छपी-अनछपी: बिहार में पांच साल में एक लाख शिक्षकों की भर्ती होगी, ईरान-अमेरिका समझौता करीब

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में अगले पांच साल तक हर साल बीस हज़ार शिक्षकों की भर्ती होगी। ईरान और अमेरिका के बीच जंग बंद करने का समझौता लगभग तय माना जा रहा है। मुज़फ्फरपुर के मुस्तफा को पाकिस्तान के हथियार तस्करों से कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

और, मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से 400 मीटर की दूरी पर शराब की बोतलें मिलने से सनसनी फैल गई।

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि अगले पांच साल में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति होगी. इसके तहत हर वर्ष कम-से-कम 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी. इसके लिए हर वर्ष जुलाई महीने में विज्ञापन जारी किया जायेगा. मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने ये निर्देश दिये. बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने खुद ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. सीएम ने कहा कि राज्य के बच्चों को अच्छी व गुणवतापूर्ण शिक्षा मिले, इसे लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है. इस दिशा में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश दिये गये. बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अलावा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल, सीएम के प्रधान सचिव दीपक कुमार, सचिव लोकेश सिंह व संजय कुमार सिंह मौजूद थे.

8054 राजस्व कर्मचारियों की होगी भर्ती

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में 8054 राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति होगी. इनकी तैनाती हर हल्के में की जायेगी. इनकी नियुक्ति से राजस्व विभाग का हर काम समय पर पूरा होगा. यह जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने दी है. उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग को इस संबंध में अधियाचना भेजी थी. अब सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे कर्मचारी चयन आयोग को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है.

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते का अंतिम मसौदा तैयार

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते का अंतिम मसौदा तैयार है। अल अरबिया चैनल ने इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में जमीन, समुद्र और हवा तीनों क्षेत्रों में बिना शर्त युद्धविराम शामिल है। इसमें दोनों पक्षों द्वारा सैन्य, नागरिक या आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। समझौते से अरब खाड़ी, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में आवाजाही की स्वतंत्रता की गारंटी मिलने की उम्मीद है। मसौदा समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी करने और संबंधित पक्षों के बीच विवाद सुलझाने के लिए संयुक्त तंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने का भी प्रावधान है। लंबित मुद्दों पर वार्ता समझौता प्रभावी होने के सात दिनों के भीतर शुरू हो जाएगी।

मुज़फ्फरपुर का मुस्तफा पाकिस्तान के हथियार तस्करों से कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तार

बिहार एटीएस ने पाकिस्तानी हथियार तस्कर शाहजाद भट्टी के गैंग से जुड़े मुजफ्फरपुर के रतनपुर गांव निवासी मो. मुस्तफा को गिरफ्तार किया है. एटीएस की तकनीकी जांच में मोबाइल से डिलीट किये गये डाटा, चैट बैकअप और एप्लीकेशन रिकॉर्ड से उसके शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी राणा हुसैन के साथ लगातार संपर्क में होने का खुलासा हुआ है. एटीएस की ओर से शुक्रबार को बताया गया कि प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर मो. मुस्तफा के खिलाफ जासूसी, देश विरोधी गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि मो. मुस्तफा के देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की सूचना मिली थी. इसके आधार पर बिहार एटीएस ने मुजफ्फरपुर के रतनपुर गांव में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया. उसके पास से मिले डिजिटल साक्ष्यों से देश की सुरक्षा प्रभावित करने की साजिश का पता चला.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, माता-पिता आईएएस तो रिज़र्वेशन क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अगर माता-पिता दोनों आईएएस अधिकारी हैं तो ‌उन्हें आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए, उन्होंने कहा कि यदि ऐसे बच्चों के लिए आरक्षण की मांग की जाती रही तो हम इस चक्र से कभी भी बाहर नहीं निकल पाएंगे। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर नोटिस जारी करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के जिन परिवारों ने शैक्षणिक और आर्थिक रूप से तरक्की कर ली है, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों दिया जाना चाहिए। अदालत ने मौखिक तौर पर कहा, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के साथ सामाजिक गतिशीलता आती है, ऐसे में ओबीसी के संपन्न परिवारों यानी क्रीमी लेयर को आरक्षण से बाहर हो जाना चाहिए। कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता राघवेंद्र फकीरप्पा चंद्रनवर, जिसके माता-पिता दोनों राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, को क्रीमी लेयर के आधार पर आरक्षण से बाहर रखे जाने को सही ठहराया था।

मुख्यमंत्री आवास के पास शराब की बोतलें मिलीं

भास्कर के अनुसार शुक्रवार की सुबह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास (5, देश रत्न मार्ग) से 400 मीटर की दूरी पर प्रीमियम ब्रांड की 12 बोतलें मिली हैं। सड़क किनारे मिले बैग से शिवास रीगल, ब्लैक लेबल, रेड लेबल और डबल ब्लैक ब्रांड की बोतलें बरामद की गई हैं। बिहार में ब्लैक में शराब की ये प्रीमियम ब्रांड 10 से 15 हजार में बिकते हैं। ये सभी बोतलें देशरत्न उद्यान गेट के पास कचड़े के ढेर पर एक झोले में रखी हुई थी। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद शराब की खाली बोतलों के मिलने पर अब सियासत गरमा गई है। पटना के अति सुरक्षित वीवीआईपी इलाके की सुरक्षा में यह एक बड़ी चूक है। सचिवालय थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस खाली 12 बोतलों को थाना ले गई। इनमें दो बोतल टूटे हुए थे। सचिवालय थानेदार गौतम कुमार ने बताया कि पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालने में जुटी है। जिसने भी यहां पर शराब की बोतलें फेंकी है, उसे गिरफ्तार करेंगे।

कुछ और सुर्खियां:

  • सासाराम के सर्किल ऑफिसर (सीओ) अपने ही राजस्व कर्मचारी से 3 लाख घूस लेने के मामले में गिरफ्तार
  • जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने एक साल के लिए राजनीति से दूरी बनाई
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद को तीन दिन की जमानत दी
  • राजद प्रमुख लालू प्रसाद को सीबीआई की विशेष अदालत ने मेडिकल जांच के लिए सिंगापुर जाने के लिए पासपोर्ट रिलीज किया
  • तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के पद से इस्तीफा दिया
  • गया के खिज़रसराय में केंद्रीय मंत्री के जीतन राम मांझी के मंच पर पत्थर फेंकने के आरोप में दो हिरासत में

अनछपी: पश्चिम बंगाल में भाजपा की आई नई-नई सरकार ने सड़कों पर नमाज पढ़ने से रोकने के बारे में जिस तरह की बयानबाजी की और उसके बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जैसे नमाज को टारगेट किया है उससे तो लगता है कि नमाज पढ़ने वाले दिन रात सड़कों को रोके रखते हैं जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मस्जिदों में जगह कम रहने की वजह से हफ्ते में एक दिन जुमा को आधे घंटे के लिए जरूर कुछ जगहों पर सड़कों पर नमाज अदा की जाती है जिससे बचने की जरूरत है। कम से कम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नमाज रोकने की भाषा पर गौर करें तो साफ लगता है कि उनका मकसद हिंदू समाज को यह संदेश देना है कि उन्होंने कैसे मुसलमान को टाइट कर रखा है। अगर समस्या नमाज से थी तो उन्हें शायद यह कहना चाहिए था कि किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए सड़क को रोका जाना सही नहीं है लेकिन वह ऐसा कहते तो उन्हें मालूम है कि अक्सर किन धार्मिक वजहों से सड़कों को ब्लॉक किया जाता है। इससे तो यही लगता है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके मुख्यमंत्री समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर हिंदू चाहे तो कांवड़ यात्रा, पूजा पंडाल, जागरण और अन्य धार्मिक आयोजनों से सड़कों को ब्लॉक कर सकते हैं लेकिन ऐसा मुसलमान करेंगे तो उन पर पुलिसिया जुल्म किया जाएगा। समाज में नफरत फैलाने वाले कुछ लोग सड़क रोककर कांवड़ यात्रा करने जैसे धार्मिक आयोजनों को तो पूरे अधिकार के साथ सही बताने में लगे हुए हैं। यह समाज के लिए बेहद खतरनाक रवैया है और इसका एक सीधा-साधा हल यह है कि सभी धर्म के लिए एक नियम बनाया जाए। जहां भी सड़क को रोकने से परेशानी होती हो वहां किसी भी धर्म के आयोजन को अनुमति नहीं दी जाए लेकिन अगर ऐसी कोई समस्या नहीं है और इसके लिए समान रूप से अनुमति दी जाती है तो इससे समाज में भाईचारा बढ़ेगा।

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