बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। घूसखोरी जीवन का अभिन्न हिस्सा है या नहीं? इस सवाल पर विचार कीजिए और फिर आज के अखबारों में छपी वह खबर पढ़िए जिसमें बताया गया है कि पूर्व मध्य रेलवे के तीन बड़े अफसरों को सीबीआई ने घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। एक तरफ इतने पैसे कि सीबीआई को कार्रवाई करनी पड़े तो दूसरी तरफ पैसों की इतनी किल्लत कि संसद में मंदी पर चर्चा करनी पड़ रही है। पैसों की किल्लत इस बात पर निर्भर नहीं होती कि आपके पास कितने कम पैस हैं बल्कि उन पैसों की बाजार में कीमत क्या है, यानी महंगाई कितनी है। और यही पैसे है जिनके लिए हत्याएं हो जाती हैं जिसका एक उदाहरण फुलवारी शरीफ में सास-बहू की हत्या है। इसकी खबर भी प्रमुखता से छपी है।
हिन्दुस्तान की हेडलाइन हैः पूमरे के तीन अफसर समेत पांच घूसखोरी में गिरफ्तार। इसमें बताया गया है कि माल ढुलाई के रैक आवंटन में गड़बड़ी के मामले में सीबीआई की कार्रवाई के दौरान 46.5 लाख रुपये बरामद किये गये हैं। इसमें मुख्य माल परिवहन प्रबंधक संजय कुमार, समस्तीपुर के सीनियर डिविजनल आॅपरेटिंग मैनेजर रूपेश कुमार और वरीय मंडल परिचालन प्रबंधक सचिव सनि मिश्रा शामिल हैं। तीनों इंडियन रेलेव ट्रैफिक सर्विस के अफसर हैं।
प्रभात खबर ने सुर्खी दी हैः सीबीआई ने बिहार में रेलेव के 3 बड़े अफसरों को किया गिरफ्तार। भास्कर की हेडलाइन हैः कोलकाता की कंपनी से हर महीने घूस लेते थे रेल अफसर, 5 गिरफ्तार।
जागरण की सबसे बड़ी खबर हैः भारत में मंदी आने का कोई सवाल नहीं, बेहतर हैं हालातः सीतारमण। यह खबर बाकी जगह भी प्रमुखता से छपी है।
भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी खबर हैः फुलवारी मे लूट का विरोध करने पर कारोबारी की पत्नी व सास की हत्या। यह घटना उफरपुरा वी प्वाइंट की है। यहां 75 साल की मानती देवी और उनकी 50 साल की बेटी पूनम झा को धारधार हथियार से मार डाला गया। पूनम के पति बेकरी कारोबारी हैं। हिन्दुस्तान अखबार में एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों का बयान है कि कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन बाकी अखबारों में इसका कारण लूटपाट का विरोध बताया गया है। हत्यारे ग्राहक बनकर आये थे और घटना के बाद सीसीटीवी का डीवीआर भी लेते गये।
शिव सेना नेता संजय राउत को ईडी द्वारा रिमांड पर लेने का संसद से सदन तक विरोध किये जाने की खबर प्रमुखता से छपी है।
अनछपीः फुलवारी शरीफ में लूटपाट और हत्या की घटनाएं पटना पुलिस कप्तान के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इस साल फुलवारी में ऐसी घटनाओं की संख्या पर पुलिस मुख्यालय को ध्यान देना चाहिए। फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में नयी बस्तियां बसी हैं और यहां की आबादी बढ़ रही है। उस लिहाज से पुलिस की गश्ती नहीं बढ़ी है। इस इलाके में एम्स जैसे महत्वपूर्ण अस्पताल हैं। आसपास की बस्तियों में कई और शिक्षण संस्थान खुले हैं। इसके बावजूद पुलिस की निष्क्रियता की शिकायत आये दिन मिलती रहती है। पुलिस के लिए दूसरा सिरदर्द इस इलाके में जमीन की दलाली है। इस दलाली में पुलिस के दलालों की भी मिलीभगत बतायी जाती है। नतीजा यह है कि पुलिस अपने काम पर उस तरह ध्यान नहीं देती कि ऐसी घटनाएं रुके।
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