बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भागलपुर के सुल्तानगंज में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के मर्डर के मुल्ज़िम रामधनी यादव को पुलिस ने एनकाउंटर में मारने का दावा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि हेट स्पीच रोकने के लिए कानून होने के बावजूद उस पर अमल में कमी है।
और, पटना के मशहूर सुल्तान पैलेस को संरक्षित करने को लेकर इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज ने गुहार लगाई है।
पहली ख़बर
भागलपुर से जागरण की खबर है कि सुल्तानगंज (अजगैबीनाथ धाम) नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार के हत्यारोपित कुख्यात रामधनी यादव को पुलिस की विशेष टीम ने घटना के 12 घंटे के अंदर मुठभेड़ (एनकाउंटर) में ढेर कर दिया। बुधवार सुबह 3:44 बजे सुल्तानगंज बाईपास रोड के समीप छापेमारी के दौरान पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान वह मारा गया। उसे पेट में दो और पीठ में तीन गोलियां लगी हैं। जिस त्वरित गति से इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई हुई है, उससे स्पष्ट है कि सम्राट के सीएम बनने के बाद अपराध पर सरकार की जीरो टालरेंस नीति और सख्त होगी। भागलपुर एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि पुलिस टीम रामधनी यादव को गिरफ्तार कर हथियार एवं अन्य चीजों की बरामदगी के लिए ले जा रही थी। तभी उसे छुड़ाने के लिए उसके गुर्गे पुलिस पर गोलियां बरसाने लगे। इसमें डीएसपी विधि व्यवस्था नवनीत कुमार, सुल्तानगंज थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार और परमेश्वर सहनी जख्मी हो गए। रामधनी यादव ने भी पुलिस की राइफल छीन गोली चलाने का प्रयास किया। जवाब में पुलिस टीम ने भी गोलीबारी की, जिसमें मुख्य आरोपित रामधनी ढेर हो गया। दो बदमाश दीपक यादव और पिंकू यादव पकड़े गए हैं। बाकी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। दीपक यादव रामधनी के मोहल्ले का ही रहने वाला है। वह रामधनी के बेटे सन्नी यादव की सुरक्षा में रहता है।
25 लाख का मुआवजा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार के असामयिक निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और दिवगत अधिकारी का पूरे राजकीय सम्मान के साथ दाह-संस्कार करने की घोषणा की है।
एग्जिट पोल में बंगाल में बीजेपी को बढ़त
भास्कर की खबर है कि बंगाल चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग होते ही शाम 6.30 बजे एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए। इसके मुताबिक, बंगाल में ममता की टीएमसी को झटका देते हुए भाजपा इतिहास रचने जा रही है। 6 एजेंसियों के पोल ऑफ पोल्स में भाजपा को 154 व ममता की टीएमसी को 132 सीटें मिलने का दावा है। ऐसा हुआ, तो भाजपा पहली बार बंगाल जीतेगी। बहुमत के लिए 148 का आंकड़ा चाहिए। केरल में कांग्रेस के लिए खुशखबरी है। उसे 79 सीटें मिलने का दावा है। असम में सीएम हिमंता और तमिलनाडु में स्टालिन फिर वापसी करते दिख रहे हैं। हालांकि, असली नतीजों के लिए 4 मई तक का इंतजार करना होगा।
नफरती भाषण रोकने के क़ानून पर अमल कम: सुप्रीम कोर्ट
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करने से बुधवार को इन्कार कर दिया। कहा कि नफरती भाषण रोकने के लिए देश में पर्याप्त कानून हैं। सिर्फ इसके अमल में कमी है। नफरती भाषण के मामले में कोई कानूनी खालीपन नहीं है, जिसके लिए अदालत को दखल देने की जरूरत हो। कार्यपालिका को आईना दिखाते हुए अदालत ने कहा कि ज्यादातर मुद्दे कानून को ठीक से लागू नहीं करने की वजह से पैदा हुए हैं, न कि कानून के न होने से।
भैंसुर की शिकायत पर दानापुर नगर परिषद प्रमुख की कुर्सी गई
प्रभात ख़बर के अनुसार नगर परिषद की मुख्य पार्षद शिल्पी कुमारी पर राज्य निर्वाचन आयोग की गाज गिरी है. बकाया होल्डिंग टैक्स मामले में आयोग ने उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है. इस कार्रवाई के बाद स्थानीय सियासत में खलबली मच गयी है. यह पूरा मामला उनके भैंसुर सूरज कुमार द्वारा दायर की गयी एक याचिका के बाद सामने आया है. सूरज कुमार ने बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-18 (1) (k) के तहत शिकायत दर्ज कराई थी कि शिल्पी कुमारी ने वित्तीय वर्ष 2021-22 तक का अपना होल्डिंग टैक्स जमा किए बिना ही चुनाव लड़ा था.
दो से ज़्यादा बच्चे के मामले में भभुआ नगर परिषद के अध्यक्ष हटाए गए
भभुआ नगर पर्षद के अध्यक्ष पद पर विराजमान विकास कुमार तिवारी उर्फ बबलू तिवारी को राज्य निर्वाचन आयोग ने पदमुक्त कर दिया है। उन्हें नगरपालिका अधिनियम 2007 के प्रावधानों के तहत चार अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक संतान होने के कारण अयोग्य घोषित किया गया है. आयोग ने इस संबंध में आदेश पारित करते हुए जिला निर्वाची पदाधिकारी सह जिलाधिकारी को चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
सुल्तान पैलेस को संरक्षित करने के लिए लगाई गुहार
जागरण के अनुसार पटना शहर के प्रमुख विरासत भवनों में से एक आर ब्लाक स्थित (वीरचंद पटेल पथ) सुल्तान पैलेस को संरक्षित करने को लेकर इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) ने गुहार लगाई है। इंटैक ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव आदि से परिवहन भवन (सुल्तान पैलेस) को संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल करने की मांग की है। इंटैक बिहार चैप्टर के को कन्वेनर डा. शिव कुमार मिश्र ने आवेदन में कहा कि कला संस्कृति विभाग ने सुल्तान पैलेस का नाम हेरिटेज भवन की सूची में शामिल नहीं किया है। सुल्तान पैलेस वास्तु कला, स्थापत्य कला, शिल्प एवं शैली कला की दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
कुछ और सुर्खियां:
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे और अंतिम चरण में 92.25% मतदान
- पटना में आंधी पानी से भारी तबाही दीवार गिरने से दो की मौत
- बिहार में फसलों को बचाने के लिए 2025-26 में कुल 3092 घोड़परास को शूटरों ने मारा
- यूजीसी नेट जून का नोटिफिकेशन जारी, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 20 मई
- पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया में एसबीआई की एटीएम काट 37 लाख से ज्यादा रुपए अपराधी ले गए
अनछपी: हेट स्पीच के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की है उससे तो यही लगता है कि वह इस पर अमल करवाने में या तो बिल्कुल लाचार है या उसकी इसमें बहुत दिलचस्पी नहीं है। कानून का होना अच्छी बात है लेकिन अगर उस कानून पर अमल न हो तो यह किसकी जिम्मेदारी बनती है? अगर कानून लागू करने वाली संस्थाएं इससे लागू न करें तो फिर क्या होगा और सुप्रीम कोर्ट भी सिर्फ यही कहे कि कानून बना हुआ है तो इसका फायदा क्या है? फिर फरियाद ले जाने वाले को इंसाफ कहां मिलेगा? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक जस्टिस की टिप्पणी से जोड़कर देखा जाए तो समझ में आ सकता है कि यह मामला कितना गंभीर है और फरियादी को सुप्रीम कोर्ट कैसे बेसहारा छोड़ रहा है। जस्टिस अतुल श्रीधरन ने मदरसों से जुड़े एक केस की सुनवाई के दोरान टिप्पणी की है कि जब मॉब लिंचिंग होती है या अलग-अलग समुदाय के लोगों को सार्वजनिक स्थान पर साथ बैठने के कारण परेशान किया जाता है तब मानवाधिकार आयोग स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लेता? जो सवाल जस्टिस सुधारने किए हैं, आखिर वही सवाल सुप्रीम कोर्ट सरकार से क्यों नहीं पूछता? देश में नफरत फैलाने वाली बात तो अब मुख्यमंत्री तक कर रहे हैं लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि सुप्रीम कोर्ट बिल्कुल बेअसर साबित हो रहा है। ऐसे में इस बात को बार-बार सामने लाने की जरूरत है ताकि कोर्ट के जज भी अपनी राय पर सोच विचार करें।
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