छ्पी-अनछपी: मोदी फिर बोले- कट्टे की सरकार, जमीन बेचने के लिए जमाबंदी जरूरी नहीं
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर कट्टे की सरकार की बात कही है हालांकि पिछले कई महीनो से बिहार में नीतीश सरकार के दौरान ही कट्टों से हत्याएं और लूट हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बिहार में जमीन बेचने के लिए जमाबंदी जरूरी नहीं है। एसआईआर के बाद वोटिंग परसेंटेज और कुल संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने बिहार के युवाओं को मजदूर बना दिया है।
पहली ख़बर
प्रभात ख़बर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि बिहार में एक बार फिर एनडीए सरकार तय है. सुशासन की सरकार पुनः बनेगी. “यहां की जनता किसी भी कीमत पर जंगल राज को लौटने नहीं देना चाहती. उन्होंने कहा कि आरजेडी वालों ने भ्रम फैलाने की कोशिश की, जब खुद कांग्रेस उन पर भरोसा नहीं करती है, तो बिहार की जनता कैसे उन पर भरोसा करेगी. राजद की घोषणा पत्र पर कांग्रेस को ही भरोसा नहीं है. बिहार की जनता नरेंद्र-नीतीश के ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करती है. बिहार की जनता नहीं चाहती है कि यहां कट्टे की सरकार बने. आरजेडी ने कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा रख कर मुख्यमंत्री की चोरी की. उन्होंने कहा कि विरोधियों ने बिहार के युवाओं को भ्रमित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन सारी योजना विफल हो गयी. विहार का जागरूक नौजवान जानता है कि राजद-कांग्रेस के इरादे क्या हैं.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को औरंगाबाद के देव मोड़ स्थित मैदान और भभुआ के सरदार बल्लभ भाई पटेल मैदान में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे.
क्या एसआईआर ने बढ़ाया वोटिंग प्रतिशत?
भास्कर के अनुसार वोट प्रतिशत बढ़ने से हर तरफ खलबली है। इधर एनडीए में। उधर महागठबंधन में। एनडीए में खलबली का कारण है कि बढ़ा हुआ वोट कहीं बदलाव का तो नहीं है? महागठबंधन में खलबली की वजह ये है कि महिलाओं के बड़े प्रतिशत को नीतीश बाबू तो नहीं ले उड़े? लेकिन इस बढ़े प्रतिशत की सबसे बड़ी वजह एसआईआर यानी मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण हो सकता है। एसआईआर की भूमिका को इस तरह समझ सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कुल मतदाता 7.89 करोड़ थे। एसआईआर के कारण 69.30 लाख का नाम कट गया और 21.53 लाख नए नाम जुड़ गए। इस तरह इस बार कुल 7.41 करोड़ मतदाता रह गए। पिछले चुनाव से 48 लाख मतदाता कम। ये जो कम हुए इनमें कुछ ऐसे थे जिनके नाम दो जगह थे। कुछ ऐसे जो कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं। कुछ ऐसे भी जिनकी मृत्यु हो चुकी थी।
2020 से 20 लाख ज़्यादा वोट पड़े
हिन्दुस्तान के अनुसार वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों पर गुरुवार को पिछली बार के मुकाबले 31 लाख 81 हजार 858 अधिक मत पड़े। पहले चरण वाली 121 सीटों पर 2020 के चुनाव में 56.15 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह कुल करीब 2, 08, 76, 953 वोट होते हैं। इन सीटों पर 2025 के चुनाव में 65 फीसदी वोट पड़े। जो कुल 2,40,58,811 वोट हैं। इस प्रकार, 2020 की तुलना में 2025 में इन सीटों पर 31 लाख 81 हजार 858 अधिक वोट पड़े। प्रतिशत में यह बढ़ोतरी करीब 8.85 प्रतिशत की है।
प्रधानमंत्री ने बिहार के युवाओं को मजदूर बना दिया: राहुल
हिन्दुस्तान के अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर बिहार के युवाओं को हिन्दुस्तान का मजदूर बना दिया है, जबकि बिहार के युवाओं में इतनी प्रतिभा और क्षमता है कि उन्हें मजदूर नहीं, बल्कि देश का मालिक होना चाहिए। ये बातें राहुल गांधी ने शुक्रवार को बांका के अमरपुर के कठैल मैदान में आयोजित जनसभा में कहीं। उन्होंने कहा कि बिहार के बुनकरों, मखाना की उपजने वाले किसानों समेत अन्य जरूरतमंद लोगों की मदद एनडीए सरकार नहीं कर रही है। इसी वजह से यहां के लोग मजबूरी में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। महागठबंधन की सरकार बनी तो रोजगार के अवसर पैदा कर पलायन रोका जाएगा।
बिहार में जमीन बेचने के लिए जमाबंदी जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के उस संशोधन को रद कर दिया है, जिसके तहत बिना जमाबंदी या होल्डिंग नंबर के किसी भी जमीन की बिक्री या उपहार (गिफ्ट डीड) की रजिस्ट्री नहीं की जा सकती थी। शीर्ष न्यायालय ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि बिहार निबंधन नियमावली, 2008 के नियम 19(17) और 19 (18) में 2019 में किया गया संशोधन अवैध है, क्योंकि यह पंजीयन अधिनियम, 1908 की धारा 69 के तहत प्रदत्त अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री के लिए जमाबंदी या होल्डिंग नंबर प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं रहेगा। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची ने शुक्रवार को समीउल्लाह की ओर से दायर एसएलपी पर सुनवाई के बाद 34 पन्नों में विस्तृत फैसला सुनाया।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल में खराबी से फ्लाइट्स में हुई देरी
हिन्दुस्तान के अनुसार दिल्ली हवाईअड्डे पर यातायात नियंत्रण प्रणाली (एटीसी) में शुक्रवार को आई तकनीकी खराबी का असर पटना के विमानों पर भी पड़ा। शुक्रवार को पटना के 21 विमान देरी से आए-गए। इनमें दिल्ली के अलावा अन्य शहरों के विमान भी शामिल हैं। पटना में विमानों की लेटलतीफी 16 मिनट से लेकर लगभग दो घंटे तक रही। उधर, दिल्ली हवाई अड्डे पर 700 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हालांकि, बताया गया कि देर रात तकनीकी खामी को दूर कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि सिस्टम अब पूरी तरह से चालू है। दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा देश का सबसे व्यस्त हवाईअड्डा है, यहां से हर दिन 1500 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। ऐसे में उड़ान सेवाओं के प्रभावित होने से हजारों यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कुछ और सुर्खियां:
- वोटर लिस्ट के एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में 11 नवंबर को सुनवाई
- तेजस्वी यादव फिर बोले- हमारी सरकार ₹500 में रसोई गैस सिलेंडर देगी
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बोले- व्यापार वार्ता अच्छी चल रही, अगले वर्ष जाऊंगा भारत
- रूस में पिछले महीने लापता हुए राजस्थान के मेडिकल छात्र अजीत सिंह चौधरी का शव मिला
- पटना के रामकृष्ण नगर थाने के जीरो माइल के पास दिनदहाड़े 10 लाख की लूट, विरोध करने पर गोली मारी
अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनाव के दौरान अपनी भाषा के लिए पहले भी आलोचना होती रही है और इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने जिस तरह कट्टा और क अक्षर से बनने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया है वह भी हैरत में डालने वाला है। यानी उन्हें तुकबंदी बहुत पसंद है और शायद उनकी टीम को भी यह लगता हो कि लोगों को तुकबंदी अच्छी लगती है। जिस तरह उन्होंने क अक्षर से बनने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया, उसके बाद कई लोगों ने इस बात पर आपत्ति की कि दरअसल यह सिख समुदाय में क अक्षर से बनने वाले शब्दों की नकल है जो आपत्तिजनक है। इसी तरह उन्होंने अभी जैसे 6 गोली सिक्सर वाला गाना गया उसे बेहद फूहड़ माना गया। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के कथित फूट को बढ़ा चढ़ा कर पेश करने की कोशिश में प्रधानमंत्री यह भी कह रहे हैं कि राजद ने कांग्रेस पर कट्टा रखकर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनवाया है। आज एक अखबार में जिस तरह ‘कट्टे की सरकार’ का इस्तेमाल हुआ उसे अचानक यह बात याद आ गई कि पिछले कुछ महीनों में बिहार में जो कथित डबल इंजन की सरकार है उसके रहते हुए कैसे कट्टों का इस्तेमाल कर मर्डर और लूट की घटनाएं हुई हैं। पटना के बेली रोड के बड़े अस्पताल में दिनदहाड़े कट्टा लेकर ही अपराधी घुसे थे और इत्मीनान से मर्डर कर वहां से लौटे थे। कल यानी बिहार में पहले चरण के मतदान के एक दिन बाद 7 नवंबर को पटना में दिनदहाड़े गोली चलाकर 10 लाख रुपए लूट लिए गए और विरोध करने वाले पर फायरिंग भी की गई जिसमें वह घायल हो गया। यह दो घटनाएं तो बानगी हैं, वरना पूरे बिहार में कट्टों के इस्तेमाल से मर्डर और लूटपाट की घटनाएं आये दिन होती रहती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कट्टों की सरकार के बहाने नरेंद्र मोदी कहीं नीतीश कुमार सरकार पर तो सवाल नहीं खड़े कर रहे हैं?
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