छ्पी-अनछपी: अब यूजीसी-नेट में गड़बड़ी, ईरान का एलान- अमेरिकी सैनिक पकड़ो- इनाम पाओ

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। नीट पेपर लीक के बाद अब यूजीसी नेट पेपर में भी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ईरानी सेना ने एलान किया है कि अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़नेवाले को 30 हजार डालर इनाम दिया जाएगा। बिहार के स्कूलों में 7000 से ज्यादा लाइब्रेरियन की भर्ती जल्द होगी।

और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए शब्द दिमागी नक्सली पर भारी विवाद हो गया है।

पहली ख़बर

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने रविवार को जून में आयोजित यूजीसी-नेट 2026 के तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा की। एनटीए ने इन विषयों के प्रश्नपत्रों में त्रुटियों की शिकायत मिलने के बाद यह फैसला लिया है। एनटीए ने यूजीसी-नेट का आयोजन 22 से 30 जून के बीच कराया था। 87 विषयों में यह परीक्षा कराई गई थी। यह परीक्षा जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ), सहायक प्रोफेसर पद के लिए पात्रता और पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। परीक्षा के बाद अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में कई गलतियों को लेकर अभ्यर्थियों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं। जागरण के अनुसार एनटीए ने परीक्षा रद करने के जो आधार बताए हैं, वह चौंकाने वाले हैं। इसमें बताया है कि प्रश्न पत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद की गलतियां, मशहूर विद्वानों के नामों की गलत स्पेलिंग, किताबों के गलत शीर्षक, सवालों की भाषा, व्याकरण, लिंग और वचन जैसी गलतियां पाई गई हैं। इसलिए यह फैसला लिया गया। ऐसे में एनटीए की क्षमता और उसके कामकाज पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 

ईरान का एलान- अमेरिकी सैनिक पकड़ो- इनाम पाओ

जागरण के अनुसार पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव नए मोड़ पर बढ़ गया है। ईरानी सेना ने एलान किया है कि अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़नेवाले को 30 हजार डालर इनाम दिया जाएगा। महिलाओं के मामले में इनाम दोगुना यानी 60 हजार डालर दिया जाएगा। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल आमिर हातमी ने रविवार को ये एलान किया। उन्होंने कहा कि यह योजना इसमें शामिल होने के लिए “बड़ी संख्या में आए अनुरोधों के बाद बनाई गई। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिकी सैनिकों को कब या क्हां मारा या पकड़ा जाएगा। इस घोषणा को ट्रंप की उस चेतावनी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को ईरान में अभियान के लिए उतरने की संभावना जताई थी।

सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने का आदेश देने वाले के बारे में यूजर को बताया

हिन्दुस्तान के अनुसार सोशल मीडिया मंच एक्स के मालिक एलन मस्क ने घोषणा की है कि उनका प्लेटफॉर्म अब सामग्री हटाने या अकाउंट प्रतिबंधित करने के सरकारी या अन्य अनुरोधों की जानकारी यूजर्स को देगा। इसके तहत किस सरकारी एजेंसी ने पोस्ट हटाने की मांग की और उसका कानूनी आधार क्या था, यह भी स्पष्ट किया जाएगा। मस्क ने कहा कि इसका उद्देश्य ऑनलाइन अभिव्यक्ति में सरकारी हस्तक्षप के प्रति पारदर्शिता बढ़ाना है। नई व्यवस्था के तहत जब भी कोई सरकारी विभाग या एजेंसी किसी विशिष्ट सामग्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगी तो यूजर्स को इसकी सूचना दी जाएगी। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म अनुरोध करने वाले प्राधिकरण की पहचान बताएगा और कार्रवाई के लिए दिए गए कानूनी आधार तथा स्पष्टीकरण को भी सार्वजनिक करेगी। 

स्कूलों में 7000 से ज्यादा लाइब्रेरियन की भर्ती जल्द होगी।

भास्कर के अनुसार बिहार के सरकारी विद्यालयों में सात हजार से लाइब्रेरियन की नियुक्ति होगी. इसके साथ-साथ विद्यालय में नियुक्त लाइब्रेरियन का ट्रांसफर भी होगा. इसके लिए भी अब जल्द ट्रांसफर नीति बनेगी. लाइब्रेरियन भी ट्रांसफर की मांग काफी दिनों से कर रहे थे. इस कारण शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने लाइब्रेरियन के ट्रांसफर को लेकर सोमवार को विस्तृत समीक्षा करेंगे. बैठक में नियुक्ति की प्रक्रिया, स्थिति और आगे की कार्रवाई पर चर्चा होने की संभावना है. इसके साथ ही ट्रांसफर पॉलिसी पर भी चर्चा होगी. ऐसे में शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी नीति, प्रक्रिया और विभाग की ओर से लिए जाने वाले अगले निर्णयों पर भी चर्चा होगी. इससे राज्य के स्कूलों में लंबे समय से लाइब्रेरियन की बहाली की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों की उम्मीदें बढ़ी हैं. लाइब्रेरियन नियुक्ति और ट्रांसफर पालिसी पर होने वाली चर्चा के लिए पदाधिकारियों ने तैयारी पूरी कर ली है. शिक्षा मंत्री के कार्यालय कक्ष में शाम चार बजे आयोजित होने वाली बैठक में विभाग से जुड़े कई अहम मामलों पर विचार विमर्श किया जायेगा. शिक्षा विभाग के सचिव की ओर से जारी पत्र के अनुसार बैठक के एजेंडे में लाइब्रेरियन की नियुक्ति को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए शब्द दिमागी नक्सली पर भारी विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले से 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने में सफल रहा है, लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ अब भी आसपास मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी सोच रखने वाले लोग वर्षों तक सत्ता के गलियारों में जगह बनाते रहे और सरकारी समितियों में सलाहकार की भूमिका निभाकर नीति निर्माण को प्रभावित करते रहे। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का भाषण 75 मिनट चला। इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण, आत्मनिर्भरता, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा व विकसित भारत 2047 का रोडमैप भी रखा। समारोह में लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे गाए गए। सेना के बैंड ने इसकी धुन बजाई। इसके बाद पीएम ने तिरंगा फहराया व राष्ट्रगान हुआ। इधर, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को पीएम मोदी के दिमागी नक्सली बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चिदंबरम के बयान पर कहा, पीएम ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सली नहीं कहा। उनके मुताबिक, अलगाववादियों का समर्थन करने व संविधान नकारने वाले ‘दिमागी नक्सली’ हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • पटना जिले के खुसरूपुर थाना क्षेत्र के आदिलपुर गंगा घाट पर नहाने के दौरान तीन किशोरों की मौत
  • बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से टेस्ट मैच हराकर इतिहास रच दिया, ऑस्ट्रेलिया की धरती पर बांग्लादेश की पहली टेस्ट जीत
  • यूक्रेन ने 600 ड्रोन से मास्को पर किया हमला, 6 लोगों की मौत- रूस के जवाबी हमले में यूक्रेन में पांच मरे
  • बनारस एयरपोर्ट पर यात्री की लाइसेंसी पिस्टल से चली गोली, गया और नालंदा निवासी दो कर्मचारी घायल
  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

अनछपी: जैसा कि डर था वंदे मातरम के गायन पर विवाद शुरू हो गया है और शायद पहला ऐसा मामला है जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी को इसके तथाकथित अपमान की वजह से मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नयी दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गाने के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाव-भाव को लेकर शुरू हुआ विवाद गहरा गया है। इसे लेकर दिल्ली के आइपी एस्टेट थाने और कर्नाटक के मंगलुरु के उरवा थाने में भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है। यह एक वायरल वीडियो के आधार पर दर्ज करायी गयी है, जिसमें सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर इशारा करते और उनसे बात करते हुए देखा गया। यही नहीं इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सियासत शुरू कर दी और उन्होंने सोनिया गांधी पर इसके अपमान का आरोप लगा दिया। उधर कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि खरगे काफी देर से खड़े थे और सोनिया उनके लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं। इस मामले में जो सबसे अहम बात है वह यह है कि मोदी सरकार ने वंदे मातरम के सभी छंदों को राष्ट्रगीत बता दिया है जो संविधान निर्माताओं की इच्छा के खिलाफ है। भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं ने वंदे मातरम गीत के सिर्फ दो छंदों को ही राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ने इसमें उन हिस्सों को शामिल कर लिया जिसे संविधान निर्माताओं ने इसके लायक नहीं माना था। इस जीत के बाकी छंदों में हिंदू देवी देवताओं की स्तुति है जो किसी गैर हिंदू के लिए कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस तरह यह फैसला न केवल असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करने वाला है। इसके अलावा यह बात भी विचारणीय है कि अगर कोई इस राष्ट्रगीत को नहीं गाता है तो इसे अपमान क्यों माना जाना चाहिए जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई फैसला नहीं दिया है? 

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