कोसी नदी के तटबन्ध पर बेसहारा रह रहे लोगों ने पटना में सुनाई बिपदा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना।
कोसी नवनिर्माण मंच ने रविवार को ए.एन. सिन्हा संस्थान के सेमिनार हाल में कोसी के इलाके में तटबन्ध पर रह रहे लोगों की परेशानियों पर ‘बातचीत’ आयोजित की। इस बातचीत में उस क्षेत्र के बुनियादी सवालों पर चर्चा हुई। मंच के अध्यक्ष महेंद्र यादव ने मेहमानों का परिचय कराया और तटबन्ध के लोगों की समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया। सामाजिक कार्यकर्ता निशा झा ने सामाजिक समस्याओं के प्रति सरकार और जनता की ज़िम्मेदारियों पर चर्चा की।
श्री विनोद ने आधार पत्र पढ़कर सुनाया।
सुपौल के इंद्र नारायण सिंह 33 साल तक सेना में काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कोसी के इलाके में जन्मा हूँ। इसलिए कोसी नवनिर्माण मंच के काम से जुड़ा रहता हूँ।
इस कार्यक्रम में सुपौल, सहरसा, भागलपुर और अन्य जगहों से लोग आए थे।
सोनवर्षा से आईं राजकुमारी देवी ने बताया कि 4-5 बार 291 लोगों का घर कटा। 6000 रुपये देने का किया गया सरकारी वादा भी पूरा नहीं हुआ।

सिसौली पंचायत, मरौनासुपौल से आये योगेंद्र मंडल ने कहा कि कलक्टर साहब को बताया कि घर कट रहे हैं तो डीएम साहब ने एसडीओ को सूचना दी। इसके बाद एसडीओ ने फोन कर कहा कि नेता बनते हो। हम बेघर इधर उधर खेतों में किसी तरह शरण लिए हुए हैं।
मोहम्मद सदरुल ने कहा कि 60 साल से घर-डर बहता है। कोसी नवनिर्माण मंच की तरफ से काफी संघर्ष किया। आदमी मरे या बकरी मरे, कोई पूछने वाला नहीं है।
सोनवर्षा के 3 नम्बर वार्ड सदस्य सुतिहार ने बताया कि 154 लोगों का घर बह गया मगर इतने दिन गुज़रने के बाद कोई मदद नहीं मिली। पूरा वार्ड कटकर कई हिस्सों में बंट गया। जिसके पास जमीन नहीं है उसके लिए कोई सहारा नहीं है। डीएम साहब के पास भी गए लेकिन उनका तबादला हो गए। नये डीएम ने भी कुछ नहीं किया।
सुपौल ज़िले की तेलवा पंचायत के बसबिट्टी गांव के मोहम्मद जफीर ने कहा कि कहीं घर नहीं, तटबन्ध पर रहे हैं। अब सरकार कह रही है कि वहां से हटो, फोर लेन बनेगा। हमारे पास खाने के पैसे नहीं, घर के लिए जमीन कहाँ से खरीदेंगे।
सुपौल ज़िले की दुबीयाही पंचायत के पूर्व सरपंच आलोक राय ने कहा कि 44 साल की उम्र में 5 बार घर गंवा चुके हैं। 1995 के बाद कोई मास्टर सरकारी स्कूल में आने को तैयार नहीं। आवेदन देते हैं मगर सुनवाई नहीं होती। हॉस्पिटल नहीं है।
कहा गया था कि मकान के बदले मकान और खेत के बदले खेत दिया जाएगा मगर मिला कुछ नहीं।

वरिष्ठ आंदोलनकारी भुवनेश्वर ने कहा कि कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार के लुप्त होने के कारण तटबन्ध पीड़ितों को मिलने वाले मुआवज़े नहीं मिल रहे।

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