छ्पी-अनछपी: ट्रंप की 1000 मिसाइल वाली धमकी, बिहार में 75 पार हैं तो रजिस्ट्री घर से

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान को निशाना बनाकर 1,000 मिसाइलें “लाक्ड एंड लोडेड’ वाली धमकी जारी की है। अब बिहार के 75 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को भी जमीन रजिस्ट्री की सुविधा घर बैठे मिलेगी।

और, मध्यप्रदेश में इथेनॉल बनाने वाले चावल के मामले में 1100 करोड़ का घोटाला।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हालिया सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी लगातार तीखी होती जा रही है। ट्रंप ने अपने इंटरनेट मीडिया मंच टूथ सोशल पर दावा किया कि ईरान को निशाना बनाकर 1,000 मिसाइलें “लाक्ड एंड लोडेड’ स्थिति में तैनात हैं। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, उन्होंने कहा कि यदि ईरानी सरकार ने उन्हें निशाना बनाया या ऐसा करने की कोशिश की तो अमेरिका और भी व्यापक सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना को पहले ही आवश्यक आदेश दिए जा चुके हैं और जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने की क्षमता मौजूद है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि यह पूरे ईरान की इच्छा है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। अल जजीरा के मुताबिक, उन्होंने कहा- ‘मैं अपने पिता के बेगुनाह खून का बदला जरूर लूंगा, यही हमारे देश की भी इच्छा है।’

75 पार वालों के लिए ज़मीन रजिस्ट्री घर पर

अब बिहार के 75 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को भी जमीन या संपत्ति के निबंधन की सुविधा घर बैठे मिलेगी। हिन्दुस्तान की खबर है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित जिला निबंधन कार्यालय से राज्य की अत्याधुनिक डिजिटल एवं पेपरलेस निबंधन प्रणाली के शुभारंभ के मौके पर यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने होम रजिस्ट्रेशन, भूमि संबंधी ऑनलाइन जांच, पेपरलेस निबंधन एवं जीआईएस तकनीक से स्थल निरीक्षण सेवा की शुरुआत की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार डिजिटल शासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज से होम रजिट्रेशन की सुविधा बिहार के लाखों बुजुर्गों को उनके घर पर उपलब्ध करायी जा रही है। पेपरलेस निबंधन प्रणाली की सुविधा 80 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को उपलब्ध करायी जानी थी। इस सेवा में अब उम्र सीमा कम की गई है। पेपरलेस निबंधन प्रणाली की सुविधा 75 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को भी घर बैठे उपलब्ध करायी जायेगी।

वियतनाम में नाव पलटने से 15 भारतीयों की मौत

दक्षिण पूर्वी एशियाई देश वियतनाम के होन में रुट द्वीप से एन थोई पोर्ट जा रही भारतीय पर्यटकों की नाव (स्पीड बोट) शनिवार को पलट गई। थोई पोर्ट के तट पर पहुंचने से लगभग 400 मीटर पहले हुए हादसे में दो महिलाओं समेत 15 भारतीयों की मौत हो गई, जबकि 17 को बचा लिया गया। इनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतकों में तमिलनाडु के 10, आंध्र प्रदेश के 3 और केरल के 2 हैं। स्पीड बोट के सभी वियतनामी 4 क्रू मेंबर सुरक्षित बताते हैं। बताया जाता है कि इस को लावा मोबाइल कंपनी ने स्पॉन्सर किया था। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा, कि मारे गए 14 लोग चैनल पार्टनर फर्म के जबकि एक लावा कंपनी का है।

अपहरण के दिन हत्या, लाश पांच दिन बाद मिली

प्रभात ख़बर के अनुसार पटना के कोतवाली थाने के न्यू मार्केट इलाके से छह जुलाई की रात अपहृत कारोबारी बंटी कुमार को एसआइटी खोजती रही और बारिश ने लाश को सामने लाकर रख दिया. शनिवार को अथमलगोला थाने के सूर्यपुरा गांव के समीप हाइवे के किनारे स्थित गड्ढे से पुलिस ने बंटी के शव को बरामद कर लिया. शव सड़-गल चुका था. उसके चेहरे का काफी अंश व एक हाथ गल चुके थे और सिर जमीन के अंदर दबा हुआ था. शरीर पर केवल एक बनियान व अंडरवियर था. हाथ में पैर में लगे रॉड, कलावा और कड़ा को देख कर परिजनों ने पहचान की. घटनास्थल की एसएसएल से भी जांच करायी गयी है. बंटी को बदमाशों ने सेक्स रैकेट के विवाद में अगवा किया था. इस मामले का मुख्य आरोपी रवीश जेल जा चुका है और तीन माह पहले ही छूटा था. उसका संबंध एक किन्नर से था. परिजनों के अनुसार बंटी उस किन्नर व उसके सहयोगियों के सेक्स रैकेट चलाने का विरोध करता था. इसके कारण ही उसे अगवा कर लिया गया. सूत्रों का कहना है कि बंटी व किन्नर के बीच दस दिन पहले विवाद हुआ था. इस दौरान किन्नर ने सबक सिखाने की धमकी दी थी. पुलिस भी आयी थी और दोनों को अपने साथ ले गयी थी. लेकिन, बाद में छोड़ दिया था. पुलिस को भी इनके विवाद की जानकारी थी. इसके बाद किन्नर ने रवीश को सारी बात बतायी और उसने ही बंटी को अगवा कर लिया और बेरहमी से पीटा की उसकी मौत हो गयी.

मध्यप्रदेश में इथेनॉल बनाने वाले चावल के मामले में 1100 करोड़ का घोटाला।

जागरण के अनुसार मध्य प्रदेश के बालाघाट व सिवनी जिलों में एथनाल उत्पादन के नाम पर फोर्टिफाइड चावल की हेराफेरी का मामला सामने आया है। इसमें आठ राइस मिलरों को नोटिस दिया गया है। साथ ही, 13 संदिग्ध लोगों पर एफआइआर करवाने की तैयारी है। मामले की जांच एसआइटी कर रही है। यदि इसी तरह का हेरफेर अन्य जिलों में भी हुआ होगा तो घोटाला बड़ा हो सकता है। बता दें, सामान्य चावल में आवश्यक विटामिन और खनिज (जैसे आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12) को मिलाकर तैयार किए गए पोषणयुक्त चावल को फोर्टिफाइड कहा जाता है। यह आंगनवाड़ी केंद्रों और कन्या छात्रावासों में निश्शुल्क वितरित किया जाता है। जांच अधिकारियों ने आशंका जताई है कि 17 जिलों के 22 एथनाल प्लांटों का करीब 1100 करोड़ रुपये का चावल खपाया गया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • पटना जिले के फतुहा के एक गोदाम में छापेमारी कर पौने दो करोड रुपए की कोडीन मिली कफ सिरप ज़ब्त की गई
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर न्यूजीलैंड के साथ 10 समझौतों पर हस्ताक्षर
  • पीएमसीएच में एमबीबीएस की 50 सीटें बढ़ीं, अब 250 का होगा एडमिशन
  • पटना के बेवर जेल में कैदी खुद बना रहे थे भोजन, तीन वार्डन सस्पेंड
  • तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में पोक्सो मामले के मुल्ज़िम पी राजकुमार ने ज़मानत पर रहने के दौरान शिकायत करने वाली लड़की समेत छह लोगों की हत्या की

अनछपी: भारत में, और खासकर अक्सर उत्तर भारतीय राज्यों में, पुलिस कैसे संविधान की भावना की धज्जियां उड़ाती हैं, इसका एक ज्वलंत उदाहरण किसी केस में मुल्ज़िम की अदालती कार्रवाई को जानबूझकर देर करने की उसकी हरकत में मिलता जिसे उसके अधिकारी चाल समझते हैं। हमने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं कि प्रशासन किसी विरोधी को ऐसे दिन गिरफ्तार करता जिसके अगले दिन अदालत बंद हो ताकि उसे ज़मानत न मिले। फिर गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से मांगे कागज़ात देने में आनाकानी करती है ताकि उसके विरोधी को ज़मानत मिलने में देर होती रहे। और, देरी करने की एक चाल यह भी होती है कि किसी न किसी बहाने मुल्ज़िम को जेल से कोर्ट न पहुंचाए। आम मुल्ज़िमों के मामले पुलिस के छोटे अधिकारी भी ऐसा ही करते हैं, खासकर अगर उनकी ‘फरमाइश’ पूरी न हो। अब ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। एक आपराधिक मामले में विदेशी नागरिक की जमानत याचिका का विरोध करने पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य सरकारें जमानत का पुरजोर विरोध तो करती हैं, लेकिन मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लातीं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर यही रवैया रहा, तो वे अदालत में राज्य की पोल खोल देंगे। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ अपहरण और हत्या के मामले में फंसे विदेशी नागरिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपित पिछले चार सालों से जेल में है। उसने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट में उसके मामले की 86 बार तारीख लगी, लेकिन पुलिस ने उसे 53 बार कोर्ट में पेश ही नहीं किया। पीठ ने कहा कि चार साल बीत जाने के बाद भी 34 गवाहों में से केवल दो की गवाही हो सकी है। इससे समझा जा सकता है कि कोर्ट की फटकार क्यों लगी लेकिन क्या सरकारों की यह असंवैधानिक हरकत बंद होगी?

 

 46 total views

Share Now

Leave a Reply