते हुए गिरफ्तार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को कार्रवाई की खुली छूट देने का एलान किया है।
और, जानिएगा कि कश्मीर से पाकिस्तान भेजे जा रहे 70 लोगों में से एक को भारत में रहने की इजाजत क्यों मिली।
पहली खबर
प्रभात खबर के अनुसार राजभवन ने बिहार के विश्वविद्यालयों के अंगीभूत कॉलेजों में विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा सफल घोषित 116 प्राचार्यों की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। राजभवन ने कहा है कि अनुशंसित प्रधानाचार्यों की विभिन्न अंगीभूत कॉलेज में नियुक्तियां कुलाधिपति प्रतिनिधि के परामर्श पर ही की जाएगी। राज्यपाल सचिवालय के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल चोंग्थू ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट नॉलेज विश्वविद्यालय और नालंदा ओपन विश्वविद्यालय को छोड़कर सभी कुलपतियों को इस संबंध में पत्र लिखकर कुलाधिपति की मंशा से अवगत करा दिया है। इससे पहले शिक्षा विभाग ने बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग की अनुशंसा पर 116 चयनित प्राचार्य की सूची कुलपतियों को भेज कर कहा था कि उनकी नियुक्ति कॉलेज में कर दी जाए।
कश्मीर में चार दर्जन टूरिस्ट सेंटर बंद
जागरण के अनुसार पहलगाम के बैसरन नरसंहार के बाद सरकार ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी के तहत एहतियात के तौर पर सरकार ने कश्मीर के चार दर्जन पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम और डल झील समेत अन्य सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सैलानियों के जाने पर किसी भी तरह की रोक नहीं है। इन सभी पर्यटन स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ₹200000 घूस लेते गिरफ्तार
हिन्दुस्तान के अनुसार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने मंगलवार को पूर्वी चंपारण जिला योजना एवं विकास विभाग (स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल 01 एलईओ 1) के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार को दो लाख रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया है। यह राशि पंचायत सरकार भवन के निर्माण से जुड़े 68 लाख रुपये के बिल भुगतान के एवज में संवेदक से ली जा रही थी। गिरफ्तारी मोतिहारी के सदर थाना अंतर्गत वार्ड नंबर 33 राजा बाजार रोड स्थित रवि नारायण राय के घर से हुई। आरोपी इस मकान में बतौर किराएदार रह रहे थे। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से निगरानी टीम ने पूछताछ की। आय से अधिक संपत्ति की संभावना को ध्यान में रखते हुए उनके पटना के आरके पुरम और आनंदपुरी स्थित ठिकानों की भी जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक देर शाम तक वहां से कुछ उल्लेखनीय बरामद नहीं हो सका है। अभियंता सीवान जिले के जामो बाजार क्षेत्र के खुलासा गांव के हैं। वह गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता के अतिरिक्त प्रभार में हैं।
सेना को गोली छूट: मोदी
भास्कर के अनुसार पहलगाम आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बड़ा फैसला किया। पीएम आवास पर तीनों सेना प्रमुखों के साथ करीब डेढ़ घंटे तक चली उच्च स्तरीय बैठक में मोदी ने सेना को खुली छूट दे दी। उन्होंने कहा, जवाबी कार्रवाई का तरीका, जगह और समय तय करने का अधिकार आपको दिया जा चुका है। सेना ऑपरेशन पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को करारा जवाब देना हमारा दृढ़ राष्ट्रीय संकल्प है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस अनिल चौहान भी थे। इस बैठक के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी प्रधानमंत्री आवास में मोदी से मुलाकात की। संभवतः पहली बार है जब भागवत पीएम आवास पहुंचे।
कनाडा में कार्नी सरकार
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने देश के संघीय चुनाव में जीत हासिल की। ट्रंप की कनाडा के अमेरिका में विलय की धमकियों और व्यापार युद्ध ने लिबरल पार्टी की इस जीत में अहम भूमिका निभाई। कार्नी के प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोलिवरे अपनी सीट भी हार गए। पोलिवरे को कुछ महीने पहले कनाडा के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जा रहा था। अपनी सीट बचाने में विफल रहे खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह ने न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है।
60 लोग भेजे जा रहे थे पाकिस्तान, एक को मिली रुकने की इजाज़त
हिन्दुस्तान के अनुसार जम्मू-कश्मीर से मंगलवार को 59 पाकिस्तानी नागरिकों को निर्वासित किया गया। हालांकि, शौर्य चक्र विजेता कांस्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर भारत में ही रहेंगी। जम्मू-कश्मीर से मंगलवार सुबह 60 पाकिस्तानी नागरिकों को भारत से निर्वासित किए जाने की तैयारी थी। इसी क्रम में सभी 60 लोगों को बस से बाघा बार्डर ले जाया गया। इनमें मुदस्सिर अहमद शेख की मां भी शामिल थीं। उनके निर्वासन को लेकर शहीद के चाचा मोहम्मद युनुस ने सरकार से इसे रोके जाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि उनकी भाभी पाक अधिकृत कश्मीर की रहने वाली हैं जो हमारा ही हिस्सा है। ऐसे में उनका निर्वासन नहीं किया जाना चाहिए। वह बीते 45 साल से भारत में ही रह रही हैं। इसके बाद उन्हें लौटा दिया गया। मुदस्सिर अहमद शेख मई 2022 में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।
कुछ और सुर्खियां:
- जस्टिस बीआर (भूषण रामकृष्ण) दवाई अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया होंगे, 14 मई को संभालेंगे पदभार
- पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रोफेसर शरद कुमार यादव को हटाया गया
- सीवान के नर्मदेश्वर तिवारी बने नए वायु सेना उप प्रमुख
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी से की बात ₹10 लाख देगी राज्य सरकार
- ईडी का दावा- बिजली कंपनी के मुखिया रहते हुए आईएएस अधिकारी संजीव हंसते मुंबई की फर्म से ली थी एक करोड़ की रिश्वत
अनछपी: पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में जो टिप्पणी की है उस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्पाइवेयर का इस्तेमाल गलत नहीं है। यह अच्छी बात है कि इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आम आदमियों के खिलाफ पेगासस के इस्तेमाल के आरोपों पर कोर्ट गौर करेगा। यह बिल्कुल सही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्पाइवेयर के इस्तेमाल में कुछ गलत नहीं है लेकिन सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा का नहीं बल्कि जासूसी करने और व्यक्तिगत निजता यानी प्राइवेसी का था। ऐसा आरोप लगता है कि सरकार लोगों की प्राइवेसी में ताक झांक करती है और उन पर निगरानी रखती है। यह आरोप लगा था कि विपक्षी नेताओं पर निगरानी रखने के लिए सरकार ने इसराइल में निर्मित स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल किया था। सरकार ने इस बात से ना तो इंकार किया, ना ही इस बात का इकरार किया और ना आज तक यह बात साफ है कि सरकार इस मामले में क्या कहती है। वैसे, अब यह लगता है कि सरकार ने यह मान लिया है कि उसने पेगासस का इस्तेमाल किया है। तो क्या विपक्षी नेताओं ने सरकार पर उनके व्हाट्सएप चैट्स की जासूसी करने का जो आरोप लगाया था, वह सही है? ऐसा लगता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ लेकर इस सवाल के जवाब से बचना चाहती है। यह भी लगता है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट का ध्यान असली मुद्दे से हटाने में एक हद तक कामयाब हो रही है। सरकार के वकील का कहना है कि पेगासस के बारे में अमेरिकी कोर्ट के फैसले में जो रिपोर्ट दी गई थी वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई चीज है और उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने भी कह दिया कि ऐसी रिपोर्ट को सार्वजनिक कर सड़क पर चर्चा का विषय नहीं बना सकते। लेकिन कोर्ट को इस बात पर पूरी गंभीरता से ध्यान देना होगा कि आरोप यह है कि पेगासस से विपक्षी नेताओं की जासूसी की गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ लेकर विपक्षी नेताओं की जासूसी के लिए अगर पेगासस का इस्तेमाल हुआ है तो उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना सख्त आदेश जारी करेगा।
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