छपी-अनछपी: नीतीश ने दोहराया- गड़बड़ी करने वाले बचेंगे नहीं, विपक्षी एकता के लिए कई नेताओं से बात

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार शरीफ और सासाराम की रामनवमी हिंसा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर यह बात दोहराई है कि गड़बड़ी करने वाले बचेंगे नहीं। उनका यह बयान मुख्य खबर तो नहीं लेकिन उसे काफी प्रमुखता मिली है। कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे द्वारा विपक्षी नेताओं की बातचीत को भी अहमियत दी गई है। पटना मेट्रो के 2026 तक बनने से संबंधित खबरें पहले पेज की पहली खबर बनी है।

भास्कर ने लिखा है बिहार शरीफव सासाराम की वारदात के जिम्मेदार बख्शे नहीं जाएंगे: नीतीश। जागरण की सुर्खी है: जानबूझकर माहौल खराब करने वालों का पता लगाया जा रहा: नीतीश कुमार। हिन्दुस्तान ने लिखा है: उपद्रव की जांच हो रही गड़बड़ करने वाले बचेंगे नहीं: सीएम। बिहार में हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के बयान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनलोगों से हमें कोई मतलब नहीं है। बिहार में लोगों के बीच कोई विवाद नहीं हो, इसको लेकर हमलोगों ने शुरू से काम किया है। एक-दो जगहों पर आपस में झगड़ा होने पर तुरंत उसे काबू किया गया। यहां पर एक-एक चीज पर ध्यान दिया जाता रहा है। बिहार में यह सब नहीं होता था। आज-कल कुछ हुआ है तो पूरे तौर पर इसकी जांच की जा रही है। इसको लेकर सभी लोग अलर्ट हैं। मुख्यमंत्री शुक्रवार को शेखपुरा में राज्य स्वास्थ्य समिति के नवनिर्मित स्वास्थ्य भवन का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के सभी अधिकारी इस काम में लगे हुए हैं। अंदरुनी तौर पर सब कुछ पता चल जाएगा। पता चल जायेगा कि किसने यह सब किया है। गड़बड़ करने वालों को पकड़ा जा रहा है।

विपक्षी एकता की कोशिशें

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: विपक्षी एकता के लिए खरगे ने नीतीश कुमार, स्टालिन और उद्धव से की बात। इसके अनुसार संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म किए जाने के बाद भाजपा के खिलाफ व्यापक विपक्षी एकता की जरूरत पर बनी सैद्धांतिक सहमति को हकीकत में बदलने की कसरत कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने शुरू कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस सिलसिले में विपक्ष के दिग्गज नेताओं की बैठक बुलाने की पहल करते हुए आपसी मंत्रणा का दौर शुरू कर दिया है। इस क्रम में खरगे ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ शिवसेना उद्धव गुट के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से बात की है।

पटना मेट्रो में 3-4 साल

भास्कर की पहली खबर है: पटना में 2026 तक दौड़ेगी मेट्रो, शुरू हुआ चैनल बनाने का काम। अखबार लिखता है कि पटना के मोइनुल हक स्टेडियम से अंडरग्राउंड मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने महावीर टीबीएम का बटन दबाकर अंडरग्राउंड मेट्रो के निर्माण का शुभारंभ किया। मोइनुल हक स्टेडियम से जमीन के अंदर जाने वाला टीबीएम यानी टनल बिल्डिंग मशीन 5 महीने बाद पटना विश्वविद्यालय के पास निकलेगा। यह मिट्टी काटने के साथ कंक्रीट और सीमेंट का टनल भी बनाएगा। पटना में 2026-27 से मेट्रो दौड़ने लगेगी।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी सुर्खी है: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मोइनुलहक स्टेडियम में पटना मेट्रो रेल के लिए बोरिंग मशीन का बटन दबाकर टनल खुदाई कार्य का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने पटना मेट्रो रेल निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि पटना में मेट्रो निर्माण का सपना जल्द पूरा होगा। इसके लिए फंड की कोई कमी नहीं होगी। फंड की व्यवस्था पहले से की हुई है। ‘जाईका’ (जापान) से 60 प्रतिशत फंड आना है। इसको लेकर एग्रीमेंट हो गया है।

बिहार सरकार की दावत-ए-इफ्तार

भास्कर की सुर्खी है: सीएम के इफ्तातार में रोजेदारों ने राज्य की तरक्की की मांगी दुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आवास पर रमजान के मौके पर रोजेदारों को दावते इफ्तार पर आमंत्रित किया। इफ्तार में बड़ी संख्या में रोजेदार एवं गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। इस मौके पर मीतन घाट के सज्जादानशीन हजरत सैयद शाह शमीम उद्दीन अहमद मूनअमी ने रमजान और रोजे की अहमियत पर प्रकाश डाला और सामूहिक दुआ की। अखबार के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने सामूहिक दुआ में शामिल होकर राज्य की तरक्की आपसी भाईचारे एवं मोहब्बत के लिए खुदा से दुआ है कीं। इफ्तार के आयोजन पर कुछ लोगों का एतराज होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका आयोजन सरकार की तरफ से किया जाता है। विपक्ष के लोग और अन्य दलों के लोग भी पार्टी के स्तर पर इसका आयोजन करते हैं।

“मिशनरियों से अधिक सेवा”

जागरण और भास्कर में छपी खबर के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दक्षिण भारत में हिंदू संतों की सेवाओं की तारीफ की है। उन्होंने ईसाई मिशनरियों की तुलना में हिंदू आध्यात्मिक संतों के योगदान को बहुत अधिक बताया। जयपुर में संघ से जुड़े सेवा भारती के राष्ट्रीय सेवा संगम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, “सेवा एक स्वस्थ समाज के निर्माण की ओर ले जाती है यदि समाज का कोई वर्ग वंचित है तो उसे देश की भलाई के लिए उठाना होगा।”

कुछ और सुर्खियां

  • आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण रेड्डी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल
  • भाजपा के लोग पहले इफ्तार में आते थे उन्हीं से पूछिए,क्यों नहीं आये: नीतीश
  • फार्मासिस्ट के 1539 पदों पर नियुक्ति के लिए 4 मई तक आवेदन
  • दूसरी क्लास तक नहीं होगी लिखित परीक्षा
  • इंटर पास छात्र आईआईएम, बोधगया से कर सकेंगे मैनेजमेंट कोर्स
  • आजम खान को राहत जोहर ट्रस्ट के पक्ष में आया फैसला
  • मैट्रिक कंपार्टमेंटल के लिए आवेदन की तिथि 10 तक बढ़ी
  • अग्निवीरों को सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए परीक्षा पास करनी होगी
  • भोजपुरी हीरोइन आकांक्षा की मौत के मामले में गायक समर सिंह गिरफ्तार
  • नाजिम ने किया ऐलान; इमारत-ए-शरिया राजनीतिक इफ्तार में नहीं होगी शामिल

अनछपी: इफ्तार की दावत और पॉलिटिक्स का रिश्ता नया नहीं है लेकिन इस साल बिहार शरीफ और सासाराम के दंगों के बाद लोगों को इस बात का दुख है कि एक तरफ इतने गहरे जख्म लगे हैं तो दूसरी तरफ इफ्तार पार्टियां जारी हैं। इमारत-ए-शरिया की ओर से यह बयान जारी किया गया है कि वह पॉलिटिकल इफ्तार पार्टी में शामिल नहीं होगी। इमारत-ए-शरिया को बिहार का सबसे बड़ा मुस्लिम संगठन माना जाता है और इसकी यह घोषणा थोड़ी ऊहापोह पैदा करने वाली है। इमारत-ए-शरिया वैसे तो एक धार्मिक संगठन है लेकिन इसका राजनीतिक लोगों से जुड़ाव चर्चित रहा है। साथी यह संस्था सामाजिक कार्य भी करती है। ऐसे में राजनीतिक लोगों से मेलजोल इसका हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि उनके आवास पर होने वाला इफ्तार सरकारी आयोजन होता है। कोरोना के कारण इफ्तार पार्टी का आयोजन रुका हुआ था। बहुत से लोगों का मानना है कि हाल के दंगों के मद्देनजर इफ्तार पार्टी को फिलहाल टाल देना चाहिए था। इमारत-ए-शरिया का स्टैंड अपनी जगह सही हो सकता है लेकिन इस आयोजन में मौलाना शमीम अहमद मुनअमी जैसे लोगों का शामिल होना भी अर्थ पूर्ण है। इसमें कोई दो राय नहीं कि बड़े लोगों की इफ्तार की दावत में सिर्फ बड़े लोगों को बुलाया जाता है। पॉलिटिकल पार्टी की तार में अधिकतर पॉलिटिकल लोग ही जुड़ते हैं। दूसरी तरफ इफ्तार की दावत सामाजिक मेलजोल का मौका भी देती है। बहुत से लोगों के लिए यह एक अर्द्ध धार्मिक आयोजन ही है। बेहतर हो कि इफ्तार की दावत या तो सबके लिए हो या जो गरीब-गुरबा लोग छूट गए हों उनके लिए भी कोई न कोई व्यवस्था हो ताकि इफ्तार की गरिमा बनी र

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