छपी-अनछपी: नीतीश ने फिर छेड़ी भाजपा मुक्त भारत की बात, कांग्रेस को महागठबंधन में सम्मान चाहिए

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जदयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद इसके खुले अधिवेशन की खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है जिसमें नीतीश कुमार ने भाजपा मुक्त भारत की बात एक बार फिर दोहराई है। कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश कुमार सिंह के पद ग्रहण समारोह की खबर भी अखबारों में प्रमुखता से ली गई है जिसमें उन्होंने महागठबंधन में सम्मान की बात की है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शॉर्टकट की राजनीति के खिलाफ बयान दिया है जिसे अखबारों ने पहले पेज पर जगह दी है।

जागरण की पहली सुर्खी है: विपक्ष एकजुट हो देश को करे भाजपा मुक्त। भास्कर ने लिखा है: बोले नीतीश- विपक्ष के लोग मेरी बात मानें तो भाजपा की हार तय। हिन्दुस्तान ने लिखा है: देश में विपक्ष की एकजुटता को और विस्तार देंगे: नीतीश। नीतीश कुमार ने इस अधिवेशन में कहा कि विपक्षी दल एकजुट हो जाएंगे तो 2024 के चुनाव में भारी मतों से जीतेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्षी पार्टी हमारी बात नहीं मानेंगे तो इसमें हमको क्या? मेरा कोई नुकसान नहीं है। कहा कि अपने स्तर से इसके लिए कोशिश करते रहेंगे। हम थर्ड फ्रंट नहीं बल्कि मेन फ्रंट की बात कर रहे हो। गरीब राज्यों के उत्थान के लिए कोई काम नहीं हो रहा है। जिन राज्यों के विकास की बात होती है, वह तो अंग्रेजों के जमाने में भी विकसित थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि जहां वह पैदा हुए, पहले से विकसित है।
कांग्रेस को चाहिए सम्मान
आज के अखबारों में कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह का बयान भी प्रमुखता से छपा है। जागरण की सुर्खी है: कांग्रेस को उचित सम्मान और भागीदारी दें: अखिलेश। अखबार के अनुसार बिहार कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली यात्रा पर पद ग्रहण करने आए डॉक्टर अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपने तेवर से बता दिया कि कांग्रेस आने वाले समय में बिहार में आक्रामक होकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में राजद जदयू बड़े भाई की भूमिका में है। इन दो दलों की जिम्मेदारी बनती है कि कांग्रेस समेत अन्य सहयोगियों को सम्मान और उचित भागीदारी दें, तभी हम भाजपा को हराने के मकसद में कामयाब हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में समन्वय रहेगा तो भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 1 से 2 सीटों पर ही सिमट जाएगी। कांग्रेस की सीट कभी राजद लड़ जाए, कभी जदयू लड़ जाए यह ठीक नहीं, इसका ख्याल रखना होगा।

मैरेज हाल की टैक्स चोरी
हिन्दुस्तान की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: पटना में 35 मैरिज हॉल पर छापे। वाणिज्य कर विभाग के इस छापेमारी में करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। यह छापेमारी राजधानी पटना समेत राज्य के कई शहरों में विवाह भवन कामा बैंकट हॉल और मैरिज गार्डन पर की गई है। छापेमारी में कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आई है। इन्होंने कच्चे बिल पर कारोबार किया और कई स्तरों पर टैक्स की चोरी की। कच्चे बिल में राशि अधिक थी जबकि पक्की बिल में काफी कम राशि दिखलाई गई है। इस कार्रवाई के लिए 21 टीमें बनाई गई थी जिनमें 14 को पटना और शेष को दूसरे शहरों में भेजा गया।
दाखिल-खारिज की समय सीमा
हिन्दुस्तान ने खबर दी है: दाखिल-खारिज की नई समय सीमा तय की जाएगी, लंबित रखना गुनाह। हाल के दिनों में दाखिल खारिज के मामले में सीयू की मनमानी कई जगहों से सामने आई है। अखबार के अनुसार पिछले दिनों सरकार ने थोड़ी सख्ती दिखलाई तो एक अंचल अधिकारी ने एक साथ 42 मामले निष्पादित कर दिए जिसमें 36100 को अस्वीकृत कर दिया। इससे नई तरह की परेशानी खड़ी हो गई। ऐसे में सरकार ने इस मामले को व्यवस्थित ढंग से लागू करने और कारण बताने को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस बारे में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता का कहना है कि दाखिल खारिज समेत अन्य कार्यों को हर हाल में तय समय सीमा के अंदर करना होगा। यदि जानबूझकर गड़बड़ी की गई या फिर आम लोगों को परेशान किया गया तो निश्चित रूप से कार्रवाई होगी।
शॉर्टकट की राजनीति पर क्या बोले मोदी
जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान है: शॉर्टकट की राजनीति करने वालों को बेनकाब करें, ऐसे नेता देश के दुश्मन। हिन्दुस्तान की हेडिंग है: कुछ सियासी दल अर्थव्यवस्था नष्ट करने की कोशिश में: मोदी। उन्होंने यह बयान नागपुर में मुंबई समृद्धि एक्सप्रेसवे के पहले चरण का उद्घाटन करने समय दिया। उन्होंने कहा कि शॉर्टकट राजनीति से देश का विकास नहीं हो सकता प्रणाम कुछ राजनीतिक दल अर्थव्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों को ऐसे नेताओं और दलों को बेनकाब करना चाहिए।
अनछपी: राजनीति में शॉर्टकट या जीवन के किसी भी मामले में शॉर्टकट अक्सर सही नहीं होता। यह जरूर है कि जब काम शॉर्टकट से चल जाए तो उसे अपनाने पर भी गौर करना चाहिए। यहां गौर करने की बात दूसरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले रेवड़ी संस्कृति के बारे में बात कर चुके हैं यानी मुफ्त में अनाज देने या दूसरी ऐसी योजनाएं जो वोटरों को आकर्षित करती है। उनका यह कहना एक अर्थ में विरोधाभासी भी है क्योंकि खुद उनकी भारतीय जनता पार्टी ऐसे ही रेवड़ी संस्कृति से वोट पाती रही है। उज्ज्वला योजना हो या मुफ्त में अनाज देने की बात यह संस्कृति तो केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार की भी है। प्रधानमंत्री को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि अरविंद केजरीवाल यदि बिजली मुफ्त देने की बात करते हैं तो इससे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है लेकिन जब उनकी सरकारें ऐसा करती हों तो क्या उसका दुष्प्रभाव नहीं पड़ता होगा? राजनीति का यह शॉर्टकट सिर्फ अनाज मुफ्त बांटने या मुफ्त बिजली देने तक ही सीमित नहीं है। मुफ्त या रियायती दर पर तीर्थ यात्राएं कराना भी राज्य सरकारों ने शुरू कर दी है। अन्य धार्मिक योजनाएं भी उसी शॉर्टकट राजनीति का हिस्सा क्यों नहीं माना जाना चाहिए? और आखिर में यह बात की धार्मिक ध्रुवीकरण कर वोट पाना क्या उसी शॉर्टकट की राजनीति का हिस्सा नहीं है? जरूरत इस बात की है कि कोई भी नेता जब कोई नीति की बात करे तो पलट कर उससे यह जरूर पूछना चाहिए कि खुद उसका अपना आचरण कैसा है।

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