बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बांग्लादेश से भागकर भारत में शरण ली हुई पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार भड़क गई है। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने अंदुरुनी झगड़ों के बाद पार्टी की सभी इकाइयों को भंग कर दिया है।
और, जानिएगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर पांच साल में 551 करोड़ रुपए खर्च हुए।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा नई दिल्ली में मीडिया से की गई बातचीत बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार को पूरी तरह से नागवार गुजरी है। इस प्रेस कान्फ्रेंस से तिलमिलाए बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात एक बयान जारी कर हसीना को भगोड़ा करार देते हुए उनके बयानों से दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचने की बात कही है। बहुत संभव है कि इससे पीएम तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा पर भी असर पड़े। भारत ने दो दिन पहले ही इस बात की पुष्टि की थी कि सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पीएम रहमान को आमंत्रित किया जाएगा। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया बांग्लादेश इस बात से आक्रोशित है कि फरार और जनसंहार करने वाली शेख हसीना को नई दिल्ली में मीडिया से लाइव बातचीत करने की अनुमति दी गईं, जहां उन्होंने बांग्लादेश और उसके लोगों के खिलाफ जहरीला हमला बोला। ढाका ने गहरा अफसोस जताया कि भारत सरकार को इस कार्यक्रम के संभावित नतीजों के बारे में पहले से सूचित किया गया था फिर भी इसे आयोजित करने की अनुमति दी गई।
फरक्का वाटर ट्रीटी पर खतरा
पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को भंग करने के बाद भारत अब बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि को लेकर भी सख्त है। यह संधि इस साल खत्म हो रही है तथा सरकार पर राज्यों का दबाव है कि इसका नवीनीकरण इस स्वरूप में न किया जाए। बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल ने भी चिंता जताई है कि बांग्लादेश को पानी देते समय पहले उनके राज्य के हितों की रक्षा की जाए। जदयू ने तो बाकायदा गुरुवार को इस मुद्दे को राज्यसभा में विशेष उल्लेख के जरिये उठाया। बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर, 1996 में हुई थी, जो 30 साल के लिए थी। इसके तहत जनवरी से मई के बीच फरक्का बैराज में मौजूद पानी का 50% बांग्लादेश को देने का प्रावधान हैं।
राजद की सभी इकाइयां भंग
राजद अभी बांकीपुर की हार से अधिक दिग्गजों (भाई वीरेंद्र और शक्ति सिंह यादव) की कहासुनी से हताश है। इससे जनाधार के बिदकने की आशंका, बढ़ गई है। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा है। उनसे संकेत पाकर बिहार इकाई के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। हालांकि, पार्टी इसे सार्वजनिक नहीं कर रही। अलबत्ता दूसरा निर्णय सार्वजनिक हुआ है, जो जिला और मंडल से लेकर पंचायत तक की इकाइयों के साथ प्रकोष्ठों आदि को तत्काल प्रभाव से भंग करने का है।
बिहार में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा
बिहार में इस्पात, कपड़ा और परमाणु उर्जा क्षेत्र में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में गुरुवार को लोकसेवक आवास में आयोजित समारोह में उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच लगभग 51600 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को देश के प्रमुख स्टील हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टील, टेक्सटाइल, क्लीन एवं परमाणु ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर राज्य में रोजगार, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार तथा समृद्ध और विकसित बिहार के संकल्प को साकार किया जाएगा। राज्य में स्टील एवं मेटल आधारित उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में केस के बीच मंत्री दीपक ने शपथ ली
भास्कर के अनुसार पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने गुरुवार को एमएलसी पद की शपथ ली। परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने शपथ दिलाई। इस दौरान दीपक के पिता व रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, मंत्री विजय कुमार सिन्हा आदि मौजूद रहे। दीपक के लिए भाजपा एमएलसी देवेश कुमार ने सीट छोड़ी। दीपक को मंत्री रहने के लिए एमएलए या एमएलसी होना जरूरी रहा। इसके बिना दो बार मंत्री बनने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। उनको एमएलसी बनाकर उनके मंत्री पद को बचाने का उपाय किया गया। लेकिन याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने इसे सरकार का एक और असंवैधानिक कृत्य कहा। बोले-हम यह सबकुछ भी सुप्रीम कोर्ट को बताएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से दीपक का इस्तीफा लेने या बर्खास्त करने की मांग की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर पांच साल में 551 करोड़ रुपए खर्च
हिन्दुस्तान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर 2021 से जुलाई 2026 तक 551 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। राज्यसभा में गुरुवार को एक लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी। वर्ष 2025 में 180 करोड़, जबकि 2026 में जनवरी से जुलाई तक 74.85 करोड़ व्यय हुआ है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह और वी. शिवदासन ने विदेश मंत्रालय से 2021 से अब तक पीएम की विदेश यात्राओं का ब्योरा मांगा था। इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने आंकड़े साझा किए। 35 पन्नों के जवाब में बताया गया कि 2025 में प्रधानमंत्री ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन व जापान समेत 23 देशों की यात्राएं कीं। इस वर्ष जुलाई तक अनुमानित लगभग 75 करोड़ खर्च हुआ है। इस साल जिन दौरों के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें सर्वाधिक 17.64 करोड़ रुपये मई में प्रधानमंत्री के पांच देशों के दौरे के दौरान नॉर्वे यात्रा पर व्यय हुए।
कुछ और सुर्खियां:
- पटना नगर निगम समेत बिहार के सभी नगर निकायों में 8 दिनों से जारी सफाई कर्मियों की हड़ताल खत्म
- पूर्व सांसद अतीक अहमद के छोटे बेटे अवन की कानपुर-झांसी हाईवे पर सड़क हादसे में
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 में अपनी सहयोगी से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल कठोर कैद की सजा सुनाई
- 10 अगस्त से पटना भोपाल के बीच शुरू होगी सीधी उड़ान
- बिहार में 1000 माइनिंग कांस्टेबल्स की होगी भर्ती अलग कदर भी बनेगा
अनछपी: ऐसा लगता है कि आने वाले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के बीच का संबंध और तनावपूर्ण होने वाला है और इसकी वजह बनी हैं देश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जिन्हें हाल ही में बांग्लादेश के विरोध के बावजूद भारत सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। जो बात आसानी से समझ में आ सकती है वह यह है कि भारत सरकार शेख हसीना पर बहुत भरोसा कर रही है हालांकि उन्हें देश में सरकारी पुलिस के हाथों प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर हुई मौत का जिम्मेदार माना जाता है। शायद भारत सरकार के इसी भरोसे की वजह से शेख हसीना यह कह रही हैं कि वह दिसंबर में देश लौट जाएंगी जहां जाने पर उन्हें जेल में डाला जा सकता है या शेख हसीना के मुताबिक उनकी मौत भी हो सकती है। इधर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि जिस दिन बांग्लादेश के लोग जुलाई क्रांति की दूसरी वर्षगांठ मना रहे हैं, उस दिन शेख हसीना की यह बातचीत बांग्लादेश की संप्रभुता और जुलाई क्रांति के शहीदों का गंभीर अपमान है। ऐसा लगता है कि भारत सरकार फिलहाल बांग्लादेश की इन आपत्तियों को खारिज कर रही है। इस बीच एक और बात ऐसी चल रही है जिससे लगता है कि भारत सरकार जलसंधि के मामले में बांग्लादेश से वही रवैया अपनाने की नीति पर चलेगा जो पाकिस्तान के मामले में अपनाई गई थी। बताया जा रहा है कि फरक्का जलसंधि का समय पूरा होने वाला है और भारत सरकार की ओर से यह संकेत मिला है कि इसे रिन्यू नहीं किया जाएगा। देखना यह होगा कि अगले कुछ महीनों में शेख हसीना का बांग्लादेश में भविष्य कैसा बनता है और क्या तारीख रहमान की सरकार किसी समझौते के लिए तैयार होगी?
66 total views