छपी-अनछपी: जामिया मामले में फंसाए गए शरजील बाइज़्ज़त बरी, एनआईए ने तीन को उठाया 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। शनिवार को बिहार के शरजील इमाम को कथित जामिया दंगा मामले में बाइज्जत बरी कर दिया गया लेकिन उसी दिन एनआईए ने पूर्वी चंपारण से 3 लोगों को एनआईए से संबंध रखने के शक में उठाया है। अदानी मामले का विवाद जारी है और अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बयान दिया है कि इससे अर्थव्यवस्था पर असर नहीं होगा जिसकी खबर प्रमुखता से ली गई है। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस करोल और एक अन्य जस्टिस अमानुल्लाह अब सुप्रीम कोर्ट के जज होंगे, इसकी जानकारी पहले पन्ने पर दी गई है।

हिन्दुस्तान ने एक महत्वपूर्ण जगह पर छोटी सी खबर दी है: राहत जामिया दंगे मामले में बिहार का शरजील बरी। जागरण ने इसे अंदर के पेज पर लिया है। हिन्दुस्तान लिखता है: दिसंबर, 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंसा से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की किरकिरी हो गई है। अदालत ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम, सफूरा जरगर, जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तनहा सहित 11 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया है। गौरतलब है कि शरजिल बिहार के जहानाबाद के रहने वाले हैं। अदालत ने कहा, पुलिस वास्तविक अपराधियों को पकड़ने में विफल रही और इन आरोपियों को ‘बलि का बकरा’ बनाया। हालांकि, अदालत ने इस मामले में एक आरोपी मोहम्मद इलियास के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आरोप गठित करने का आदेश दिया।साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरूल वर्मा ने अपने आदेश में कहा, आरोपपत्र और तीन पूरक आरोपपत्र पर गहन विचार करने के बाद जो तथ्य सामने आए उन्हें मद्देनजर यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पुलिस अपराध करने के पीछे वास्तविक अपराधियों को पकड़ने में पूरी तरह असमर्थ रही, लेकिन निश्चित तौर पर इन लोगों को इस मामले में फंसाने में कामयाब रही। इधर शरजील की मां अफशां रहीम ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि वह अन्य मामलों में भी निर्दोष साबित होंगे।

पीएफआई के शक पर कार्रवाई

जागरण की सबसे बड़ी खबर है पूर्वी चंपारण में एनआईए की छापेमारी पीएफआई के चार संदिग्ध हिरासत में। भास्कर ने लिखा है: बड़े नेता की हत्या की साजिश रच रहा था रियाज़, चार गिरफ्तार। हिन्दुस्तान में यह दूसरी सबसे बड़ी खबर है जिसके सुर्खी है: एनआईए ने पीएफआई के 3 संदिग्धों को दबोचा। हिन्दुस्तान के अनुसार एनआईए की विशेष टीम ने मोतिहारी के पीएफआई मॉड्यूल का खुलासा करते हुए यहां के चकिया थाना क्षेत्र के कुआंवा गांव में सघन छापेमारी की। इस दौरान आठ लोगों को शिकंजा कसा। इनमें तीन की गिरफ्तारी हुई और पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एनआईए की यह कार्रवाई हथियारों से जुड़े कुछ अहम जानकारी और पीएफआई की ट्रेनिंग कैंप से जुड़े मामले को लेकर हुई है। छापेमारी के दौरान सरगना रेयाज मारूफ उर्फ बब्लू, मो. दानिश और तनवीर रजा को गिरफ्तार किया गया। वहीं, मो. दानिश के पिता नेयाज, मो. आबिद, नैमुद्दीन, नौशाद और अख्तर अंसारी को हिरासत में लिया गया है। नेयाज पीएफआई का सचिव है और इस इलाके में सक्रिय है।

निर्मला सीतारमण का भरोसा

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी ख़बर है: अडानी मुद्दे से अर्थव्यवस्था पर असर नहीं: सीतारमण। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि अडानी समूह के 20 हजार करोड़ रुपये के एफपीओ वापस लेने से देश की अर्थव्यवस्था की छवि प्रभावित नहीं हुई है। वित्त मंत्री ने बजट के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले दो दिनों में ही आठ अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा आई है। वित्त मंत्री ने कहा कि हमारा व्यापक आर्थिक बुनियादी आधार या हमारी अर्थव्यवस्था की छवि इनमें से कोई भी प्रभावित नहीं हुई है। अडानी समूह के खिलाफ लगे आरोपों पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में नियामक अपना काम करेंगे।

सब कुछ सामने आ गया: नीतीश

हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर यह सुर्खी दी है: अडानी प्रकरण पर बोले सीएम, अब तो सब कुछ सामने आ गया। संसद में उद्योगपति गौतम अडाणी प्रकरण को लेकर हो रहे हंगामे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस मामले की जानकारी है। उनके काम का कोई खास मतलब नहीं है। अब तो सब कुछ प्रकाश में आ ही गया है तो उसे देखना चाहिए। मुख्यमंत्री समाधान यात्रा के दौरान शनिवार को किशनगंज में विकास योजनाओं का जायाजा लेने और जीविका दीदियों से संवाद करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के नए जज

पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह सुप्रीम कोर्ट के जज बनाये गए हैं। हिन्दुस्तान के अनुसार इसकी घोषणा होने के बाद शनिवार को उन्हें विदाई दी गई। गौरतलब है कि कोलेजियम ने गत वर्ष 13 दिसंबर को पांच जजों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए उनके नामों की अनुशंसा केंद्र सरकार से की थी। इनमें राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.वी संजय कुमार, पटना हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति अहसानुउद्दीन अमानुल्लाह और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा सूची में शामिल हैं।

देश, संविधान और मंत्री रिजिजू

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर है देश संविधान से चलेगा, कोई किसी को चेतावनी नहीं दे सकता: रिजिजू।  अख़बार लिखता है: सरकार व न्यायपालिका में टकराव के बीच केंद्रीय विधि मंत्री ने दिए सख्त संदेश। शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 150 में स्थापना दिवस के समारोह समारोह में मंत्री ने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी है लेकिन देश के मालिक इस देश के लोग हैं। हम सभी लोग सेवक हैं सेवा करने के लिए। उन्होंने कहा कि मालिक कोई है तो जनता है पूर्ण कोई गाइड है तो हमारा संविधान है। मालूम हो कि एक दिन पहले हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के स्थानांतरण के लिए की गई सिफारिशों को मंजूरी देने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस के कौल और एएस ओका की पीठ ने चेतावनी दी थी कि हमें ऐसा स्टैंड लेने को मजबूर ना करें जो सरकार को असहज कर दे।

कुछ और सुर्खियां

  • अप्रैल से होगी दूसरे चरण की जातीय गणना
  • अग्निवीर भर्ती में पहले ऑनलाइन परीक्षा होगी
  • उपेंद्र कुशवाहा को नोटिस भेजने की तैयारी में जदयू
  • केके पाठक के शब्द वाला एक और वीडियो प्रसारित
  • गुजरात में 14 सौ करोड़ रुपए के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सट्टा का पर्दाफाश
  • दूध 10 माह में ₹8 यानी 13.6% महंगा, दाम और बढ़ सकते हैं
  • पटना-बिहटा के विकल्प में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पर विचार करें सरकार: कोर्ट
  • मनी लॉन्ड्रिंग में राहुल गांधी के करीबी से पूछताछ

अनछपी: हिन्दुस्तान अखबार ने शरजील इमाम के बाइज्जत बरी होने पर सुर्खी में राहत शब्द का योग बिल्कुल सही किया है लेकिन एक नई आफत भी सामने है। यह बात सबको पता है कि शरजील इमाम जहानाबाद के रहने वाले हैं और इनके परिवार का सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड से गहरा संबंध रहा है। जामिया के जिस मामले में उन्हें फंसाया गया और फंसाया गया शब्द कोर्ट ने प्रयोग किया है। इसमें सोचने की बात यह है कि उन्हें फंसाया गया, 2 साल जेल में रखा गया और अब बरी कर दिया गया लेकिन इससे उनकी और उनके परिवार की छवि को जो नुकसान पहुंचा उसकी भरपाई कैसे होगी। शरजील उस समय पीएचडी कर रहे थे और उनकी थीसिस अभी पूरी नहीं हुई है तो उनके दो सालों के नुकसान की भरपाई तो कभी नहीं हो सकती। शरजील फिलहाल अभी चक्का जाम का आह्वान करने के आरोप में जेल में बंद रहेंगे क्योंकि उन पर यूएपीए का केस है। राहत की खबर के साथ साथ आफत की खबर यह आई के पूर्वी चंपारण से कई लोगों को एनआईए ने पीएफआई से संबंध रखने के शक में उठाया है। अखबारों ने कहीं हिरासत और कहीं गिरफ्तारी लिखी है और इसकी संख्या में भी अंतर है। सूचना दो वजह से आफत की है। एक तो अगर कोई वाकई देश विरोधी गतिविधि में संलिप्त है तो यह चिंता का विषय है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है। दूसरा यह कि अक्सर शक के आधार पर उठाए गए लोगों को लंबी कैद और कानूनी लड़ाई के बाद छोड़ा जाता है क्योंकि वास्तव में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं होता। इसमें अब यह जानने में काफी वक्त लगेगा कि पूर्वी चंपारण में जिन लोगों को पकड़ा गया है उनका दोष वाकई में क्या है।

 

 

 

 

 

 

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