बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एसआईआर के दौरान फॉर्म सिक्स में बदलाव के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट की बात से साबित हुआ कि ज्ञानेश कुमार ने गैर कानूनी ढंग से फॉर्म बदला है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता फिलहाल मुश्किल दौर में पहुंच गई है।
और, पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में बिहार के अभिषेक कुमार और रितेश सिंह को गिरफ्तार किया गया।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्षी दलों के आंदोलन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने फार्म-6 में किसी तरह के संशोधन को मंजूरी नहीं देने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए अपने हमलों को और तीखा कर दिया है। चुनाव आयोग मुख्यालय तक विपक्षी सांसदों के मंगलवार को होने वाले मार्च से ठीक पहले सर्वोच्च अदालत की इस टिप्पणी का सहारा लेते हुए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अब यह बात बिना किसी शक के साबित हो चुकी है कि ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से ‘फार्म-6’ में बदलाव किया। यह इस बात का एक और सुबूत है कि उन्होंने भाजपा की मदद करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
फार्म-6 में संशोधन को कभी नहीं दी मंजूरी : सीजेआइ
एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने फार्म-6 में किए बदलावों पर चिंता जताई, जिसका उपयोग नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने का आवेदन करने के लिए करते हैं। दलीलों पर प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को हमने मंजूरी नहीं दी है। जब रिकार्ड प्रस्तुत किया जाएगा, तो हम यह देखना चाहेंगे कि किसने संशोधन किया है। खुद आयोग ने स्पष्ट किया था कि फार्म-6 संशोधित नहीं किया गया है। उसके साथ एक घोषणा-पत्र एसआइआर वाले राज्यों में जोड़ा गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई के फैसले में इसे मंजूर किया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगर सीईसी को निलबित कर दिया गया तो चुनाव आयोग का कामकाज ठप हो जाएगा, चुनाव कौन कराएगा।
ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर कई मामलों में एकतरफा फैसले लेने और दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना निर्णय लिए जाने के आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस तो जारी कर दिया है, लेकिन उन्हें निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि समाचार-पत्र की रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता है। दूसरे पक्ष को सुनना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग के सभी फैसलों की समीक्षा करेगा और यदि कोई निर्णय कानून के अनुरूप नहीं पाया गया तो वह उसे रद कर देगा। कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हासिल कानूनी संरक्षण का उल्लेख करते हुए कह्य कि ऐसा संरक्षण तो जजों को भी प्राप्त नहीं है।
भारत-अमेरिका व्यापार अटका
हिन्दुस्तान के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता फिलहाल मुश्किल दौर में पहुंच गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है, लेकिन यह बेहद कड़ी और गंभीर स्थिति में है। उन्होंने संकेत दिया कि आगे सीमित स्तर पर ही कुछ समझौता संभव हो सकता है। म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती व्यापार असंतुलन है। भारत का व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में नहीं है और अमेरिका लंबे समय से इस असंतुलन तथा अपने व्यापार घाटे को लेकर चिंता जाता रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका व्यापार असंतुलन कम करने के लिए पारंपरिक वार्ता के अलावा टैरिफ का भी इस्तेमाल कर रहा है। देशों को व्यापार घाटा कम करने के लिए मजबूर करने के लिए आयात शुल्क को एक तरह के दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद दोनों पक्षों को वार्ता से समझौते की गुंजाइश तलाश करनी होगी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए पुनपुन नदी में कई लोग कूदे, दो के शव मिले
प्रभात खबर के अनुसार पटना ज़िल के पुनपुन के पिपरा थाना स्थित बेहरावां चकिया में रविवार को पुलिस टीम पर हमले के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने गयी. पुलिस से बचने के लिए कई लोगों ने पुनपुन नदी में छलांग लगा दी थी. हालांकि, पुलिस ने इस दौरान 38 लोगों को गिरफ्तार भी किया था, जिनमें 32 महिलाएं व छह पुरुष थे. वहीं, सोमवार को पुनपुन नदी से दो लोगों के शव मिले, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने नेवां के पास बिहटा-सरमेरा एनएच-131जी को करीब पांच घंटे तक जाम रखा. वहीं, गिरफ्तार सभी आरोपितों को सोमवार को जेल भेज दिया गया. इधर, ग्रामीणों ने बीडीओ को दिए आवेदन में थानाध्यक्ष पर दोनों मृतकों से मारपीट कर उन्हें नदी में फेंकने व जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल समेत अन्य आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. उनकी यह भी मांग थी कि रविवार को गिरफ्तार लोगों को बिना शर्त रिहा किया जाये, थानाध्यक्ष पर हत्या का केस दर्ज हो व दोनों मृतकों के परिजनों को सरकारी सहायता दी जाये.
चिकित्सा का नोबेल प्राइज़ तीन वैज्ञानिकों को
दिमाग की तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधियों को प्रकाश की मदद से चालू या बंद करने की तकनीक विकसित करने के लिए अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कार्ल डीसेरोथ, जर्मनी की राजधानी बर्लिन की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी के पीटर हेगेमन और जर्मनी के वुर्जबर्ग स्थित वुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी के जॉर्ज नागेल को 2026 का चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. तीनों वैज्ञानिकों ने लाइट-गेटेड आयन चैनल और ऑप्टोजेनेटिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किया है.
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में बिहार के दो लोग गिरफ्तार
हिन्दुस्तान के अनुसार भारत की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं कथित तौर पर पाकिस्तान तक पहुंचाने के आरोप में असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने बिहार के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ का दावा है कि दोनों पाकिस्तान के एक खुफिया ऑपरेटिव के संपर्क में थे और सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा कर रहे थे। असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने पूर्वी चंपारण के अभिषेक कुमार सिंह (31), बेगूसराय के रीतेश सिंह (39) को पकड़ा है। दोनों गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर स्थित एक किराये पर रह रहे थे। पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने कहा कि देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न युवक की गिरफ्तारी की जानकारी मिली है।
कुछ और सुर्खियां:
- दिल्ली दंगे की साजिश से जुड़े मामले में तिहाड़ जेल में बंद छात्र नेता शरजील इमाम 7 दिन की जमानत पर जहानाबाद में अपने घर काको पहुंचे
- स्वास्थ्य विभाग के 276 करोड़ के डस्टबिन घोटाला में दायर याचिका पर पटना हाई कोर्ट में आज सुनवाई
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बिहार में विपक्ष का लोकभवनमार्च 8 अक्टूबर को
- इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के लिए ₹375 से लेकर ₹1300 तक किराया बढ़ाया इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए ₹1000 से लेकर ₹10000 तक की बढ़ोतरी
- सुप्रीम कोर्ट को तीन नए जज मिले, अब जजों की कुल संख्या 37, कुल क्षमता 38
- कटिहार में कोर्ट जा रहे वकील की चाकू और गोली मारकर हत्या
अनछपी: वोटर लिस्ट में सुधार के नाम पर की गई एसएआईआर से जुड़े मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार तो कर दिया लेकिन फॉर्म सिक्स के मामले में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसी बातें कहीं जा रही हैं जो हैरतअंगेज हैं। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट यह कह रहा है कि फॉर्म सिक्स में हुए बदलाव को इसकी मंजूरी नहीं मिली थी तो दूसरी और चुनाव आयोग ने एक बार फिर यह दावा किया है कि जो बदलाव किए गए वह सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से ही किए गए। ध्यान रहे कि फॉर्म सिक्स दरअसल नए वोटर को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन चुनाव आयोग ने इसमें यह बात भी जोड़ दी थी कि नए वोटर को यह घोषणा पत्र देना होगा कि उनके माता-पिता या उनके माता-पिता के माता-पिता के नाम एसआईआर के बाद के तैयार वोटर लिस्ट में दर्ज थे। इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जो मामले दर्ज हैं उनमें यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और देश इस बात पर जरूर असमंजस में होगा कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का रहा है कि उसने ऐसे किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी तो चुनाव आयोग ने एक बार फिर यह दावा किया कि यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति से किए गए। देश के दो संवैधानिक संस्थानों के बीच इस तरह किसी बदलाव की स्वीकृति पर हुए विवाद के बाद ज्ञानेश कुमार को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना सही है कि केवल किसी अखबारी रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड नहीं किया जा सकता लेकिन जिस तरह की बात फॉर्म सिक्स को लेकर हुई है वह अखबार की बात नहीं बल्कि दोनों संस्थानों की अपनी-अपनी बात है। यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और इसमें ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना अपरिहार्य है।
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