छ्पी-अनछपी: SIR में इलेक्शन कमिश्नर को भी नोटिस, बिहार में पेपर लीक-घोटाला के 44 मामले

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। दिल्ली में वोटर लिस्ट से नाम सुधार के लिए बदनाम एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान खुद चुनाव आयुक्त और दूसरे बड़े लोगों के नाम नोटिस जारी किए गए हैं। बिहार में पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों से जुड़े 44 मामलों की जांच चल रही है। पटना से गिरफ्तार तीन साइबर फ्रॉड के पास मिले अमेरिकी नागरिकों के डेढ़ लाख ई मेल आईडी।

और, ईरान से लड़ाई में अमेरिका को साढ़े चार लाख करोड रुपए का नुकसान हुआ है।

पहली ख़बर

नई दिल्लीः दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान मतदाता सूची में सामने आ रही खामियों ने कई नामचीन लोगों के नाम भी जांच के दायरे में ला दिए हैं। निर्वाचन आयुक्त डा. सुखबीर सिंह संधू, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, सीबीआइ निदेशक प्रवीण सूद, विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री, सांसद बांसुरी स्वराज, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग समेत कई प्रमुख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें अधिकतर मामले पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं होने के बताए गए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे चौंकाने वाला मामला दिवंगत अर्थशास्त्री और पद्म पुरस्कार से सम्मानित बिबेक देबराय का है। वर्ष 2024 में निधन के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज मिला और उन्हें भी नोटिस जारी किया गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी सूची के अनुसार, करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने हैं। इनमें से 31,63,930 मतदाताओं को नोटिस जारी हो चुके हैं। चुनाव आयोग के साफ्टवेयर से सामने आई 11 तरह की लाजिकल डिस्क्रेपेंसी और पिछली एसआइआर सूची से नो-मैपिंग के मामलों में ये नोटिस भेजे गए हैं।

बिहार में पेपर लीक-घोटाला के 44 मामले

हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में प्रतियोगिता परीक्षाओं में धांधली से संबंधित 44 हाईप्रोफाइल केसों की जांच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) कर रही है। इकाई ने बीते तीन वर्षों में करीब एक दर्जन परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक से संबंधित कांड दर्ज किया है। ईओयू जिन परीक्षाओं की जांच कर रही है, उनमें नीट 2017, नीट 2025, नीट 2026 और नीट पुनर्परीक्षा 2026 में परिणाम घोषित हो चुका है, जबकि 21391 पदों पर सिपाही बहाली, करीब 88 हजार पदों पर शिक्षक बहाली (टीआरई तीन) और 4500 पदों पर कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर की परीक्षा रद्द होने के बाद परीक्षा पुनः लेकर परिणाम घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा 935 पदों पर सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और 69 पदों पर सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षा कदाचार के कारण रद्द है। यह परीक्षा पुनः करायी जानी है। 4236 पदों पर मद्य निषेध, कक्षपाल एवं चलंता दस्ता में सिपाही, 1799 पदों पर बिहार पुलिस में दारोगा और 122 पदों पर बिहार होमगार्ड में हवलदार अनुदेशक की परीक्षा आर्थिक अपराध इकाई की जांच रिपोर्ट को लेकर लंबित है।

‘नीट’ के बाद दारोगा भर्ती परीक्षा में सेंध

भास्कर के अनुसार नीट यूजी धांधली मामले का मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट केवल राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक सीमित नहीं था। उसका गिरोह बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग यानी बीपीएसएससी की बहाली परीक्षाओं में भी सक्रिय था। मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा नीट यूजी धांधली हुआ। ईओयू को उसके ठिकाने और मोबाइल से बीपीएसएससी की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी यानी एईडीओ और हवलदारं इंस्ट्रक्टर बहाली से जुड़े अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले। मूल दस्तावेज और ब्लैंक चेक भी बरामद हुए। ईओयू अब सम्राट के पास से मिले रोल नंबरों और सीडीआर का मिलान कर रही है।

साइबर फ्रॉड के पास मिले डेढ़ लाख ई मेल आईडी

भास्कर के अनुसार पटना ज़िल के दानापुर के गोला रोड स्थित फ्लैट में बैठ कर अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक लैपटाप से पुलिस को डेढ़ लाख से अधिक मेल आइडी मिली हैं. पुलिस इसके स्रोत और इनके इस्तेमाल की जांच कर रही है. गिरोह के पास मिले तीन अन्य लैपटाप की भी जांच जारी है. मुसल्लहपुर थाना पुलिस ने रामपुर रोड में वाहन जांच के दौरान एक एमबीए पास युवक को पकड़ा था. उसके मोबाइल से पटना से अमेरिका तक फैले साइबर ठगी के नेटवर्क का सुराग मिला. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दानापुर के गोला रोड स्थित विवेक विहार कॉलोनी के अपार्टमेंट में छापेमारी कर अक्षय कुमार साह, ओमप्रकाश, सत्यम कुमार और अभिषेक कुमार को गिरफ्तार किया था. जांच में पता चला कि अभिषेक व ओमप्रकाश पहले दूसरे साइबर गिरोह के लिए काम करते थे.

ईरान से लड़ाई में अमेरिका को साढ़े चार लाख करोड़ रुपए का नुकसान

हिन्दुस्तान के अनुसार जिस युद्ध को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो से तीन सप्ताह में समेटने का दम भर रहे थे, वह अब सातवें महीने में प्रवेश कर एक विशाल आर्थिक दलदल का रूप ले चुका है। फरवरी में शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका अब तक 45.1 अरब डॉलर (करीब 4.30 लाख करोड़ रुपये) फूंक चुका है जोकि नेपाल जैसे देश की कुल सालाना जीडीपी (लगभग 45.84 अरब डॉलर) के बराबर है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) द्वारा कांग्रेस को सौंपी गई गोपनीय रिपोर्ट के हवाले से मीडिया ने रविवार को यह खुलासा किया।

तनाव बढ़ने से अमेरिका और ईरान में अलर्ट

मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान अलर्ट मोड पर हैं। सऊदी अरेब पर हूती विद्रोहियों के हमलों को लेकर वाशिंगटन ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश विभाग ने मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी कि वह ज्यादा सावधान रहें, क्योंकि उड़ान रद्द होने, वायु क्षेत्र बंद होने जैसी बाधा सकती हैं। ईरान के समर्थक गुट ‘अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। अमेरिका ने अपने नागरिकों को यहां की यात्रा न करने की चेतावनी भी दी। यह चेतावनी तब आई जब सऊदी अरब ने बताया कि हूतियों द्वारा रियाद की ओर दागी गई एक मिसाइल को रोक दिया गया।

कुछ और सुर्खियां:

  • मोकामा के राजेंद्र पुल स्टेशन पर नए पुल को दोहरी लाइन से जोड़ने के लिए इंटरलॉकिंग की वजह से दर्जनों ट्रेन रद्द
  • बिहार में बाढ़ से 17 जिलों की 1050 सड़कें टूटीं
  • सेना भर्ती मुख्यालय, दानापुर की अग्निवीर भर्ती रैली 22 सितंबर से, 11 हज़ार से अधिक उम्मीदवार होंगे शामिल
  • यूक्रेन ने मॉस्को समेत रूस के कई शहरों पर 1600 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले किए

अनछपी: भारत में 2014 के बाद से सरकारी व्यवस्था से आम लोगों को जिन बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है उनमें वोटर लिस्ट की काट-छांट और सुधार की कार्रवाई बेहद अहम है। वैसे तो यह कार्रवाई चुनाव आयोग के नाम पर है लेकिन इसे भी एक सरकारी व्यवस्था ही माना जाना चाहिए और मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि यह कुछ बेहद नाकाम प्रक्रियाओं में से एक है। अफसोस की बात है कि इससे बड़े पैमाने पर भारतीय नागरिकों को अपने ही देश की वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए न केवल भारी मशक्कत करनी पड़ी बल्कि लाखों लोग ऐसे हैं जिनका नाम अब भी वोटर लिस्ट में इसलिए शामिल नहीं हुआ है क्योंकि चुनाव आयोग ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगति की ऐसा अतार्किक प्रक्रिया चुनी है जो कहीं से भी सही नहीं कहा जा सकती। यानी नाम में छोटे-छोटे स्पेलिंग मिस्टेक और मां-बाप व बाल बच्चों की उम्र का अंतर को वोटर लिस्ट में संदिग्ध नाम घोषित करने का आधार बनाया गया है। ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो भारतीय परिवेश में कहीं से भी मानवीय और न्यायसंगत नहीं हो सकते। इसी का नतीजा है कि अब तक भारत की कई बड़ी-बड़ी हस्तियों के नाम भी नोटिस जारी हुए और अब भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग इस मामले को इस तरह पेश कर सकता है कि ऐसी गड़बड़ी में कोई भेदभाव नहीं है और बड़े लोगों को भी नोटिस का सामना करना पड़ रहा है लेकिन असली समस्या इसी तर्क में है। इस तर्क का खतरनाक पहलू यह है कि नोटिस पाने वाले जो बड़े लोग हैं, वह तो अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवा लेंगे लेकिन जो आम आदमी है और जो पासपोर्ट या शैक्षिक प्रमाण पत्र नहीं रखते उनकी परेशानी नहीं दूर होगी। एक और खतरनाक बात यह है कि चुनाव आयोग जरूरी दस्तावेजों की जो लिस्ट जारी करता है उनमें से किसी एक काग़ज़ के आधार पर उसके अधिकारी वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने को तैयार नहीं होते बल्कि वह ऐसे लोगों से दो-दो तीन-तीन प्रमाण पत्र मांगते हैं। यह आम भारतीय नागरिकों के साथ अत्याचार है और इसे तत्काल बंद होना चाहिए।

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