छपी-अनछपी: एसआईआर पर संसद में घमासान, छह महीने में सौ लड़कियां लापता
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वोटर लिस्ट के एसआईआर पर संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन पक्ष और विपक्ष में घमासान मचा। बिहार मानवाधिकार आयोग में 100 से ज्यादा लापता लड़कियों का मामला दर्ज कराया गया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी का आज इस्लामाबाद घेराव।
और, जानिएगा कि एक हिन्दू परिवार ने किसकी यादगार में दान की कब्रिस्तान के लिए जमीन।
पहली ख़बर
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सोमवार को एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने दोनों सदनों में हंगामा किया। ये दल एसआईआर पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। लोकसभा में शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही पहले दो बार, फिर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष ने वॉकआउट किया। विपक्षी दलों ने दो टूक कहा कि वे एसआईआर समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सत्तारूढ़ दल से कहा कि वह विपक्ष को बांटने का प्रयास नहीं करें। सत्ता पक्ष ने कहा, विपक्ष एसआईआर चुनाव सुधारों पर चर्चा के समय के लिए कोई शर्त न रखे। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य शोर-शराबा करने लगे। इनमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके आदि के सदस्य थे। उच्च सदन में भी एसआईआर पर विपक्षी दलों ने तीखे तेवर दिखाए।
धनखड़ के मुद्दे पर भी हुई तीखी बहस
राज्यसभा में सोमवार को नए सभापति सीपी राधाकृष्णन के स्वागत में भाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि हम उन्हें फेयरवेल तक नहीं दे पाए। खरगे ने यह बात उस समय कही, जब सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने विरोध जताते हुए कहा कि यह अवसर ऐसा विषय उठाने के लिए उचित नहीं है। सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक के बाद प्रधानमंत्री सदन से चले गए।
बिहार मानवाधिकार आयोग पहुंचा 100 से ज्यादा लापता लड़कियों का मामला
जागरण के अनुसार छह महीने के भीतर राज्य के सीमावर्ती इलाकों से सौ से ज्यादा लड़कियों के लापता होने का मामला मानवाधिकार आयोग में पहुंच गया है। अधिवक्ता एसके झा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। अधिवक्ता ने बताया कि देश के अलावा नेपाल, चीन, ब्राजीले, सऊदी अरब में बेटियां बेची जा रही हैं। पूर्वी चंपारण से सटे भारत नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस प्रकार की घटना को अंजाम देने वाले तस्कर सक्रिय हैं। जुलाई में रक्सौल से 10, रामगढ़वा से तीन, आदापुर से चार, अगस्त में रक्सौल अनुमंडल के भेलाही, कौड़ीहार सहित विभिन्न स्थानों से 18, सितंबर में पूरे अनुमंडल के विभिन्न स्थानों से एक महिला सहित 17, अक्टूबर में 15 व नवंबर में 15 सहित कुल 83 लड़कियां लापता हुई हैं।
इमरान खान की पार्टी का आज इस्लामाबाद घेराव
पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने अपने नेता की रिहाई और ‘एकांत कारावास’ के विरोध में मंगलवार को इस्लामाबाद घेराव करेंगे और वहां हाई कोर्ट (आईएचसी) के बाहर विशाल प्रदर्शन करेंगे। पीटीआई के सभी सांसद मंगलवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इमरान को 4 नवंबर से पूर्ण एकांत कारावास में रखे जाने का आरोप है।
बेटे की मौत के बाद हिंदू पिता ने कब्रिस्तान के लिए दान की जमीन
बक्सर के राजपुर से प्रभात खबर की खबर युवा बेटे की सड़क हादसे में मौत के बाद उसके श्राद्धकर्म के दिन भावुक पिता ने बेटे के नाम की एक बीघा जमीन गांव में रहनेवाले मुस्लिम समुदाय के कब्रिस्तान के लिए दान कर दी. इस कब्रिस्तान का नाम शिवम उर्फ अहीर धाम कब्रिस्तान होगा. गम में डूबे एक हिंदू के मुस्लिम समुदाय के लिए किया गया यह दान चर्चा में है. लोग इसे सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल बता रहे हैं. चौसा प्रखंड की रामपुर पंचायत के डेवी डीहरा गांव निवासी वैद्यराज जनार्दन सिंह के पुत्र शिवम कुमार (25 वर्ष) की मौत 18 नवंबर को देहरादून में एक सड़क हादसे में हो गयी थी. शिवम सिंह ने बीटेक और एमबीए करने के बाद जड़ी-बूटी से जुड़ी दो कंपनियां खोली थी और एक कंपनी में पार्टनर था. देहरादून में 18 नवंबर को ऑफिस जाने के दौरान तेज रफ्तार कार ने उसकी बाइक में टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गयी. इस घटना के बाद एक बेटा के खो जाने से माता-पिता और अन्य परिजनों का दिल टूट गया. सोमवार को शिवम का श्राद्धकर्म था. उसी दिन परिवार ने कब्रिस्तान के लिए जमीन दान कर दी और शिवम की स्मृति में पौधारोपण करने का संकल्प भी लिया.
कब्रिस्तान के लिए ही क्यों दी जमीन?
कब्रिस्तान के लिए ही जमीन दान क्यों की, इस सवाल पर वैद्यराज जनार्दन सिंह ने बताया कि गांव में लगभग 50 घर मुसलमान परिवार रहते हैं, लेकिन उनके पास कब्रिस्तान के लिए जमीन नहीं है. इस परिवारों में किसी के निधन पर दफनाने के लिए बगल के गांव रसूलपुर ले जाना पड़ता था. इससे परेशानी के साथ विवाद भी होता था. मुसलमान परिवार किसी परिजन के निधन के बाद भी परेशानी झेलते हैं, इसलिए यह फैसला लिया कि मरने के बाद तो शांति से दो गज जमीन मिल जाये.
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: इस समय हम एक ऐसे भारत में रह रहे हैं जहां सरकार के हर कदम को ध्यान से देखना और उसके पीछे की मंशा को समझना जरूरी है। वैसे तो यह बात हर सरकार के लिए लागू होती है लेकिन इस समय इसे समझने की ज्यादा जरूरत है। आज दुनिया भर में डेटा प्राइवेसी के बारे में बहुत चर्चा होती है और भारत में भी प्राइवेसी के उल्लंघन की शिकायत बराबर मिलती रहती है। इस मुद्दे पर ताजा बहस इसलिए शुरू हुई है कि केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों से फोन में सरकारी साइबर सिक्योरिटी एप्लीकेशन ‘संचार साथी’ को अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने को कहा है। सरकार कह रही है कि नए फोन में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल हो ये सुनिश्चित करना होगा। दूरसंचार विभाग के अनुसार, जो मोबाइल फोन आदेश जारी होने के 90 दिन बाद भारत में बने या आयात हुए हैं उनमें इस ऐप का होना अनिवार्य है। 28 नवंबर को जारी आदेश में कहा है कि जो फोन पहले बिक चुके हैं उनमें सॉफ्टवेयर अपडेट दिया जाए, जिससे ये ऐप सिस्टम के अपडेट के साथ अनिवार्य रूप से फोन में इंस्टॉल होगा। उपयोगकर्ता ऐप को डिलीट नहीं कर सकते हैं। आदेश का सीधा असर एप्पल, सैमसंग, शियोमी, ओप्पो और विवो समेत अन्य ब्रांड पर पड़ेगा। इस नए ऐप को अनिवार्य रूप से फोन पर इंस्टॉल करने का मतलब है कि सरकार के पास फोन इस्तेमाल करने वाले की कॉल, मैसेज और लोकेशन की पूरी जानकारी होगी और आम आदमी को भी सरकार ट्रैक करती रहेगी। कई लोगों को लगता है कि ऐसा करके सरकार दरअसल आपके फोन में दर्ज सभी प्राइवेट चीजों को देख सकती है। मिसाल के लिए गैलरी में रखी गई तस्वीर भी अब सरकार के पास पहुंचेगी। बात सिर्फ इतनी नहीं है कि सरकार के पास आपकी निजी चीजें होगी बल्कि उन्हें बाजार में बेचे जाने का खतरा भी हमेशा बना रहेगा। एक तरफ फोन को साइबर अपराधियों से बचाने का मामला है तो दूसरी तरफ सरकार से प्राइवेसी पर हमला का खतरा है। सरकार के इस फैसले का विरोध बेहद जरूरी है और चाहे फोन खतरे में पड़ जाए लेकिन प्राइवेसी खतरे में नहीं पढ़नी चाहिए।
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