छ्पी-अनछपी: मोदी की बात अब मुजरा तक पहुंची, गुजरात के गेम ज़ोन में आग से 30 की मौत

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम आए दिन कोई न कोई विवाद जुड़ जाता है। शनिवार को उन्होंने बिहार की अपनी एक सभा में मुजरा शब्द का इस्तेमाल किया जिसको लेकर काफी विवाद हुआ है। गुजरात के राजकोट में एक गेम जोन में आग लगने से 30 लोगों की मौत हो गई। वोटिंग बढ़ाने की तमाम कोशिशों के बावजूद बिहार में लोकसभा चुनाव के छठे फेज में केवल 55.45 प्रतिशत वोटिंग ही हो पाई। आज के अखबारों की यह अहम सुर्खियां हैं।

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी सुर्खी नरेंद्र मोदी का बयान है: वोट के लिए लालटेन लेकर मुजरा करने वाले नहीं कर रहे बिहारी के अपमान का विरोध। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाटलिपुत्र, काराकाट और बक्सर लोकसभा सीटों के लिए आयोजित चुनावी सभा में कहा कि वोट बैंक की खातिर लालटेन लेकर कांग्रेस के सामने मुजरा करने वाली जमात पंजाब में बिहारी के अपमान का विरोध नहीं कर रही। “कांग्रेस वहां बिहार के मेहनतकश भाइयों को भगाने की बात कर रही है, जमीन व मकान नहीं लेने देने का कह रही है। बिहारी का अपमान मोदी नहीं होने देगा।” उन्होंने कहा कि बिहार के शहजादे 4 जून के बाद हेलीकाप्टर से उतर जाएंगे। “उनका समय अमानत व जमानत की चिंता में बीतेगा। देश के सारे शहजादों का शटर गिरने वाला है। दिल्ली के शहजादे अब छुट्टी जाने की तैयारी में है। यूपी के शहजादे की साइकिल बार-बार पंक्चर हो रही है।” मोदी शनिवार को पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के बिक्रम, काराकाट के डेहरी और बक्सर के अहिरौली में एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में सभा को संबोधित कर रहे थे।

भास्कर ने लिखा है कि मुस्लिम आरक्षण से शुरू हुई बात अब मुजरा तक पहुंच गई। मोदी ने कहा, “मैं इस प्रदेश की भूमि पर यह घोषणा करना चाहता हूं कि मैं एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों को लूटने और उन्हें मुसलमान को देने की इंडिया गठबंधन की योजनाओं को विफल कर दूंगा। वे गुलाम बने रह सकते हैं और अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए मुजरा कर सकते हैं।”

गुजरात में आग से 30 की मौत

भास्कर की खबर है: बच्चों की मौत का गेम ज़ोन, 30 जिंदा जले।  गुजरात के राजकोट में शनिवार शाम 5:00 बजे टीआरपी गेम जोन में भीषण आग लगने से 30 लोगों की मौत हो गई जिसमें कई बच्चे शामिल हैं। राजकोट शहर के कालावड रोड स्थित टीआरपी गेम जोन में जिस वक्त आग लगी, वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि 30 सेकंड में ही आग ने विकराल रूप ले लिया। फायर ब्रिगेड की 8 टीमें करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझा पाईं। प्रशासन ने कहा कि मृतकों के शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उन्हें पहचानना मुश्किल है। इसके लिए डीएनए करने की जरूरत पड़ेगी। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है की एंट्री फीस ₹500 की जगह ₹99 करने से वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

बिहार में 55.45% मतदान

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है कि बिहार में लोकसभा चुनाव के छठे चरण में भी 60 फीसदी के पार मतदान नहीं जा पाया। शनिवार को इस चरण की आठ संसदीय सीटों पर 55.45 फीसदी मतदान हुआ। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इन आठ सीटों पर मतदान प्रतिशत 58.47 फीसदी था। इस बार, इन सीटों पर मतदान प्रतिशत में करीब तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी। सबसे अधिक पश्चिम चंपारण में 59.75तो सबसे कम गोपालगंज (सुरक्षित) में 50.70 फीसदी मत पड़े।

पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा वोटिंग

प्रचंड गर्मी के बीच शनिवार को लोकसभा चुनाव के छठे चरण में दिल्ली, हरियाणा समेत छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 58 सीटों पर मतदान हुआ। इन सीटों पर कुल 60.73 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई। रात 11 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कुल 56.94 जबकि हरियाणा में 59.51 वोट पड़े। वर्ष 2019 में दिल्ली में 60.52 फीसदी और हरियाणा में 70.45 फीसदी मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 78.20 जबकि यूपी में सबसे कम 54.03 मतदान दर्ज किया गया।

देश में बदल रही सरकार: खेड़ा

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया व प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने दावा किया कि देश में सरकार बदल रही है। पांच चरणों में ही देश भर में कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन को 272 से अधिक सीटें मिल चुकी हैं। अन्य चरणों के चुनाव में इंडिया गठबंधन को सीटें बोनस मिलेंगी। बदलाव की आंधी चल रही है। शनिवार को खेड़ा कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रेस को संबोधित कर रहे थे। भाजपा के 400 पार के नारे पर कहा कि भाजपा को 200 से भी कम सीटें आएंगी।

आईपीएल का फाइनल आज

आईपीएल के 17वां संस्करण के खिताबी मुकाबले का वक्त आ गया है। रविवार को यहां के एम.ए चिदम्बरम स्टेडियम में क्रिकेट के कुशल रणनीतिकार गौतम गंभीर के कोलकाता के सामने आक्रामक बल्लेबाजी की नई परिभाषा गढ़ने वाले पैट कमिंस के हैदराबाद की चुनौती होगी। दोनों टीमों की टक्कर पहले क्वालीफायर में हुई थी जिसमें केकेआर ने सनराजइर्स को हराया था। हैदराबाद की टीम उसका बदला लेना चाहेगी।

कुछ और सुर्खियां

  • हज के मुबारक सफर पर मदीना के लिए रवाना हुए 365 जायरीन
  • सोमवार तक चढ़ेगा बिहार में पारा, 28 मई से मिलेगी गर्मी से हल्की राहत
  • चक्रवर्ती तूफान रेमल की वजह से कोलकाता में कई उड़ानें रद्द, पटना-कोलकाता -पटना की दो फ्लाइट भी शामिल
  • छपरा की चुनावी हिंसा पर सारण के कमिश्नर और डीआईजी की रिपोर्ट चुनाव आयोग को मिली, कई अक्षरों पर गिर सकती है गाज
  • कोलकाता निवासी अनसूया सेनगुप्ता कान फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं

अनछपी: भारत में इंसानी जान की कीमत कितनी कम है, कल इसका एक उदाहरण गुजरात के राजकोट में देखने को मिला जहां एक गेम जोन में आग लगने से 30 लोगों की मौत हो गई। यहां यह याद दिलाना जरूरी है कि 2022 में गुजरात के ही मोरबी में ही एक पुल के गिरने से लगभग डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई थी। गुजरात पर जोर देना इसलिए जरूरी है कि यह एक विकसित राज्य माना जाता है और यहां नियम कानून के ज्यादा पालन की उम्मीद की जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जब भी चर्चा होती है तो गुजरात मॉडल की चर्चा होती है यानी गुजरात से बाकी देश सीख सकता है। मगर अफसोस की बात है कि गुजरात में ही ऐसे हादसे हो जाते हैं जो कुछ सवाल खड़े करते हैं। सबसे पहला सवाल तो यही है कि क्या सुरक्षा के लिए जो जरूरी शर्तें होती हैं उन्हें पूरा किया जाता है? अखबारों की रिपोर्ट के अनुसार जिस गेम जोन में यह दर्दनाक हादसा हुआ वहां फायर की एनओसी नहीं ली गई थी। आखिर फायर के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिए बिना वह गेम जोन कैसे चल रहा था? इस तरह नियमों का उल्लंघन बिहार और उत्तर प्रदेश में तो आम माना जाता है लेकिन क्या गुजरात में भी ऐसा होना आम बात है? तो आखिर किस बात पर गुजरात मॉडल का नाम लिया जाता है? दूसरी बात यह है कि गुजरात में इतना दर्दनाक हादसा हो गया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बाकी नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने के अलावा क्या किया? उम्मीद की जानी चाहिए कि उन्होंने राजकोट में अधिकारियों और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से राहत के बारे में जरूर बात की होगी। लेकिन क्या इस बात की भी उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री अपने चुनावी दौरे को रद्द कर राजकोट जाते और वहां पीड़ितों से मिलते और राहत कार्यों का जायजा लेते? यही काम विपक्ष के नेता भी कर सकते थे। लेकिन शायद भारतीय राजनीति में आम इंसानों की जान की कीमत इतनी नहीं कि नेता अपना चुनावी द्वारा रद्द करें और लोगों का हाल-चाल पूछने वहां पहुंचें। हम जब यह बातें लिख रहे थे तो दिल्ली में भी 6 बच्चों की मौत की खबर आ रही थी। भारतीय समाज को इस बात पर गंभीर चिंतन करना चाहिए कि क्या हम आम आदमी की जान को सही सम्मान देते हैं?

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