छ्पी-अनछपी: ईरान-अमेरिका में अमन या जंग? नहीं चुना सका जदयू विधायक दल का नेता

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में मंगलवार से शुरू होनेवाली वार्ता पर गहराए संकट के बादल छंटने के बावजूद यह पक्के तौर पर तय नज़र नहीं आती। जनता दल यूनाइटेड की बैठक में विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हो सका और इसके लिए नीतीश कुमार को अधिकृत किया गया है। 

और, जानिएगा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नीतीश कुमार को क्यों कहा कॉम्प्रोमाइज़्ड।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में मंगलवार से शुरू होनेवाली वार्ता पर गहराए संकट के बादल सोमवार देर रात छंटते नजर आए। तेहरान ने वार्ता में शामिल होने को लेकर अपना रुख कुछ नरम किया है, हालांकि अमेरिकी नाकेबंदी अब भी सबसे बड़ा बाधा बनी हुई है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने सोमवार को रायटर से कहा कि तेहरान इस वार्ता में भागीदारी पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहा है, लेकिन अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस्लामाबाद अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी को खत्म कराने के प्रयास कर रहा है, ताकि ईरान वार्ता में शामिल हो सके। यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि समझौता होने तक होर्मुज में नाकेबंदी जारी रहेगी।

ट्रंप के हर ऐलान से पहले शेयरों में दांव लगाकर किसने कमाए करोड़ों

भास्कर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में कई बार ऐसा देखा गया कि उनके बड़े ऐलान या सोशल मीडिया पोस्ट से ठीक पहले फाइनेंशियल मार्केट में ट्रेडिंग अचानक तेज हो गई। सरल भाषा में कहें तो आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होने से चंद मिनटों पहले ही सटीक दांव लगाकर कुछ लोगों ने करोड़ों का मुनाफा कमाया। बीबीसी की पड़ताल में यह साफ दिखता है कि कुछ खास सूचनाएं पहले ही लीक हो रही थीं, जिससे आम निवेशकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

जदयू में नहीं हो सका विधायक दल के नेता का चुनाव

प्रभात खबर के अनुसार जदयू विधानमंडल दल के नेता का चयन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे. सर्वसम्मति से यह निर्णय सोमवार को जदयू विधानमंडल दल की बैठक में लिया गया. 1 अणे मार्ग में हुई बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वे दिल्ली में संसदीय कार्य के अलावा जरूरत के अनुसार बिहार के विभिन्न इलाकों में पार्टी नेताओं के साथ घूमेंगे. अपने पार्टी के साथ सरकार के कार्यों की जानकारी लेते रहेंगे. इस बीच जदयू नेता निशांत कुमार के समर्थन में उनके आवास के बाहर पोस्टर लगाये गये हैं. इसमें लिखा है- “निशांत विधानमंडल दल का नेता बनें”, इस तरह की मांग पोस्टर के माध्यम से होने लगी है. 

उद्घाटन से एक दिन पहले रिफाइनरी में लगी आग

हिन्दुस्तान के अनुसार राजस्थान के बालोतरा में सोमवार को देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में उद्घाटन से एक दिन पहले ही आग लग गई। 40 के करीब दमकल वाहनों ने लगातार दो घंटे तक पानी की बौछारें करने के बाद आग पर काबू पाया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इसका उद्घाटन करने वाले थे। घटना के बाद उनका कार्यक्रम टाल दिया गया है।

मणिपुर में फिर हिंसा, 5 जिलों में कर्फ्यू

भास्कर के अनुसार कुछ महीनों की शांति के बाद मणिपुर की इंफाल घाटी फिर सुलग रही है। घाटी के 5 जिलों (इंफाल ईस्ट, वेस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर) में कर्फ्यू लगा है, लेकिन सड़क पर पुलिस या सुरक्षा बल नहीं, बल्कि मीरा पाइबी की महिलाओं का पहरा है। यहां मैतेई समुदाय ने पांच दिन का टोटल शटडाउन बुलाया है। सोमवार को इसका दूसरा दिन है। इंफाल के हर चौराहे, गली मोहल्लों में इन्हीं के बैरियर लगे हैं। इनकी अनुमति के बिना कोई वाहन नहीं है रहा। दुकान-बाजार, स्कूल-कॉलेज, र जगह सन्नाटा पसरा हुआ है। सरकारी दफ्तर खुले हैं, लेकिन खाली पड़े हैं, क्योंकि पूरा मैतेई समुदाय 7 अप्रैल को विष्णुपुर जिले में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों के हमले में में दो मासूम मैतेई बच्चों के मारे जाने से भड़का हुआ है। 

केजरीवाल के मामले में जज का सुनवाई से हटने से इनकार

हिन्दुस्तान के अनुसार आबकारी नीति मामले की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की मांग वाली अरविंद केजरीवाल की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दी। अब मामले में सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ही करेंगी। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि उनके बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं, यह नहीं माना जा सकता कि उनके मन में केजरीवाल के प्रति कोई पूर्वाग्रह है। पीठ की न्यायिक क्षमता का निर्णय वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी कर सकते हैं, कोई वादी नहीं। पीठ ने कहा कि यह केवल एक न्यायिक अधिकारी पर हमला नहीं हैं, बल्कि न्यायिक संस्था पर हमला है। अदालत सुनवाई से हटने का फैसला सुनाकर यह संदेश देती है कि किसी वादी के दबाव में आकर वह ऐसा कर सकती है, तो जनता के मन में यह धारणा बन जाएगी कि जज किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करते हैं।

राहुल गांधी ने नीतीश कुमार को क्यों कहा कॉम्प्रोमाइज़्ड

जागरण के अनुसार सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार की स्थिति का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वहां के पूर्व मुख्यमंत्री एवं जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार की तरह अन्नाद्रमुक के नेता भी “काम्प्रोमाइज्ड” हैं और “अन्नाद्रमुक को नियंत्रित करने वाले लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पूरी तरह से नियंत्रण में है”। अन्नाद्रमुक पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने भ्रष्टाचार के कारण भाजपा के सामने पूरी तरह सरेंडर’ कर दिया है। सोमवार को एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा बिहार में जो हुआ उसे देखिए। वहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर बीजेपी के व्यक्ति को बिठा दिया गया है, क्यों? क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री कॉम्प्रोमाइज़्ड थे। उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा और चुपचाप राज्यसभा चले गए। उनकी पुरानी करतूतों ने भाजपा को उन पर नियंत्रण करने का मौका दिया। भाजपा तमिलनाडु में भी यही करना चाहती है।

कुछ और सुर्खियां:

  • जम्मू कश्मीर के उधमपुर में बस खाई में गिरी, 21 लोगों की मौत
  • पटना का अधिकतम तापमान 40 डिग्री तक पहुंचा, पांचवीं तक की क्लास अब दोपहर 12:30 तक ही चलेंगी
  • जापान में रिक्टर स्केल पर 7.5 का भूकंप आया, सुनामी की चेतावनी
  • भारत और दक्षिण कोरिया में 16 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, 4 साल में व्यापार दुगना होगा
  • गुजरात में ढाई हजार करोड़ की धोखाधड़ी में तीन बैंक मैनेजर गिरफ्तार

अनछपी: भारत सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय, और पेट्रोलियम कंपनियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि देश में एलपीजी की कोई दिक्कत नहीं है और गैस से रसोई चलाने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। हकीकत यह है कि 28 फरवरी को ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले के लगभग 7 हफ्तों के बाद भारत में घरेलू गैस की सप्लाई की दिक्कतें बनी हुई है और इसकी मिसाल सिर्फ घरों में नहीं बल्कि कारखानों और होटलों में देखने को आसानी से मिल रही है। यह हालत तब है जबकि दो हफ्तों से जंगबंदी जारी है और होर्मुज से होकर आने वाले गैस टैंकर मोटे तौर पर भारत पहुंच भी रहे हैं। हालात कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली, नोएडा और गुजरात के इंडस्ट्रियल एरिया बंद हो रहे हैं और बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूरों को कामगारों को वहां काम नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से वह वापस अपने राज्य लौटने को मजबूर हैं। सोमवार को दिल्ली और गुजरात से लौटे कामगारों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या उनके सामने भोजन की व्यवस्था को लेकर खड़ी हुई है क्योंकि रसोई गैस या तो आसानी से मिल नहीं रही है और अगर मिल रही है तो उसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि वह उसके पैसे देने में असमर्थ हैं। रसोई के साथ-साथ गैस की किल्लत का असर फैक्ट्री पर भी पड़ा है जहां इसकी वजह से काम बंद हो रहे हैं और कामगारों को काम नहीं मिलने की वजह से बिहार वापस लौटना पड़ रहा है। कुछ कामगारों का कहना है कि उन्हें घरेलू सिलेंडर के लिए ₹4000 से ₹5000 देने पड़ रहे हैं जबकि पूरे महीने में उनकी कमाई ही ₹12000 है तो ऐसे में वह घर का किराया दें या गैस लें, इसलिए वापस अपने राज्य आ गए। भारत सरकार को चाहिए कि ऐसे मजदूरों की आर्थिक मदद करे और कारखाने में भी ऐसी व्यवस्था हो कि उन्हें वापस काम मिल सके। बिहार की कथित डबल इंजन सरकार के लिए यह अच्छा मौका है कि लौटने वाले कामगारों को बिहार में ही काम देकर उनकी समस्या हल की जाए। 

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