बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वॉशिंगटन के जिस होटल में व्हाइट हाउस के पत्रकारों के साथ डिनर में मौजूद थे वहां फायरिंग हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची अमेरिकी दूतों के आने का इंतजार किए बिना ही इस्लामाबाद से रवाना हो गये। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) की प्रतियोगिता परीक्षा में कदाचार और प्रश्न पत्र (पेपर) लीक के मामले में 38 लोग गिफ्तार हुए हैं।
और, जानिएगा कि रिश्वत के मामले में ज़ब्त रुपयों को चूहे कुतर गए तो सुप्रीम कोर्ट क्या बोला?
पहली ख़बर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक होटल में व्हाइट हाउस के पत्रकारों के साथ डिनर (कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर) कर रहे थे, तभी गोली चलने की आवाज़ें आईं. यह मामला उस वक़्त का है जब भारत के अखबार छपने को जा चुके थे. बीबीसी के अनुसार फायरिंग के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जल्दबाज़ी में बाहर निकाला गया. वहां मौजूद सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक़ कार्यक्रम में सात से आठ गोलियां चलीं. कुछ देर बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, ‘शूटर पकड़ा गया है, लेकिन शो जारी रहना चाहिए.’ हालांकि, अभी तक शूटर की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है. अब डिनर को फिर से शुरू किया गया है, लेकिन यह तय नहीं है कि ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया इसमें शामिल होंगे या नहीं.
नहीं हो सकी अमेरिका-ईरान वार्ता
प्रभात ख़बर के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही कूटनीतिक कोशिशों को शनिवार को तब बड़ा झटका लगा, दोनों पक्षों के बीच कोई सीधी बैठक नहीं हो सकी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची शनिवार शाम को अमेरिकी दूतों के आने का इंतजार किए बिना ही इस्लामाबाद से रवाना हो गये. इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से मुलाकात कर ईरान की चिंताओं से अवगत कराया. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नाटकीय मोड़ देते हुए अपने विशेष दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी. ट्रंप बोले- 18 घंटे की उड़ान भरकर व्यर्थ की बातें करने जाने की जरूरत नहीं.
बीपीएससी की परीक्षा में धांधली मामले में 38 गिरफ्तार
जागरण के अनुसार बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) की प्रतियोगिता परीक्षा में कदाचार और प्रश्न पत्र (पेपर) लीक के प्रयास मामले में अब तक आठ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन सारी प्राथमिकी को आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की एसआइटी (विशेष जांच दल) टेकओवर कर समेकित जांच करेगी। सबसे पहले क्रमशः 14 और 17 अप्रैल को मुंगेर और नालंदा में परीक्षा धांधली मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बाद बेगूसराय, वैशाली और गया आदि जिलों में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। ईओयू अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में सभी जगह एक ही पैटर्न में बांधली का प्रयास किया गया है। इससे पूरी संभावना है कि परीक्षा धांधली में किसी संगठित गिरोह की भूमिका है। अब तक पुलिस ने परीक्षा धांधली में अलग-अलग जिलों से 38 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ भी गई है। इसके आधार पर आगे की जांच की जा रही है।
रिश्वत के मामले में ज़ब्त रुपयों को चूहे कुतर गए
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी के कब्जे से कथित तौर पर जब्त नोट चूहों ने कुतर डाले। सुप्रीम कोर्ट ने इस जानकारी पर मालखाने की हालत और जब्त सामान की सुरक्षा को लेकर लापरवाही पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि नोट नष्ट होने का जो कारण बताया गया है, वह भरोसा करने लायक नहीं लगता है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ में शुक्रवार को वर्ष 2014 में बिहार की एक महिला बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी द्वारा कथित तौर पर 10000 रुपये रिश्वत मांगने के मामले में सुनवाई हुई। महिला को निचली अदालत ने बरी कर दिया था, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने सजा सुनाई थी। महिला ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पीठ ने अपने समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों पर गौर किया। हाईकोर्ट के फरवरी 2025 के फैसले में दर्ज इस जानकारी पर पीठ ने हैरानी जताई कि मालखाना (आरोपियों से जब्त सामान रखने की जगह) की खराब हालत के कारण महिला से कथित तौर पर जब्त किए गए नोटों को चूहों ने कुतर दिया था। पीठ ने कहा कि नोट नष्ट होने के बारे में जो सफाई दी गई है, उस पर भरोसा नहीं होता।
कुछ और सुर्खियां:
- पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले ईडी ने कथित राशन घोटाला में चावल कारोबारियों और सप्लायरों के ठिकानों पर छापेमारी की
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 14 जून को, उपेंद्र कुशवाहा का चुना जाना तय
- एनआईए ने बिहार एसटीएफ के साथ आर्म्स ऐक्ट मामले में वांटेड अपराधी सोनू कुमार सिंह को जमुई के गिद्धौर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया
- निगरानी विभाग की टीम ने राजगढ़ थाने के दरोगा देवकांत कुमार को केस रफा-दफा करने के नाम पर 90000 रुपए घूस लेते गिरफ्तार किया
अनछपी: बिहार में बीपीएससी के जरिए होने वाली नौकरी की परीक्षाओं का पेपर लीक होना कोई खास बात नहीं मानी जाती लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बीपीएससी के अधिकारी भी कभी यह मानने को तैयार नहीं होते के उसके इम्तिहान का पेपर लीक हुआ है। बात केवल बीपीएससी की परीक्षाओं की भी नहीं है बल्कि यहां होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ का भी मामला विवादों में रहा है। फ़िलहाल, बिहार सरकार के लिए असिस्टेंट एजुकेशन डेवलपमेंट ऑफिसर (एईडीओ) के इम्तिहान से जुड़े मामलों में बिहार सरकार की ही आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) पड़ताल कर रही है और बताया जा रहा है कि अब तक पेपर लीक और दूसरी धांधलियों के मामले में आठ एफआईआर दर्ज हुई है। इस सिलसिले में 38 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। सवाल यह है कि एफआईआर और गिरफ्तारी क्यों हो रही है? इससे जुड़ी खबरों से पता चलता है कि कम से कम एक परीक्षार्थी को ब्लूटूथ के साथ गिरफ्तार किया गया है तो सवाल यह है कि यह कैसी व्यवस्था है जिसमें कोई परीक्षार्थी तमाम जांच पड़ताल के बावजूद ब्लूटूथ लेकर परीक्षा केंद्र में घुस जाता है? यह भी बताया गया है कि बायोमेट्रिक जांच करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उसने भी घपला किया और इस मामले में उस कंपनी से सेवा ली गई जिसे पहले से ही ब्लैक लिस्ट किया जा चुका था। ‘नीट’ मामले में को भी जिस तरह सीबीआई को दिया गया, उससे बहुत से लोगों की यह शिकायत है कि इस मामले की लीपापोती कर दी गई। शिक्षा विकास अधिकारी के मामले में भी यह डर सही साबित हो सकता है। अगर ईओयू को सही छूट मिले तो बीपीएससी की नाकामी उजागर हो सकती है लेकिन इसके अधिकारी तो अपनी कामयाबी इसी में मानेंगे कि किसी तरह इस पेपर लीक की बात को सच नहीं माना जाए। ऐसे में जो ईमानदार उम्मीदवार हैं उन्हें कोई इंसाफ नहीं दिला सकता।
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