बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने एसआइआर-वोट चोरी के विरुद्ध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर राहुल गांधी धरने पर बैठे तो पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद छोड़ा। पटना के चर्चित नीट छात्रा हत्याकांड में सीबीआई ने हाथ खड़े कर दिए और दोषी को नहीं खोज पाई। ई-केवाईसी नहीं कराने वाले बिहार के 34 लाख रसोई गैस उपभोक्ताओं का कलेक्शन ब्लॉक।
और, क्या ₹1550 रुपए का डस्टबिन स्वास्थ्य विभाग में ₹15000 में खरीदा गया? पटना हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू- जवाब तलब।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरोध में मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के मार्च में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता करीब 8 घंटे आकाशवाणी भवन में बरगद के नीचे धरने पर बैठे। राहुल सीईसी से मिलने पर अड़े थे। रात 8 बजे दिल्ली पुलिस राहुल और अन्य नेताओं को जबरन बसों में भरकर किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन ले गई। सांसदों सहित करीब 250 लोग हिरासत में लिए गए। करीब दो घंटे की हिरासत के बाद रात 10:10 बजे इन्हें छोड़ा। राहुल ने एक्स पर लिखा-‘लोकतंत्र के गद्दारों को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है। हिसाब होगा। एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा।’
240 सांसदों से मिलने का प्रस्ताव असामान्यः आयोग
निर्वाचन आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी दल ने मिलने का समय नहीं मांगा। फिर पुलिस ने बताया कि राहुल के नेतृत्व में सांसद ज्ञापन देना चाहते हैं। आयोग के अनुसार, संसद एनेक्सी में 240 सांसदों के साथ बैठक का प्रस्ताव था। ये असामान्य था। मौके पर वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन देने का प्रस्ताव सांसदों ने नहीं माना।
नीट छात्रा की मौत का दोषी नहीं खोज पाई सीबीआई
प्रभात खबर के अनुसार राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित मुन्ना चक के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के चर्चित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की जांच बेनतीजा साबित हुई है. सीबीआइ न तो छात्रा की मौत का कारण खोज पायी और न ही किसी दोषी की पहचान कर सकी. जांच एजेंसी ने मंगलवार को पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट (अंतिम रिपोर्ट) दाखिल कर दी. अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद ने बताया कि सीबीआइ ने अदालत को सूचित किया है कि मामले में किसी के भी खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है. इस चर्चित मामले की अगली सुनवाई अब 13 अक्तूबर को होगी, जिसके लिए अदालत ने सूचक (पीड़िता के पिता) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. मालूम हो कि इसी साल छह जनवरी को एक हॉस्टल के बंद कमरे में छात्रा बेहोश मिली थी. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
बिहार के 34 लाख रसोई गैस उपभोक्ताओं का कलेक्शन ब्लॉक
प्रभात ख़बर के अनुसार पेट्रोलियम कंपनियों ने इ-केवाइसी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं के एलपीजी कनेक्शन को एक अक्तूबर से ब्लॉक करना शुरू कर दिया है. इनमें वे उपभोक्ता भी शामिल हैं, जिनके पास नियमानुसार दो कनेक्शन रखने की पात्रता है. बिहार में लगभग 2.28 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं में लगभग 34 लाख ने अब तक इ-केवाइसी नहीं करायी सामने आ रही है. है. ऐसे उपभोक्ताओं को ऑनलाइन गैस सिलिंडर बुकिंग कराने के बाद कनेक्शन बंद होने की जानकारी मिल रही है. वहीं, खुले बाजार में एक हजार रुपये के आसपास कीमत वाला घरेलू गैस सिलिंडर 1300-1400 रुपये तक में मिलने की शिकायत सामने आ रही है।
GST दफ्तर मैं निगरानी की रेड: असिस्टेंट कमिश्नर और ऑपरेटर गिरफ्तार
भास्कर के अनुसार राज्य कर वाणिज्य कर कार्यालय बेगूसराय में मंगलवार को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते सहायक कर आयुक्त प्रकाश चंद्र मोहन और डेटा ऑपरेटर संतोष कुमार झा को निगरानी टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान जैसे ही निगरानी की भनक लगी, डाटा ऑपरेटर ने घबराकर रिश्वत की रकम खिड़की से बाहर फेंक दी। हालांकि, बाहर तैनात निगरानी टीम मैं खिड़की के नीचे से रकम बरामद कर ली। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार कारोबारी ज्योति कुमार को करीब 3.84 लाख रुपए का जीएसटी नोटिस मिला था। कारोबारी ने नियमित तौर पर टैक्स जमा करने की बात कही तो उनसे नोटिस का मामला सुलझाने के बदले ₹50000 की घूस मांगी गई थी। फिर इसे कम कर ₹25000 किया गया था।
चिराग के विधायक पर कमीशन मांगने के मामले में एफआईआर
सीवान के आंदर प्रखंड कार्यालय भवन के निर्माण में 3 प्रतिशत कमीशन मांगने और काम रुकवाने के आरोप में दरौली के लोजपा (रामविलास) विधायक विष्णु देव पासवान समेत तीन लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज हुई है। याद रहे कि लोजपा (आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान हैं। 15-20 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। ठेकेदार विवेक कुमार सिंह की शिकायत पर आंदर थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की है। पुलिस ने विधायक के प्रतिनिधि अमित कुमार पासवान और साहेब हुसैन को सोमवार को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, साहेब हुसैन पहले से लूट के मामलों में आरोपी है। वह हाल ही में जमानत पर बाहर आया था।
₹1550 रुपए का डस्टबिन स्वास्थ्य विभाग में ₹15000 में खरीदा गया?
हिन्दुस्तान के अनुसार पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सरकारी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के उपकरणों की खरीद में हुए घोटाले को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने कौशलेश कुमार की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दायर कर अर्जी में उठाये गये सवालों का जबाब देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 19 नवंबर तय की। आवेदक की ओर से वरीय अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया कि बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) ने राज्य के सरकारी अस्पतालों के लिए 75 और 45 लीटर के माइक्रोवेव डस्टबिन और उसमें कचरा रखने के लिए 75 और 45 लीटर के बायोडिग्रेडेबल बैग की आपूर्ति के लिए निविदा जारी की थी। निविदा लखनऊ की कंपनी एसएस मेडिकल सिस्टम को दी गई। उनका कहना था कि 75 लीटर वाला एक माइक्रोवेव डस्टबिन की खरीद 15,490 रुपये में की गई जबकि बाजार में इसकी कीमत मात्र 1,550 रुपये है। वहीं 45 लीटर वाला डस्टबिन 11,474 रुपये में खरीदा गया, जबकि बाजार में उसकी कीमत 1,162 रुपये है। उनका यह भी कहना था कि 75 लीटर का बायोडिग्रेडेबल बैग 98 रुपये में खरीदा गया, जबकि सामान्य कीमत साढ़े आठ रुपये है। 45 लीटर का बैग 69 रुपये में खरीदा गया, जबकि वास्तविक कीमत पौने छह रुपये है। जून 2024 से 18 अप्रैल 2026 के बीच 57 ऑर्डर जारी कर खरीद की गई। इस निविदा में सात कंपनियों ने भाग लिया था।
कुछ और सुर्खियां:
- फिजिक्स का नोबेल प्राइज ब्रह्मांड से जुड़े रहस्याओं (घोस्ट पार्टिकल) का रास्ता खोजने के लिए बेल्जियम में जन्मे 83 वर्षीय वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को मिला
- मशहूर ब्रिटिश लेखक और पूर्व राजनेता जैफ्री आर्चर का 86 साल की उम्र में लंदन में निधन
- बिहार के 21 जिलों की 546 पंचायतें टीबी मुक्त पंचायत घोषित
- मोतिहारी के रघुनाथपुर इलाके में मेड इन पाकिस्तान चादर बेचने का दो युवकों पर आरोप, दोनों लापता
अनछपी: यह बात दिलचस्प है कि सुप्रीम कोर्ट को यह लगता है कि जिन लोगों ने दल बदल किया उन्होंने एक संवैधानिक पाप किया है। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत की बेंच ने शिवसेना के भीतर हुए ऐतिहासिक राजनीतिक विभाजन और चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में एक पार्टी से चुनाव जीतकर दूसरी पार्टी में शामिल होने का अजीब सिलसिला चल रहा है हालांकि दल बदल ना हो इसके लिए एक कानून भी बना है लेकिन चूंकि उसमें दो तिहाई सदस्यों को दलबदल की अनुमति दी जाती है इसलिए यह कानून बहुत प्रभावी नहीं रह गई। दूसरी बात यह भी है कि इस कानून को लागू भी नहीं किया जाता क्योंकि कई बार यह देखा गया है कि निर्धारित संख्या से कम लोगों ने दल बदल किया फिर भी विधानसभा अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की और यह इस बात का निर्भर करता है कि सरकार किसकी है। अगर पार्टी बदलने वाले लोग सरकार की पार्टी में शामिल हो रहे हैं तो सदन के अध्यक्ष उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते और मामला अदालत तक जाते-जाते इतना समय बीत जाता है कि फिर कार्रवाई का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। इसके अलावा कई लोग ऐसे भी है जो सीधे दल बदल नहीं करते बल्कि चुनाव जीत कर सरकार की पार्टी में शामिल होने के लिए इस्तीफा देते हैं और फिर दोबारा चुनकर आ जाते हैं। इसलिए इस तरह की हरकत को संवैधानिक पाप कहना बिल्कुल सही है लेकिन इस की सजा कब मिलेगी? हम इस बात की चर्चा इसलिए कर रहे हैं कि चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत की बेंच ने शिवसेना के भीतर हुए ऐतिहासिक राजनीतिक विभाजन और चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है।
136 total views