छपी-अनछपी: ममता व अखिलेश से अलग-अलग मिले नीतीश, आनंद मोहन+26 की रिहाई के लिए नोटिफिकेशन

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अलग-अलग मुलाकात की है जिनकी खबरें अखबारों में छाई हुई हैं। गोपालगंज के तत्कालीन बीएमजी कृष्णैया के हत्याकांड में दोषी आनंद मोहन को रिहा करने के नोटिफिकेशन की खबर भी सभी जगह पहले पेज पर है।

भास्कर की सबसे बड़ी सुर्खी है: ‘भाजपा मुक्त भारत’ मिशन पर नीतीश; यूपी, बंगाल, बिहार में सपा-टीएमसी के साथ लड़ेंगे। जागरण की पहली खबर है: नीतीश को मिला ममता और अखिलेश का भी साथ। हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी हेडलाइन है: नीतीश को ममता अखिलेश का साथ। भास्कर लिखता है ‘मिशन भाजपा मुक्त भारत’ सोमवार को कई कदम आगे बढ़ा दिखा जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और लखनऊ के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले। नीतीश के साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी थे। दोनों मुलाकात अलग-अलग कोलकाता और लखनऊ में हुई। सब ने इन तीनों राज्यों के कुल 162 लोकसभा सीटों पर इकट्ठा होकर भाजपा को हराने पर सहमति जताई। बीते 12-13 अप्रैल को नीतीश कुमार की मौजूदगी में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं ने भी ठीक यही बात कही थी।

मर्डर के दोषी आनंद मोहन की रिहाई पर मुहर

भास्कर की एक लंबी सुर्खी है: 14 साल की सजा काट चुके आनंद मोहन और 26 कैदी रिहा होंगे, इनमें से 7 को हर महीने थाने में देनी होगी हाजिरी, विधि विभाग नेरिहाई का नोटिफिकेशन जारी किया। राज्य सरकार ने गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या में जेल में बंद पूर्व सांसद आनंद मोहन समेत 27 बंदियों को रिहा करने से संबंधित आदेश जारी कर दिया। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 20 अप्रैल को हुई राज्य सज़ा माफी बोर्ड की बैठक में इन कैदियों को छोड़ने से संबंधित प्रस्ताव पर सहमति बनी। इसके बाद विधि विभाग ने सभी पहलुओं पर समीक्षा करने के बाद इसकी अनुमति देते हुए आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश विधि सचिव रमेश चंद्र मालवीय की तरफ से जारी किया गया है। इसके आधार पर जेल निदेशालय ने सभी संबंधित कैदियों को छोड़ने से जुड़ा निर्देश संबंधित जेलों को भेज दिया। इस सूची में आनंद मोहन 11वें नंबर पर हैं। वर्तमान में वे सहरसा मंडल कारा में बंद हैं। सूचना के अनुसार, इसमें 15 से अधिक कैदी लोक सेवकों की हत्या के आरोप में सजा काट रहे हैं।

कर्नाटक चुनाव में बयानबाज़ी

कर्नाटक चुनाव के लिए बयानबाज़ी का दौर जारी है। हिन्दुस्तान में सुर्खी है: कांग्रेस तुष्टिकरण कर रही: शाह। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण की राजनीति करती है। जबकि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर विकास को प्राथमिकता देती है। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक के आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा पूर्ण बहुमत से जीत हासिल कर फिर से सरकार बनाएगी। अमित शाह ने सोमवार को कर्नाटक के गुंडलुपेट में एक जनसभा के दौरान कहा कि राज्य के चुनाव में भाजपा के विकास और कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति के बीच मुकाबला है।

राहुल ने बेरोजगारी का सवाल उठाया

हिन्दुस्तान की ख़बर है: बेरोजगारी चार दशकों में सर्वाधिक राहुल गांधी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा पर सरकारी कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने और देश में सरकारी नौकरियों की संख्या को कम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी चार दशकों में सबसे अधिक है। राहुल ने यहां हावेरी जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार पर निशाना साधा।

इस केस के 50 साल, जानना जरूरी

जागरण में यह सुर्खी अहम है: संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा तय करने वाले केशवानंद भारती फैसले के 50 वर्ष पूरे। संविधान संशोधन करने की संसद की व्यापक शक्तियों को सीमित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के केशवानंद भारती फैसले के 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस फैसले में शीर्ष कोर्ट ने संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिया था, साथ ही न्यायपालिका को संविधान संशोधन की समीक्षा करने का अधिकार भी दिया था। सोमवार को केशवानंद भारती मामले में बहस लिखित दलीलों और फैसले के विवरण वाला एक वेब पेज लोगों को समर्पित किया गया। 24 अप्रैल 1973 को सुनाए गए इस ऐतिहासिक फैसले में शीर्ष अदालत की 13 सदस्य पीठ ने 7-6 के बहुमत से संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिया था।

कुछ और सुर्खियां

  • फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों की जांच 3 महीने में करे निगरानी ब्यूरो: पटना हाई कोर्ट
  • राहुल गांधी को मोदी सरनेम वाले मामले में पटना हाई कोर्ट से 15 मई तक राहत
  • भाजपा सांसद व कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पहलवान
  • जंग में फंसे सूडान से भारतीयों को लाने के लिए अभियान शुरू
  • आईजीआईएमएस में सुबह 6:00 से रात 10:00 बजे तक होगा रजिस्ट्रेशन
  • अतीक अशरफ हत्या मामले की सुप्रीम कोर्ट 28 को करेगा सुनवाई
  • जीतन राम मांझी के विवादित बोल रामचरितमानस में भरा है कचरा
  • पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से नाराज लोगों ने थाना घेरा, बाजार बंद
  • भारत आने वाले विदेशी मरीज बढ़े, वजह अन्य देशों के मुकाबले इलाज सस्ता
  • इस्लामोफोबिक तारिक फ़तह का देहांत

अनछपी: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता की कोशिश जारी रखे हुए हैं यह विपक्ष के लिए अच्छा संकेत है लेकिन उनकी यह मुलाकात फिलहाल एक जगह और एक साथ नहीं हो रही है यह बात भी ध्यान में रखने वाली है। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस और दूसरे दलों के नेताओं के साथ दिल्ली में मुलाकात की थी। अब उन्होंने लखनऊ में अखिलेश यादव और कोलकाता में ममता बनर्जी से अलग अलग ही मुलाकात की। 2024 के चुनाव में वैसे तो अभी साल भर बाकी है लेकिन रणनीति बनाने के लिए इतने वक्त की ज़रूरत होती है। फिलहाल ये नेता तो नीतीश कुमार के साथ बताए जाते हैं लेकिन जब चुनाव का वक्त आएगा और जब सीटों पर फैसला होगा उस समय विपक्षी एकता के दावे के असलियत का पता चलेगा। सबको इतना पता है कि अगर वह एक सीट पर अलग-अलग लड़े तो भारतीय जनता पार्टी को लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाने से रोकना उनके लिए बेहद मुश्किल होगा। सच्चाई तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहते भारतीय जनता पार्टी को बिखरे हुए विपक्ष का लाभ सबसे ज्यादा होगा। ऐसे में यह सवाल करना लाजमी है कि क्या इन मुलाकातों से कम से कम मोटे तौर पर यह समझौता हो पा रहा है कि एक सीट पर विपक्ष का एक ही उम्मीदवार होगा? इस तरह के फैसले के लिए अलग-अलग मुलाकातों से बात नहीं बनने वाली है। इसके लिए विपक्ष के सभी दलों और नेताओं को एक साथ बैठना होगा। हो सकता है इसके बावजूद कुछ सीटों पर विपक्ष अकेला उम्मीदवार देने में कामयाब ना हो लेकिन अगर वह मोटे तौर पर इस बात के लिए सहमत होता है तो विपक्षी एकता की इस कोशिश को सफल माना जाएगा। फिलहाल नीतीश कुमार अपने पहल में कामयाब दिखते हैं लेकिन उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है।

 

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