पंद्रह साल में कम हुई बिहार में आबादी की दर, कानून की जरूरत नहींः नीतीश

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
पिछले पंद्रह सालों में बिहार में बिना कानून बनाये आबादी की दर एक प्रतिशत कम हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को पटना में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि बिहार में 2006 के आसपास प्रजनन दर 4 प्रतिशत के आसपास थी, आज यह घटकर 3 प्रतिशत से कम हो गयी है। इस तरह बिहार में बिना कानून बनाये पिछले पंद्रह सालों में आबादी की दर कम हुई है।
मुख्यमंत्री ने चीन का उदाहण देते हुए पूछा कि वहां की क्या स्थिति है। चीन पहले एक और फिर दो बच्चों की नीति पर आया और अब क्या हो रहा है।
’दैनिक भास्कर’ के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जनसंख्या नियंत्रण कानून के पक्ष में नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार गवाह है कि शिक्षा और इससे आयी जागृति से प्रजनन दर अपने आप घटती है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि 2040 तक प्रजनन दर काफी कम हो जाएगी।
श्री कुमार ने बताया कि इंटरमीडिएट तक शिक्षा पायी बिहार की महिलाओं में प्रजनन दर 1.6 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 1.7 प्रतिशत है। पहले इस समूह में यह प्रजनन दर 2 प्रतिशत था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनसंख्या नियंत्रण अपनी राय तब बतायी जब पत्रकारों ने ’जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने उनसे उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित जनसंख्या कानून पर राय मांगी। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य अगर कानून बनाते हैं तो यह उनकी मर्जी है।
दूसरी तरफ राज्य में नीतीश सरकार की बड़ी सहयोगी पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने यूपी की जनसंख्या प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण नीति का समर्थन करते हुए इसे प्रोत्साहित करने की जरूरत बतायी है।

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