बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बेंगलुरु की कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर 15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगा है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में ईरान के खिलाफ मिलट्री एक्शन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव पास कर दिया है। मुजफ्फरपुर के एक अस्प्ताल में आग लगने से छह लोगों की मौत हो गई।
और, जानिएगा कि फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाली कार किसने लॉन्च की।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार पश्चिम एशिया के संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के असर से जूझते भारतीय शेयर बाजार में नए कारपोरेट घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइन करने वाली और जेवरात व्यवसाय में लंबे समय से दिग्गज मानी जाने वाली बेंगलुरु की कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) अब शेयर बाजार नियामक एजेंसी सेबी के निशाने पर है। सेबी ने तीन जून, 2026 को जारी 109 पन्नों के अंतरिम आदेश में कंपनी और उसके प्रवर्तक एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सेबी ने आरईएल के चार वित्त वर्षों (अप्रैल, 2020 से मार्च, 2024) के बही खातों की जांच के बाद आरोप लगाया है कि इस अंतराल में कंपनी ने अपनी कुल 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर प्रदर्शित किया, वित्तीय गड़बड़ी की और सेबी के जांच में सहयोग नहीं किया गया। सेबी ने सीधे तौर पर कंपनी की कुल समेकित आय के लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्से पर सवाल उठा दिया है। कंपनी ने इस अंतरिम आदेश को गलत बताते हुए कहा है कि यह सूचनाओं को सही तरीके से नहीं समझने की वजह से हुआ है। बहरहाल, शेयर बाजार में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 4.99 प्रतिशत तक गिर गए हैं।
अमेरिका में ईरान से जंग रोकने का प्रस्ताव पास
प्रभात ख़बर के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 वोटों से पारित कर दिया. प्रस्ताव के अनुसार राष्ट्रपति भविष्य में ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई तभी कर सकेंगे जब कांग्रेस इसकी मंजूरी दे या औपचारिक युद्ध की घोषणा करे. तीन महीने से जारी संघर्ष और बढ़ती लागत के बीच कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया. परिणाम घोषित होते ही सदन में समर्थक सांसदों ने खुशी जतायी. डेमोक्रेट नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि युद्ध अमेरिकी करदाताओं पर 100 अरब डॉलर से अधिक का बोड़ा डाल चुका है. प्रस्ताव अब सीनेट में जायेगा, जहां पिछले महीने भी कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने इसी तरह के कदम का समर्थन किया था. हालांकि यह प्रस्ताव युद्ध को तत्काल नहीं रोकेगा, लेकिन इसे ट्रंप प्रशासन की सैन्य नीति के खिलाफ बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.
ट्रंप भड़के
प्रस्ताव पारित होने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जब प्रशासन ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहा है, तब ऐसा कदम उठाना गलत है. ट्रंप ने डेमोक्रेट्स और प्रस्ताव का समर्थन करने वाले रिपब्लिकन सांसदों पर भी निशाना साधा.
मुजफ्फरपुर के अस्पताल में आग लगने से 6 मरीज़ जिंदा जले
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना से 40 मीटर की दूरी पर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आइसीयू में गुरुवार की सुबह करीब 3:40 बजे भीषण आग लग गयी. इस हादसे में आइसीयू में भर्ती छह मरीजों की जिंदा जलने और दम घुटने से मौत हो गयी. फायर बिग्रेड की टीम ने 25 से अधिक मरीजों की जान बचायी हैं. इनमें से कई मरीज गंभीर हैं. घटना के बाद अस्पताल परिसर में नौ घंटे से अधिक समय तक चीख पुकार मची रही. घटना की सूचना मिलते ही डीएम सुव्रत कुमार सैन, एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र, सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी, नगर आयुक्त समेत जिला प्रशासन और पुलिस के सभी पदाधिकारी प्रसाद हॉस्पिटल पहुंचे. पीड़ितों को मदद पहुंचाने में परेशानी न हो इसके लिए जिले के सभी बीडीओ, सीओ व शहरी थानेदारों व पुलिस टीम को अस्पताल परिसर में बुलाया गया. जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह करीब 3:40 बजे प्रसाद हॉस्पिटल के आइसीयू में लगी ऑक्सीजन मशीनों में से एक में तकनीकी गड़बड़ी के कारण जोरदार आवाज के साथ धुआं निकलने लगा. जब तक ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी कुछ समझ पाते, पूरा वार्ड धुएं से भर गया. उस समय आइसीयू में 15 मरीज भर्ती थे, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. धुआं फैलते ही मरीजों का दम घुटने लगा. जैसे ही आग की लपटें दिखायी दीं, अस्पताल स्टाफ और मरीजों के परिजनों के बीच भगदड़ मच गयी.
6600 व्याख्याताओं और 11 हजार से अधिक गैर शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में 26 हजार कॉलेज शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति होगी। राज्य सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत लगभग 6600 व्याख्याताओं और 11 हजार से अधिक गैर शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति होगी। इसके अलावा नए खुलने वाले 211 डिग्री कॉलेजों में भी लगभग 9300 पदों पर नियुक्ति होगी। इनमें शिक्षकों के अलावा गैर शैक्षणिक पद शामिल हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, रिक्तियों की पहचान कर ली गयी है। अब सूबे में बड़े पैमाने पर कॉलेज शिक्षकों और गैर शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लेने की है।
100 फ़ीसद एथेनॉल से चलने वाली कार लॉन्च
जागरण के अनुसार भारतीय आटोमोबाइल बाजार की दो दिग्गज कंपनियों ने एलान कर दिया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का युग शुरू होने से पहले फ्लेक्स फ्यूल का जमाना होगा। पिछले 24 घंटे में भारतीय कार बाजार में करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली मारुति सुजुकी ने फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाली पहली कार (वैगन आर माडल) लांच की है। इससे पहले बुधवार को दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकार्प ने इस ईंधन से चलने वाली पहली मोटरसाइकिल को पेश किया था। फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाले वाहन एथनाल और पेट्रोल की किसी भी मात्रा के मिश्रण से चलने में सक्षम होते हैं। मारुति सुजुकी की बैगन आर ई20 से ई100 (20 प्रतिशत एथनाल से लेकर 100 प्रतिशत एथनाल) से चल सकेगी, जबकि हीरो मोटोकार्प की दोनों बाइक ई85 ईंधन (85 प्रतिशत तक मिश्रित) पेट्रोल से चल सकेगी।
कुछ और सुर्खियां:
- राजद प्रमुख लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की जेड प्लस सुरक्षा हटी, पूर्व मंत्री तेज प्रताप को भी अब एक ही बॉडीगार्ड
- पटना के गांधी सेतु पर तीन ट्रकों में टक्कर से चार घंटे तक दोनों लेने में लगा रहा लंबा जाम
- फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद कोचिंग सेंटर चलाने वाले खान सर के दो बॉडीगार्ड गिरफ्तार
अनछपी: दिल्ली के होटल और मुजफ्फरपुर के अस्पताल में लगी आग के बाद सरकारों की तरफ से कई कदम उठाए जाने की घोषणाएं की गई हैं लेकिन इन घोषणाओं का कोई मतलब तभी निकल सकता है जब उसके नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई सामने नजर आए। अगर सभी सावधानियां और नियम के मानने के बाद ऐसी कोई घटना होती है तब तो अलग बात होगी। भारत जैसे देश में दूसरे मुद्दों पर तो काफी बहस होती है लेकिन यह नहीं देखा जाता कि अस्पताल और होटल में फायर सेफ्टी के जो जरूरी उपाय हैं, वह किए गए हैं या नहीं। अगर हम पटना जैसे बड़े शहर की बात करें तो यह बात लगभग हर इंसान मानेगा कि यहां सख्ती से जांच हो तो आधे से ज्यादा अस्पताल और होटल बंद हो जाएंगे। आमतौर पर होता यह है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद पुलिस और प्रशासन कार्रवाई के नाम पर कुछ जगहों पर सख्ती दिखाती है लेकिन उसमें भी हेराफेरी होती है और जो कार्रवाई की भी जाती है, वह भी बाद में गुस्सा ठंडा होने पर कमजोर पड़ जाती है। उदाहरण के लिए अगर किसी ऑटो रिक्शा का एक्सीडेंट होता है तो पुलिस वाले उन पर सख्ती करते हैं लेकिन फिर दो-तीन महीने गुजरने के बाद वही हाल वापस आ जाता है। इसकी वजह यह है कि हमारे समाज में ऐसी दुर्घटनाओं में जान जाने को आम बात मान लिया है। इस मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों बयान और आराम की राजनीति करते हैं। अगर बिहार की बात की जाए तो इस समय सबसे जरूरी सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग और जिस विभाग के पास फायर ब्रिगेड की जिम्मेदारी होती है, उसने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई थी? यह पूछा जाए कि क्या स्वास्थ्य विभाग ने फायर सेफ्टी के सभी मानकों को देखकर लाइसेंस दिया था या फायर ब्रिगेड वालों ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने में कोई गड़बड़ी की थी? जब तक ऐसे सवाल नहीं पूछे जाएंगे, सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा, ऐसी दुर्घटनाएं नहीं रख पाएंगी।
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