छ्पी-अनछपी: ईरान युद्ध पर ट्रंप को घर में झटका, अगले साल से नीट कंप्यूटर बेस्ड होगा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति को अमेरिका की सीनेट में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अगले साल होने वाले नीट यूजी को कंप्यूटर पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। तिवारी एनकाउंटर कांड पर महापंचायत ने दी देशव्यापक आंदोलन की धमकी।

और, जानिएगा कि इंजीनियर साहब ने कैसे दो साल में 10 करोड़ की कमर्शियल जमीन खरीदी।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी सीनेट ने पहली बार युद्ध शक्तियों से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकना है। मंगलवार को हुए मतदान में प्रस्ताव 50-48 मतों से पारित हुआ। ईरान युद्ध को रोकने के लिए सीनेट में यह दसवीं कोशिश थी, पर पहली बार प्रस्ताव को बहुमत का समर्थन मिला। इसे अमेरिकी कांग्रेस द्वारा ट्रंप प्रशासन की सैन्य कार्रवाई और ईरान के साथ हुए समझौते पर बढ़ती असहमति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत भी नहीं होगी, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है। ट्रंप ने मतदान के बाद ‘टूथ सोशल’ पर नाराजगी जताते हुए प्रस्ताव को अर्थहीन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से ईरान को मदद और मनोबल मिला है।

अगले साल से नीट यूजी सीबीटी मोड में होगा

जागरण के अनुसार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अभी से ही अगले साल होने वाले नीट यूजी की तैयारी शुरू कर दी है। मेडिकल के स्नातक कोसों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली यह परीक्षा अगले साल से पेन पेपर की जगह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) के जरिए होगी। इसका एलान शिक्षा मंत्रालय की ओर से पहले ही किया जा चुका है। हालांकि नीट-यूजी मूलरूप से स्वास्थ्य मंत्रालय की परीक्षा है, ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय की भी सहमति जरूरी है। शिक्षा मंत्रालय का दावा है कि दो साल की चर्चा के बाद अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इसे लेकर अपनी हिचकं खत्म करते हुए परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने की सहमति दे दी है। नीट-यूजी को अगले साल से सीबीटी मोड में कराने का एलान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तीन मई को आयोजित किए गए नीट यूजी लीक होने के बाद खड़े हुए विवादों के बाद किया था।

नीट के दिन पीएमसीएच के 88 अनुपस्थित छात्रों पर जवाब तलब

भास्कर के अनुसार नीट-यूजी 2026 परीक्षा के दौरान कॉलेज परिसर से अनुपस्थित पाए गए पीएमसीएच के 88 एमबीबीएस छात्र अब स्वास्थ्य विभाग की जांच के दायरे में हैं। विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए पीएमसीएच प्रशासन से इन छात्रों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। इसमें नाम, रोल नंबर, बैचवार सूची, नामांकन रिकॉर्ड और अनुपस्थिति से जुड़ी जानकारी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई सूची में एमबीबीएस के 2022, 2023, 2024 और 2025 बैच के छात्र शामिल हैं।

छात्रों के नामांकन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होगी

विभाग अब छात्रों के अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने जा रहा है। विभाग के निर्देश पर पीएमसीएच प्रशासन सभी संबंधित अभिभावकों से संपर्क करेगा। उन्हें उनके पुत्र या पुत्री की अनुपस्थिति की जानकारी दी जाएगी। अभिभावकों को भी कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। इसके लिए विभाग ने छात्रों के नामांकन से जुड़े पीडीएफ रिकॉर्ड, स्थायी पता, अभिभावकों का विवरण और संपर्क नंबर मांगा है। विभाग यह जानना चाहता है कि परीक्षा के दौरान छात्र कहां थे।

टेंडर घोटाले में सीनियर आईएएस अधिकारी संजीव हंस की गिरफ्तारी जल्द

भास्कर के अनुसार ठेकेदार रिशु श्री से घूस लेकर सरकारी टेंडर देने के मामले में एसवीयू ने बुधवार को विशेष निगरानी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी. आइएएस अधिकारी संजीव हंस, वित्त विभाग के तत्कालीन सचिव मुमुक्षु चौधरी, ठेकेदार रिशु श्री समेत सात आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी है. नगर विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन अभियंता उमेश कुमार सिंह, भवन निर्माण विभाग के रिटायर्ड मुख्य अभियंता तारणी दास, मातृस्वा कंस्ट्रक्शन के निदेशक व रिशुश्री के स्टाफ संतोष कुमार, मातृस्वा इन्फ्रा के निदेशक पवन कुमार के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गयी है. संजीव हंस, मुमुक्षु चौधरी, उमेश कुमार सिंह, तारणी दास पर रिशु श्री से घूस लेने के आरोप के सबूत मिले हैं. रिशु श्री के सहयोगी व स्टाफ संतोष कुमार व पवन द्वारा अधिकारियों के पास कमीशन की राशि भेजने के प्रमाण मिले हैं. रिशु श्री द्वारा अधिकारियों को दो से 3.5 फीसदी कमीशन देकर टेंडर पाने के सबूत भी मिले हैं. एसवीयू ने 2025 में केस दर्ज किया था.

एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दाराद ने बताया कि रिशु श्री की कंपनी के निदेशक पवन ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि आइएएस अधिकारी संजीव हंस को 67 लाख रुपये घूस में दिये थे. उन्होंने बताया कि इन सातों आरोपितों के अलावा किसी और अधिकारी के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं. इन सात आरोपितों में से पांच की गिरफ्तारी हो चुकी है. सिर्फ आइएएस अधिकारी संजीव हंस और पवन कुमार को गिरफ्तार किया जाना है.

तिवारी एनकाउंटर कांड पर महापंचायत ने दी देशव्यापक आंदोलन की धमकी

हिन्दुस्तान के अनुसार भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ के खिलाफ बुधवार को बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत में घटना की निष्पक्ष जांच व दोषी पुलिसकर्मियों पर ठोस कार्रवाई की मांग की गई। श्रद्धांजलि सभा सह महापंचायत में बिहार समेत अन्य प्रदेश के लोगों का हुजूम उमड़ा। ऐलान किया गया कि यदि श्राद्ध कर्म (तीन दिन) तक आरोपित एसडीपीओ राजेश शर्मा और तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन पूरे देश में फैलेगा। पटना में विधानसभा का घेराव और दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू होगा। आंदोलन को समर्थन देने के लिए जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी पहुंचे। इसके पहले कुड़वा शिव लोगों का जुटान शुरू हुआ। मंदिर खेल मैदान में सुबह दस बजे से ही हाथों में तिरंगा और भरत तिवारी का पोस्टर लिये लोगों का जत्था नारे लगाते पहुंचता रहा।

इंजीनियर साहब ने कैसे दो साल में 10 करोड़ की कमर्शियल जमीन खरीदी

भास्कर के अनुसार भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के पटना, भागलपुर, दिल्ली और नोएडा स्थित छह ठिकानों पर ईओयू ने छापेमारी की। पवन कुमार पता चला कि आय से 3.89 करोड़ रुपए अधिक (104 %) संपत्ति अर्जित करने का का केस दर्ज होने के बाद यह कार्रवाई हुई। छह टीमों ने एक साथ दबिश दी। जांच में अभियंता ने दो साल में 10 करोड़ रुपए की कमर्शियल जमीन खरीदी। पटना के एसकेपुरी स्थित यमुना निवास अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर-305 से 5.15 लाख रुपए नकद मिले। 18 बैंक खातों में जमा 90 लाख रुपए का भी पता चला। ईओयू ने खातों को फ्रीज कर दिया है। छापेमारी में 39 लाख रुपए के गहने, 14 बीमा पॉलिसियों के दस्तावेज और एक होंडा सिटी कार मिली। बीमा पॉलिसियों का सालाना प्रीमियम तीन लाख रुपए है।

कुछ और सुर्खियां:

  • मुंगेर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बैग छपरा घाट पर गंगा स्नान के दौरान पांच बहनें डूबीं, चार के शव बरामद
  • पूर्वी चंपारण के सुगौली थाना क्षेत्र में पिकअप और ऑटो रिक्शा की टक्कर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत
  • मोहर्रम के मद्देनजर पटना के कारगिल चौक से पटना सिटी की तरफ कल से 2 दिन गाड़ियां नहीं चलेंगी
  • पाकिस्तान के वायु क्षेत्र में पहुंचा एयर इंडिया का विमान लाहौर से चेतावनी के बाद लौटा

अनछपी: हमारे समाज में कानूनी प्रक्रिया और अदालतों का फैसला कैसे लंबे समय से इत्मीनान से जी रहे लोगों की जिंदगी में खलल डाल सकता है, उसका एक ताजा उदाहरण बिहार सरकार द्वारा बनाए गए शिक्षा सेवक और तालीमी मरकजों पर दी गई नौकरी का है। इसके बारे में पटना हाई कोर्ट के एक फैसले से 534 प्रखंडों में काम कर रहे लोगों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। यह छोटी सी नौकरी 2008 के एक नियमावली के तहत दी गई थी जिसे बिहार राज्य शिक्षा सेवक एवं तालीमी मरकज बहाली नियमावली बताया गया है। पटना हाई कोर्ट ने इस नियमावली को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। देखना होगा कि लगभग एक डेढ़ दशक से जो लोग इस नियमावली के तहत मिली नौकरी से अपनी आजीविका चला रहे थे, उनकी नौकरी और नई भर्तियों पर क्या असर पड़ता है। बताया जाता है कि इस नियमावली में आरक्षण के प्रतिशत को लेकर अदालत की आपत्ति थी जिसके जवाब में राज्य सरकार ने नई नीति तैयार करने की बात कही है। अच्छी बात यह है की अदालत ने नई चयन प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दे दी है। एक और अच्छी बात यह होती कि जो लोग पहले से नौकरी कर रहे हैं उनकी नौकरी पर कोई आंच नहीं आए। ध्यान रहे कि शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज पर काम करने वालों की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की पढ़ाई में मदद मिल रही है। एक और बात यह है कि अदालतों को भी किसी मामले में फैसला लेने में इतना समय नहीं लगाना चाहिए, खासकर उस मामले में जिसमें सैंकड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी हो।

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