छ्पी-अनछपी: विपक्ष बोला- ज्ञानेश पर हो देशद्रोह का मुकदमा, आज़म रिहा हुए तो पहुंच गई ईडी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मॉक पार्लियामेंट में देशद्रोह का मुकदमा चलाने का प्रस्ताव पास किया। उत्तर प्रदेश की रामपुर जेल से शनिवार शाम आजम खां के बाहर आते ही ईडी ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट व जौहर यूनिवर्सिटी में धांधली के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

और, जानिएगा कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 56 साल की उम्र में किस पत्रकार से शादी रचाई।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सांकेतिक जनमहाभियोग की कार्यवाही की. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में इस मॉक संसद में राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने और देशद्रोह के आरोप में अदालत में मुकदमा चलाने का प्रस्ताव रखा. आरोप लगाया गया कि सीईसी ने केंद्र सरकार के इशारे पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया और आपराधिक कृत्य करते हुए मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाया. अंत में प्रस्ताव पर मतदान कराया गया. विपक्षी नेताओं ने हाथ उठा इसे सर्वसम्मति से पारित किया.  

प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोप

  • पहला, भाजपा के साथ मिलकर लोकसभा और विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने की साजिश में शामिल होना.
  • दूसरा, एसआइआर के जरिये 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाना.
  • तीसरा, संसद की जानकारी और मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव करना.
  • चौथा, इआरओनेट और इसीआईनेट सॉफ्टवेयर के जरिये मतदाता सूची पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करना.
  • पांचवां, चुनाव आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों को महत्वपूर्ण फैसलों से अलग रखना.
  • छटा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर काम करना.

विपक्ष की रैली से पहले दिल्ली फिर छावनी बनी

हिन्दुस्तान के अनुसार इंडिया गठबंधन की रविवार को रामलीला मैदान में होने वाली रैली और कनॉट प्लेस से प्रस्तावित रोड शो के मद्देनजर नई दिल्ली एक बार फिर छावनी में तब्दील हो गई है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान और उसके आसपास के इलाकों को 14 विशेष सुरक्षा जोन में विभाजित किया है। प्रत्येक जोन की कमान एक डीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। इसके साथ ही 100 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को उतारा गया है। सड़कों पर साढ़े तीन हजार से अधिक अतिरिक्त जवान आधुनिक हथियारों के साथ मुस्तैद हैं। रविवार सुबह से ही नई दिल्ली और मध्य जिले में व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी।

आज़म रिहा हुए तो पहुंच गई ईडी

लखनऊ से हिन्दुस्तान के अनुसार सपा नेता आजम खां की कानूनी अड़चनें खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। रामपुर जेल से शनिवार शाम आजम खां के बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट व जौहर यूनिवर्सिटी में धांधली के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार ईडी रविवार सुबह करीब 10 बजे आरोपी आजम को गाजियाबाद स्थित पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट) कोर्ट में पेश करेगी। ईडी वर्तमान में आजम खां के विरुद्ध 40 मुकदमों में जांच कर रही है। 

शहरों की दस नागरिकों सेवाएं अब ऑनलाईन

प्रभात ख़बर के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के अंतर्गत विकसित UPYOG पोर्टल का शुभारंभ कर 10 सेवाओं की शुरुआत की है. इस अवसर पर राज्य के सभी 264 नगर निकायों को साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो गया है. इससे नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता आयेगी. साथ ही लोगों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी. इस कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को लोक सेवक आवास, स्थित ‘संकल्प’ सभागार में किया गया. 

कृषि भूमि पर 7 प्रतिशत शुल्क देकर उद्योग लगाने की छूट

भास्कर के अनुसार बिहार में उद्योग लगाने और नया कारोबार शुरू करने की राह अब बेहद आसान हो गई है। राज्य सरकार ने कृषि योग्य भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने के नियम बेहद सरल कर दिए हैं। अब निवेशकों और किसानों को जमीन की प्रकृति बदलवाने के लिए अनुमंडल या अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की नई व्यवस्था के तहत अब निबंधन कार्यालय में ही भू-प्रकृति परिवर्तन का कार्य पूरा होगा। इसके लिए कृषि और व्यावसायिक जमीन की सर्किल दर के अंतर की राशि का केवल 7 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी शुल्क जमा करना होगा। इससे पहले यह जटिल प्रक्रिया अनुमंडल अधिकारी के माध्यम से पूरी होती थी। उसमें अंचलाधिकारी और जिला अवर निबंधक के प्रतिवेदन के बाद 10 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी शुल्क लिया जाता था।

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि से रचाई शादी

जागरण के अनुसार जम्मू-कश्मीर सरकार में हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस के विधायकों में बढ़ते असंतोष और बागी तेवरों के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दूसरी शादी रचाई है। 56 वर्षीय उमर ने स्वयं इसकी पुष्टि करते हुए इंटरनेट मीडिया पर अपनी नयी दुल्हन निधि राजदान के साथ शादी की तस्वीरें साझा की हैं। उमर ने लिखा … गत रोज ही एक नए सफर की शुरुआत हुई है। 49 वर्षीय निधि राजधान की भी यह दूसरी शादी है। उमर का पहली पत्नी पायल नाथ अब्दुल्ला से तीन माह पहले (31 जुलाई) ही तलाक हुआ है। हालांक्ति उमर और पायल वर्ष 2011 से ही अलग रह रहे थे। पहली शादी से उमर के दो पुत्र हैं, जहीर और जमीर अब्दुल्ला।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार विधान मंडल का विंटर सेशन 30 नवंबर से शुरू होगा
  • बिहार बोर्ड की मैट्रिक और इंटर बोर्ड परीक्षा 2027 के लिए डमी एडमिट कार्ड जारी, 7 नवंबर तक सुधार का मौका
  • आज से उत्तर बिहार में पशुओं और व्यापार मंडलों में धान की सरकारी खरीद शुरू होगी
  • मणिपुर के नोनी में हिंसा, कुकी-जो समुदाय के तीन लोगों की मौत

अनछपी: मीडिया में कैसे खबरों को दबाया और छिपाया जाता है इसका एक और उदाहरण आज देखने को मिला जब बिहार विधान परिषद चुनाव में जीतकर आए दो सदस्यों ने शपथ ग्रहण से पहले ही भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली लेकिन इस खबर को बदलकर यह बताया गया कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिया है। यह दोनों सदस्य हैं तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय जीत कर आए बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से जीत कर आए राहुल राज। दरअसल जैसे ही इन दोनों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली, यह मुद्दा उठने लगा कि निर्दलीय जीत कर आए सदस्य किसी पार्टी की सदस्यता लेते हैं तो उनकी विधान परिषद की या विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाती है। इन दोनों ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली और उन्हें पार्टी का पट्टा ओढ़ाया गया। इनमें से एक यानी राहुल राज का बयान स्पष्ट तौर पर सुना जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि हां उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली है। बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के फौरन बाद कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर आई लेकिन सुबह होते-होते अखबारों में खबर बिल्कुल बदल गई और सदस्यता को समर्थन देना बताया गया। अखबारों ने यहां तक बेईमानी कर दी कि उन्होंने यह नहीं लिखा कि पहले दोनों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी लेकिन बाद में इसे समर्थन देना बताया गया। यहां तक कि अखबारों ने समर्थन देने वाली बात किसके हवाले से लिखी है यह भी नहीं बताया। इस मामले में अखबारों की बेईमानी का एक सबूत यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू सिंह लगभग डेढ़ महीने पहले हाई कोर्ट से सजा पा चुके हैं फिर भी उनकी सदस्यता क्यों रद्द नहीं की गई, इसके बारे में कोई सवाल नहीं उठाते। ऐसे में गोदी मीडिया कहे जाने पर नाराज होने वाले अखबारों को अपने बारे में ध्यान से सोचना चाहिए।

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