छपी-अनछपी: किनारे लगे नीतीश- नया सीएम अगले माह, राज्यपाल आरिफ हटाए गए
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार की सेवा का दम भरने वाले नीतीश कुमार राज्यसभा जाने के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे और अगले महीने भाजपा का सीएम मिलेगा। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को हटा दिया गया है। भारत ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका को अपना बेस इस्तेमाल करने नहीं देगा।
और, जानिएगा कि जिस असिस्टेंट इंजीनियर की साल भर पहले नौकरी लगी उसके घर घूसखोरी में छापेमारी हुई तो 42 लाख कैश मिला।
पहली ख़बर
गुरुवार को जब पूरा बिहार होली के दूसरे दिन अलसाया हुआ था, उधर सत्ता के गलियारे में सरगर्मी उफान पर थी. सुबह 10:57 बजे खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक्स हैंडल पर यह ऐलान कर दिया कि वह राज्यसभा के सदस्य बनना चाहते हैं. इससे साफ हो गया कि अब वह राज्य के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे. इस बात में भी कोई अंदेशा नहीं रहा कि राज्य में नयी सरकार का सत्तारोहण होगा. राजनीतिक गलियारे में सवाल उठता रहा कि नयी सरकार की बागडोर कौन संभालेगा. पर इसके पहले यह भी कयास लगते रहे कि अगली एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री भाजपा कोटे से होगा या जदयू कोटे से. इधर, सूत्रों का कहना है कि इतने बड़े राजनैतिक बदलाव के पीछे भाजपा का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है. इस बीच तेजी से बदले घटनाक्रम में नीतीश ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया. वह 2005 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं (2014-15 के नौ महीनों को छोड़कर). भले उनके सहयोगी बदलते रहे. विधानसभा चुनाव के बाद बीते नवंबर में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में कहा कि प्रदेश में जो नयी सरकार बनेगी, मेरा उसे मार्गदर्शन और सहयोग मिलेगा.
अगला सीएम कौन और कब?
नयी सरकार का मुखिया कौन होगा, इसको लेकर अभी से अटकलें लग रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री के चयन में भाजपा चौकाने वाले नाम का एलान कर सकती है. नये नेता का चुनाव एनडीए के दो बड़े घटक जदयू और भाजपा की आपसी सहमति से होगा. भाजपा से मुख्यमंत्री बनाये गये तो उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. दूसरा नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का चर्चा में है. हिन्दुस्तान के अनुसार अगला मुख्यमंत्री बीजेपी को होगा और शपथ ग्रहण अप्रैल में होगा।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान हटाए गए
हिन्दुस्तान के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार की रात बिहार समेत आठ राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की। नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने के साथ बिहार में नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी होनी है। नये मुख्यमंत्री के साथ राज्य में नये राज्यपाल भी होंगे। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां को हटाकर उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उधर, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव को नगालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
ईरान ने अमेरिका का टैंकर उड़ाया
भास्कर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच अब तक चल रही आसमानी जंग के बाद समंदर भी धधक उठा है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने गुरुवार को फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को मिसाइल दाग कर तबाह कर दिया। इस घटना को अमेरिका द्वारा बुधवार को श्रीलंका के गॉल के पास उसके युद्धपोत डेना को तारपीडो मार कर डुबाने पर ईरान का जवाब माना जा रहा है। ईरानी युद्ध पोत भारत में युद्धाभ्यास ‘मिलन’ से लौट रहा था। अमेरिकी हमले में 87 नौसैनिकों की मौत हो गई जबकि 32 जख्मी हैं। इस बीच, ईरान का खाड़ी क्षेत्र में हल्ला बोल जारी है। ईरान ने गुरुवार को 13वें देश अजरबैजान पर भी मिसाइल अटैक किया। हालांकि, ईरान ने इस हमले से इनकार किया है।
अमेरिका को अपना बेस इस्तेमाल करने नहीं देगा भारत
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका से परस्पर लाजिस्टिक समझौते के बावजूद भारत का रुख स्पष्ट है कि वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान भारत के सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा। इससे पहले भारत ने अमेरिका के एक पूर्व सैन्य अधिकारी के उस दावे को भी गलत करार दिया था जिसमें दावा किया गया था कि हिन्द महासागर में ईरानी पोत आईआरआईएस देना को नष्ट करने के लिए भारतीय बेस का इस्तेमाल किया गया। विदेश मंत्रालय ने तथ्यों की जांच के बाद कहा कि यह पूरी तरह से निराधार है। इस पोत में करीब 100 ईरानी नौसैनिक सवार थे जिनमें से ज्यादातर की मौत की खबर है जबकि कुछ को श्रीलंका की नौसेना ने बचा लिया था।
बिहार से राज्यसभा की सीट 5, उम्मीदवार 6
जागरण के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए रिक्त हो रही पांच सीटों के विरुद्ध गुरुवार को नामांकन के अंतिम दिन बिहार से छह प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है। नामांकन करने वाले में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू के प्रत्याशी एवं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश महामंत्री शिवेश राम, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के अतिरिक्त छठे प्रत्याशी के रूप में राजद के वर्तमान राज्यसभा सदस्य अमरेंद्र धारी सिंह शामिल हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के दौरान अरसे बाद मतदान की स्थिति उत्पन्न होती दिख रही है।
असिस्टेंट इंजीनियर की साल भर पहले नौकरी लगी, छापेमारी में मिले 42 लाख कैश
भास्कर की खबर है कि पश्चिम चंपारण के शिक्षा विभाग के सहायक अभियंता रौशन कुमार के बेतिया स्थित घर के छज्जे से एसवीयू ने 42 लाख 500 रुपए बरामद किए। घूस की रकम उसके वार्ड नंबर 11 स्थित घर के छज्जे पर कार्टन में पैक थी। एसवीयू ने उसे 2 मार्च को 5 लाख घूस लेते गिरफ्तार किया था। रौशन लखीसराय का रहने वाला है। एक साल पहले ही नौकरी लगी थी। बेतिया में पहली पेस्टिंग थी। एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दाराद ने बताया कि नौतन के रहने वाले शम्श तबरेज ने शिकायत की थी कि स्कूलों के निर्माण में 57 लाख के बिल का भुगतान करने के लिए 10 फीसदी कमीशन मांग रहा है। शिकायत मिलने के बाद एसवीयू ने जांच की। शिकायत सही पाए जाने के बाद उसे 5 लाख घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। उसे जेल भेज दिया। एसवीयू अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। आय से अधिक संपत्ति का भी केस दर्ज करेगी। उसकी संपत्ति की जांच की जा रही है।
कुछ और सुर्खियां:
- भारत टी 20 वर्ल्ड कप के फाइनल में, भारत का स्कोर- 253, इंग्लैंड-246
- पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की कार का रांची में ओवरस्पीड में 1000 का चालान कटा
- ख़ामेनई की हत्या के विरोध में व्यापक प्रदर्शनों के बाद कश्मीर घाटी में पांचवें दिन भी पाबंदियां जारी रहीं
- बिहार कैडर के सीनियर आईपीएस सुनील कुमार नायक से आंध्र प्रदेश पुलिस ने 7 घंटे पूछताछ की
- आईजीआईएमएस में एमआरआई मशीन बंद हुई
- होली के दौरान पूरे बिहार में 75 से ज्यादा लोगों की सड़क हादसे में मौत
अनछपी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बारे में सबसे अहम बात यह है कि वह खुद जिस बात को वजह बता रहे हैं उस पर उनके समर्थकों सहित किसी को भी शायद ही भरोसा हो। उन्होंने लिखा है कि उनकी दिली इच्छा थी कि वह राज्यसभा जाएं। तो सवाल यह है कि अपनी इस दिली इच्छा को उन्होंने अपने 75वें जन्मदिवस के बाद ही क्यों लोगों के सामने लाया और इससे पहले वह क्यों इस दिली इच्छा को दबाए बैठे रहे? यह बात भी पूछने की है कि उनके समर्थकों ने जनता दल यूनाइटेड के इस नारे पर उनके उम्मीदवारों को वोट दिया कि 25 से 30 फिर से नीतीश तो उस नारे का क्या हुआ? नीतीश तो 26 में ही निकल लिए। उनके आलोचक यह कहने का हक रखते हैं कि उन्होंने सत्ता पाने के लिए सांप्रदायिक शक्ति भारतीय जनता पार्टी का सहारा लिया और बाद में इस सांप्रदायिक शक्ति को सत्ता तस्तरी में रखकर सौंप दी। नीतीश कुमार के बारे में यह कहना बिल्कुल बेमतलब है कि उन्होंने कभी विचारधारा से समझौता नहीं किया। चूंकि भारतीय जनता पार्टी ने यह सारा खेल रचा है इसलिए वह नीतीश कुमार की तारीफ भी कर रही है और खुद नीतीश कुमार से यह कहलवा रही है कि बिहार की गद्दी छोड़ने का फैसला खुद उनका है ताकि उनके समर्थक भारतीय जनता पार्टी से नाराज ना हों बल्कि अगले चुनाव में उसकी झोली में अपना वोट डालें। नीतीश कुमार की सेहत अगर सही भी होती तब भी उन पर यह आरोप बनता है कि उन्होंने अपने समर्थकों को भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के करीब किया और खुद अपना स्टैंड से बार-बार बदलते रहे। यह सही है कि नीतीश कुमार ने बिहार को कुछ मामलों में जैसे बिजली, सड़क वगैरह में आगे बढ़ाया है लेकिन यह भी सही है कि इस बुनियाद पर उन्होंने सांप्रदायिक शक्तियों से जो समझौता किया है उसे नजरअंदाज करना घातक होगा। इसके अलावा यह भी सच्चाई है कि नीतीश कुमार ने बिहार में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया और शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मामलों में बिहार को अब भी पिछड़ा ही माना जाता है। बिहार को इस हालत में रखने में भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार एक दूसरे के साझेदार हैं इसलिए दोनों एक दूसरे की तारीफ करते हैं। वैसे इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी को इस मजेदार हालत में रखने में विपक्ष की नाकामी भी कम नहीं है।
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