छपी-अनछपी: पुलिस कस्टडी में अतीक-अशरफ का मर्डर, नीतीश बोले- केजरीवाल हमारे साथ इसलिए कार्रवाई

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पूर्व सांसद और गैंगस्टर अतीक अहमद और भाई अशरफ की यूपी पुलिस की कस्टडी में मर्डर की खबर सभी अखबारों की सबसे चर्चित खबर है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल उनके साथ बैठे इसलिए उन पर सीबीआई की कार्रवाई हुई है। इस बयान को भी काफी तवज्जो दी गई है। पुलवामा में सीआरपीएफ को केंद्र में क्यों नहीं उपलब्ध कराए थे विमान? कांग्रेस के इस सवाल को जागरण ने अच्छी जगह दी है।

जागरण की सबसे बड़ी सुर्खी है: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की देर रात गोली मारकर हत्या। हिन्दुस्तान ने लिखा है: अतीक और अशरफ भी मारे गए। भास्कर की मेन हेडलाइन है: प्रयागराज का जो इलाका अतीक के खौफ का गढ़ था, वहीं भाई के साथ पुलिस कस्टडी में मारा गया। अखबारों के अनुसार इलाहाबाद में शनिवार रात सनसनीखेज घटनाक्रम में उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस कस्टडी में चल रहे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना रात 10:37 बजे हुई। दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गया था। तभी मीडियाकर्मी बनकर आए तीन युवकों ने अतीक और अशरफ के सिर पर गोली मार दी। पुलिस ने हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया।

निर्दल विधायकी से राजनीति

अतीक अहमद ने 1989 में इलाहाबाद शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। तब अतीक ने कांग्रेस उम्मीदवार गोपालदास को हराया था। इस विधानसभा क्षेत्र से ही 1991 में अतीक अहमद ने भाजपा प्रत्याशी रामचन्द्र जायसवाल को हराया था। 1993 में फिर इसी सीट से निर्दलीय अतीक अहमद ने भाजपा के तीरथराम कोहली को हराया। 1996 के चुनाव में सपा के टिकट पर अतीक ने भाजपा के तीरथराम कोहली को फिर शिकस्त दी। 2002 में अतीक अहमद ने अपना दल से इसी सीट से सपा के गोपालदास यादव को हराया। 2004 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर से सांसद बनने के बाद विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।

पूरे यूपी में धारा 144

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी, एडीजी सहित बड़े अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। घटना के वक्त वहां मौजूद 17 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही मामले की न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। गाजियाबाद, नोएडा समेत पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू है।

बेटे के जनाजे पर सवाल था…

अतीक और अशरफ पुलिसवालों के साथ जा रहे थे और मीडियाकर्मी उनसे लगातार सवाल कर रहे थे। कुछ मिनट तक दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। मीडियाकर्मी द्वारा बेटे के जनाजे में शामिल न हो पाने को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देने के लिए अतीक थोड़ा रुका और बोला- नहीं ले गए, तो नहीं गए। इसके तुरंत बाद अशरफ बोला- जहां तक गुड्डू मुस्लिम का…। तभी हमलावरों ने अतीक के सिर में पिस्तौल सटाकर गोलियां मार दी। इसके बाद अशरफ को भी गोली मार दी। इसके तुरंत बाद कई राउंड फायर किए गए। अतीक और अशरफ वहीं ढेर हो गए।

हमलावरों पर पुलिस ने गोली नहीं चलाई

अतीक-अशरफ का मर्डर करने वालों ने पिस्तौल से गोलियां दागीं लेकिन पुलिस ने उनपर कोई जवाबी गोली नहीं चलाई। गोली मारने के बाद हमलावरों ने सरेंडर कर दिया तो पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके नाम सनी, लवलेश, अरुण मौर्य बताए गए हैं। तीनों मीडियाकर्मी बनकर आए थे। अतीक और अशरफ पांच दिन की पुलिस रिमांड पर थे। शुक्रवार को उनसे एटीएस ने पूछताछ की थी।

यूपी में अपराध की पराकाष्ठा: अखिलेश

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अतीक-अशरफ के डबल मर्डर के बारे में अपने बयान में कहा की उत्तर प्रदेश में अपराध की पराकाष्ठा हो गई है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जब पुलिस के सुरक्षा घेरे के बीच सरेआम गोलीबारी करके किसी की हत्या की जा सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या। इससे जनता के बीच भय का वातावरण बन रहा है, ऐसा लगता है कुछ लोग जानबूझकर ऐसा वातावरण बना रहे हैं।

केजरीवाल पर कार्रवाई और नीतीश

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी सुर्खी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान है: साथ बैठे, इसलिए केजरीवाल पर कार्रवाई। हिन्दुस्तान ने लिखा है: केजरीवाल हमारे साथ आए तो उनपर कार्रवाई हो रही: नीतीश। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में पूछताछ के लिए सीबीआई मुख्यालय बुलाने के सवाल पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी (केजरीवाल की) काफी इज्जत है। “विपक्षी एकता को लेकर कांग्रेस और अन्य दलों से बैठकर बात हो गई है। अरविंद केजरीवाल भी हमलोगों के साथ बैठे थे, अब उनपर कार्रवाई हो रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपलोग तो जानते ही हैं कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ क्या-क्या काम हो रहा है। सभी विपक्षी लोगों ने अपने-अपने इलाके के के लिए काफी काम किया है। इस बीच केजरीवाल ने कहा है कि वह झूठे साथ पेश करने के लिए आईडी व सीबीआई पर केस करेंगे।

पुलवामा में सीआरपीएफ

जागरण की खबर है पुलवामा में सीआरपीएफ को केंद्र ने क्यों नहीं उपलब्ध कराए थे विमान: कांग्रेस। अख़बार लिखता है कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल पद से स्थानांतरित किए जाने के बाद से लगातार सनसनीखेज बयान देने वाले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के नए बयान ने कांग्रेस को केंद्र सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया। कांग्रेस ने पुलवामा हमले को लेकर केंद्र से पूछा है कि पुलवामा में जवानों को विमान क्यों नहीं मुहैया कराए गए और उन्हें सड़क मार्ग से क्यों जाने दिया गया जबकि जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों की ओर से सुरक्षाबलों पर हमले की खुफिया इनपुट लगातार मिल रहे थे। श्री मलिक ने एक इंटरव्यू में यह दावा किया था कि सीआरपीएफ के जवानों को यदि विमान दे दिए गए होते तो पुलवामा की घटना नहीं होती। उनके अनुसार जवानों को ले जाने के लिए 5 विमान गृह मंत्रालय से मांगे गए थे जो नहीं दिए गए।

दो बेटियों की हत्या

जागरण की सुर्खी है: वैशाली में ऑनर किलिंग दो बेटियों की गला दबाकर हत्या। हिन्दुस्तान ने लिखा है: इज्जत की चिंता में दो बेटियों को गला दबाकर मार डाला। वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र के मणि भकुरहर गांव में इज्जत की चिंता में मां ने दो बेटियों को गला दबाकर मार डाला। घटना शनिवार सुबह की है। इस मामले में पुलिस ने मां रिंकू देवी को गिरफ्तार कर लिया है। उसने अपना जुर्म कबूल लिया है। मृत बेटियों में 14 वर्षीया रौशनी कुमारी एवं 12 वर्षीया तन्नु कुमारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि माता-पिता ने मिलकर घटना को अंजाम दिया है। जानकारी के अनुसार प्रेम-प्रसंग मामले को लेकर दोनों बेटियों से माता-पिता परेशान रहते थे।

कुछ और सुर्खियां

  • जापान के प्रधानमंत्री की फुमियो किशिदा पर फेंका बम, बाल-बाल बचे
  • 13 भाषाओं में अर्धसैनिक बलों में कॉन्स्टेबल भर्ती की परीक्षा होगी
  • पूर्वी चंपारण में संदिग्ध परिस्थिति में 11 और लोगों की मौत
  • जेल मैनुअल बदला, जल्दी हो सकती है आनंद मोहन की रिहाई
  • भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोक्षी को भारत लाना हुआ मुश्किल
  • एक और तख्तापलट की ओर सूडान, भारत ने जारी की एडवाइजरी

अनछपी: “अतीक और अशरफ मारे गए।” अखबारों ने पुलिस कस्टडी में इस हत्या की ऐसी सुर्खी लगाई है मानो यह मर्डर नहीं कुपोषण से हुई मौत है। आज के मीडिया ने देश के कानून की इज्जत को मिट्टी में मिलाने का काम कोई पहली बार नहीं किया है। भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है इस बात की याद दिलाने की बजाय मीडिया में इस बात का जश्न मनाया जाता है कि किसका मर्डर कैसे हुआ। अदालत के इंसाफ से बाहर ऐसी हत्याओं का जश्न मनाने के लिए आम लोगों के मानस को तैयार करने में मीडिया का सबसे बड़ा रोल माना जा सकता है। किसी भी माफिया डॉन को अदालती कार्रवाई से सजा दिलवाने पर क़ानून का जश्न मनाना तो समझ में आने वाली बात है लेकिन कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सरेआम मर्डर को कानून से चलने वाला कोई देश कैसे स्वीकार कर सकता है? उत्तर प्रदेश में अराजक स्थिति के बारे में शायद ही किसी संपादक ने पिछले कई वर्षों में कुछ भी लिखा हो। यह हत्या अगर बिहार में होती तो अब तक बिहार को कितनी बदनामी झेलनी पड़ती, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हिंदी के बड़े संपादकों ने आम लोगों के बीच कानून अपने हाथ में लेकर मर्डर करने के रवैया को बढ़ावा दिया है, इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। इस डबल मर्डर के बारे में एक अहम बात यह भी है कि अतीक ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई थी तो कोर्ट का कहना था कि राज्य उनकी सुरक्षा का ख्याल रखेगा। क्या सुप्रीम कोर्ट अब राज्य से यह सवाल करेगी कि उसने उन दो हत्या अभियुक्तों की सुरक्षा का ख्याल क्यों नहीं रखा? देश की आम जनता को आज नहीं तो कल यह सोचना होगा कि देश में अपराधियों का इलाज कानून करेगा या अपराधियों को अपराधी मारेंगे और पुलिस मुठभेड़ दिखाया जाएगा? यह काम मुश्किल जरूर है लेकिन बहुत जरूरी है।

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