बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी रिपब्लिकन पार्टी को ले डूबे। बिहार में फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी दे चुके 1700 शिक्षकों को पकड़ा गया है जबकि अभी 80000 की जांच बाकी है।
और, फुलवारी शरीफ थाने में चार स्मैक तस्करों को पकड़कर दो को घूस लेकर छोड़ने के मामले में आठ पुलिस वाले सस्पेंड।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। शुरुआती चुनावी रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत के आंकड़े पार करते हुए बढ़त बना ली। 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट 228 सीटों पर आगे हैं, जबकि सीनेट में 54 सीटों पर बढ़त के साथ बहुमत की ओर बढ़ रहे हैं। इन नतीजों को ट्रंप की नीतियों और नेतृत्व के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, नए निर्वाचित कांग्रेस के सदस्यों को तीन जनवरी 2027 को शपथ दिलाई जाएगी।
ट्रंप, वेंस ने ईरान जंग को जिम्मेदार बताया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को माना कि ईरान युद्ध ने चुनावों को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि मतदाता आठ माह से जारी संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह युद्ध एक ऐसा कदम था जो उन्हें उठाना ही पड़ा। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने युद्ध को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ऐसे नतीजों की आशंका थी।
अमेरिका में पहली बार चुना गया मुस्लिम सीनेटर
अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव (मिड टर्म इलेक्शन) में कई निर्वाचन ऐसे हुए हैं जो अमेरिका या उस राज्य के इतिहास में पहली बार हैं। इन नतीजों में अमेरिका के इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर का निर्वाचन, पहली अश्वेत महिला गवर्नर, किसी राज्य का नेतृत्व करने वाली पहली मूल अमेरिकी महिला, टेक्सास की पहली लातिन गवर्नर और सीनेट के लिए घोषित समलैंगिक पुरुष का चुनाव शामिल है। हिन्दुस्तान ने लिखा है कि प्रगतिशील विचारधारा के लोकप्रिय नेता अब्दुल अल-सईद (साथ लगी तस्वीर) ने मिशिगन की खाली सीनेट सीट के लिए कड़े मुकाबले में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हरा दिया है। सईद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर होंगे। सईद के माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे। दिलचस्प बात यह है कि उनकी ससुराल कर्नाटक के शहर भटकल में है। उनकी पत्नी डॉक्टर सर के दादा शमसुद्दीन प्रसिद्ध वकील और कर्नाटक शंकर में उप मंत्री रह चुके थे। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में काम कर चुके अल- सईद ने इससे पहले कभी कोई निर्वाचित पद नहीं संभाला था। आठ साल पहले बड़े अंतर से हारने के बाद उन्होंने अमेरिकी सीनेट तक का सफर तय किया है।
ईरान बोला- अमेरिकी मतदाताओं ने ट्रंप के युद्ध को खारिज किया
जागरण के अनुसार मध्यावधि चुनावों में ट्रंप को झटका लगने पर ईरान में जश्न मना। बुधवार को तेहरान में हजारों लोगों ने 1979 के अमेरिकी दूतावास कब्जे की याद में मार्च निकाला और नतीजों को ट्रंप के युद्ध की अस्वीकृति बताया। अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिकी बदलाव से ईरान के प्रति शत्रुता बदलने की उम्मीद गलत फहमी है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद वागेर गलीबाफ ने युद्ध -विरोधी संदेश का समर्थन किया। ईरानी आउटलेट ने एक्स पर चुटकुला साझा कियाः ट्रंप ईरान में नाकाम, टेक्सास में सफल, वहां दशकों बाद पहली बार डेमोक्रेट ने सीनेट जीती।
दुनिया के सबसे अमीर आदमी मस्क को भी लगा झटका, 4700 करोड़ खर्च किए
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी और डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद एलन मस्क को झटका लगा। उम्मीदवार न होते हुए भी उन्होंने रिपब्लिकन प्रत्याशियों और टेक्सास को ‘रेड’ बनाए रखने के लिए लगभग 4,700 करोड़ रुपये (50 करोड़ डालर) खर्च किए। डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर कब्जा किया; जीना हिनोजोसा टेक्सास की गवर्नर बनीं। स्पेसएक्स और टेस्ला की जांच बढ़ने की आशंका से निवेशक चिंतित हैं और प्री-मार्केट ट्रेडिंग में दोनों के शेयर गिरे।
1700 फ़र्ज़ी शिक्षक- 80 हज़ार जांच की ज़द में
हिन्दुस्तान के अनुसार राज्य सरकार 80 हजार शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच करेगी। बुधवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। करीब 3.20 लाख शिक्षकों में से 2.40 लाख के प्रमाण पत्र का सत्यापन हो चुका है। अब तक 1700 शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्त पाए गए हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शेष प्रमाण पत्रों का सत्यापन जल्द पूरा करने और फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। वित्तीय अनियमितताओं पर भी दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
चीफ इलेक्शन कमिश्नर को कानूनी कार्रवाई से छूट पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से मिली छूट पर केंद्र और आयोग से जवाब मांगा है। मामला 2023 के कानून की धारा 16 का है। इसके तहत आधिकारिक कामकाज से जुड़े कार्यों या बयानों के लिए आयुक्तों के खिलाफ दीवानी या आपराधिक कार्यवाहीं नहीं हो सकती। छूट पद छोड़ने के बाद भी मिलती है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने राजद सांसद मनोज झा और अधिवक्ता अरुण अग्रवाल की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। याचियों ने धारा 16 को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की। उनका तर्क है कि इसमें दुर्भावना से किए काम के लिए भी अपवाद नहीं है।
स्मैक तस्करों को घूस लेकर छोड़ने में 8 पुलिस वाले सस्पेंड
हिंदुस्तान के अनुसार तस्कर के साथ पकड़े गए दो युवक को घूस लेकर छोड़ने के आरोप में फुलवारी थाने में तैनात पांच पुलिस पदाधिकारियों और तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें अपर थानाध्यक्ष दिवाकर प्रसाद, पुलिस अवर निरीक्षक नारद मुनी सिंह, रितेश कुमार, पवन कुमार, परिवादी पुलिस अवर निरीक्षक आकाश कुमार तथा सिपाही साबिर आलम, आनंद राज और शुभम कुमार शामिल हैं। सभी पर प्राथमिकी दर्ज कर अनुशासनिक कार्रवाई की जा रही है। नगर एसपी (पश्चिमी) चंद्र प्रकाश के अनुसार, 26 अक्तूबर को फुलवारी के अलमीजान नगर स्थित मुर्गी फार्म में छापेमारी कर 1.776 किलो स्मैक, पिस्टल, दो मैगजीन, दो इलेक्ट्रॉनिक पॉश मशीन, एयरगन और टूटी हुई एयरगन बरामद की गई थी। पुलिस तीन को हिरासत में लिया। इनमें आकिब खान उर्फ मोहम्मद साकिब खान (32) को मादक पदार्थ और हथियार के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि मो. आफताब आलम (पठान टोली निवासी) व मोहम्मद एहसान को भी हिरासत में लिया गया था पर दोनों के नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किया। दलाल के जरिये दोनों को छोड़ने के लिए 11 लाख की डील हुई। छह लाख पुलिसकर्मियों को दिए गए, जबकि पांच लाख दलाल ने लिया।
इस मामले का भेद ऐसे खुला
छापामारी टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने दोनों युवकों को घूस लेने के बाद छोड़ दिया। लेकिन, घूस की रकम बंटवारे को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंचा। अब वरीय अधिकारियों ने दोनों युवकों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। आफताब के बड़े भाई परवेज उर्फ गुड्डू और बिचौलिया मुकरम से भी पूछताछ की जा रही है। बिचौलिये ने रुपये लेनदेन में अपनी भूमिका की जानकारी दी है। उसने बताया कि एक बिल्डर ने थाने में पैरवी भी की थी। उसके यहां पैसा रखा है। पुलिस ने बिचौलिये के पास से 95 हजार बरामद किए हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- सहरसा में रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के सुप्रिंटेंडिंग इंजीनियर विजय कुमार के घर छापा में मिला 31 लाख, इंजीनियर की पत्नी ने बाहर फेंक नोटों से भरा बैग
- बिहार में रेसीडेंशियल कंपलेक्स का इस्तेमाल कमर्शियल कंपलेक्स में करने पर एक लाख तक का लग सकता है जुर्माना
- बिहार में चित्रगुप्त पूजा की छुट्टी 10 नवंबर की जगह आप 11 नवंबर को होगी
- मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी छठ पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
- भारतीय सेवा में बहाल होने वाले 75% अग्नि वीरों को चार की जगह अब 6 साल की नौकरी
- पत्नी से विवाद में चर्चा में आए खगड़िया के एसपी भानु प्रताप का ट्रांसफ़र, हेडक्वार्टर भेजे गए
अनछपी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के बीच के चुनाव जीतने के लिए सारे तिकड़म अपनाए और मानवता को शर्मसार करने वाली हर हरकत की लेकिन ज़ाहिर तौर पर अमेरिकियों ने उनके इन हथकंडों को पसंद नहीं किया और एक तरह से उनकी हेकड़ी निकाल दी। अमेरिका के इस चुनावी परिणामों ने उन दूसरी जगहों के लिए भी एक उम्मीद की किरण जागी है जहां के हुक्मरानों को ऐसा लगता है कि नफरत और इसी तरह की हरकतों के सहारे लंबे समय तक शासन किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनके साथियों को भी इस बात का एहसास है कि ईरान के साथ किया गया बेमतलब युद्ध उनके काम नहीं आया और अमेरिका के आम लोगों ने इसे रिजेक्ट कर दिया। हालांकि यह समझना बहुत सही नहीं होगा कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन से दुनिया में इसराइल के सहारे जो अत्याचार हो रहे हैं वह कम हो जाएंगे। ध्यान रहे कि अमेरिका में रिपब्लिकन का शासन हो या डेमोक्रेट्स का, जब भी किसी देश पर हमला करने का उसका दिल हुआ है तो उसने कानून और अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई झिझक महसूस नहीं की। यह खूनी सिलसिला इतने लंबे समय से चला रहा है कि अमेरिका के आम नागरिक भी इस मामले में बेबस और मजबूर नजर आते हैं लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में यह उम्मीद की जा सकती है कि एक न एक दिन उन्हें इस बात का एहसास होगा कि दुनिया के देशों पर बेमतलब हमले करना उनके हित में नहीं है। ताजा मामलों में ईरान को लें या इससे पहले वेनेजुएला, अफगानिस्तान, इराक और भी कई देश जहां अमेरिका ने बर्बरता की है, उस पर भी अमेरिकी जनता को सोचना होगा। फिलहाल दुनिया इस बात का जश्न मना सकती है कि डोनाल्ड ट्रंप जो हेकड़ी दिखाते थे, उसे उनकी जनता ने ही निकाल दिया है।
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