छ्पी-अनछपी: सीट फाइनल नहीं- सिंबल मिलना शुरू, इसराइल की कैद से 2000 फलस्तीनी आज़ाद
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एनडीए और महागठबंधन में सीट फाइनल होने का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन उम्मीदवारों को पार्टी के सिंबल मिलने लगे हैं। ग़ज़ा शांति समझौते में इसराइल ने 2000 फलस्तीनी कैदियों को रिहा किया है। लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आईआरसीटीसी घोटाला मामले में अदालत ने आरोप तय किए।
और, जनिएगा कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले 66 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले हैं।
पहली ख़बर
एक तरफ जहां महागठबंधन में अब तक सीट बंटवारे का ऐलान नहीं हुआ है तो वहीं एनडीए में सीट बंटवारे के बावजूद सीटों का नाम तय नहीं हुआ है लेकिन पार्टियों ने कुछ उम्मीदवारों को सिंबल देना शुरू कर दिया है। वैसे, जागरण के अनुसार महागठबंधन में राजद के 135 और कांग्रेस के 60 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना है। जागरण ने एनडीए के बारे में खबर देते हुए लिखा है कि बंटवारे की सीटों में कुछ फेरबदल की मांग को देखते हुए एनडीए के घटक दलों ने अपने हिस्से के विधानसभा क्षेत्रों की घोषणा नहीं की। तय हुआ है कि 15 से 18 अक्टूबर के बीच सभी 243 सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन करा दिए जाएं। जदयू ने उम्मीदवारों को सिंबल देना शुरू कर दिया है। भाजपा ने उम्मीदवारों को नामांकन के लिए जरूरी कागजात जुटाने के लिए कह दिया है। सोमवार को एनडीए के घटक दलों की साझा प्रेस कान्फ्रेंस होने वाली थी। इसी में सीटों और उम्मीदवारों की घोषणा होती। संभव है कि अब यह मंगलवार को हो। रविवार को भाजपा-जदयू के बीच 101-101 सोटों का बंटवारा हुआ। लोजपा (रा.) को 29, हिंदुस्तानी अवमी मोचों और राष्ट्रीय लेक मोर्चा को छह-छह सीटें दी गई हैं। सीटों की संख्या को लेकर हम और रालोमो के समर्थकों में असंतोष हैं। लेकिन, गठबंधन टूटने की कोई संभावना नहीं है।
सिंबल का बंटवारा शुरू
सहरसा जिले के सोनबरसा क्षेत्र पर लोक पर विलास के दावे को खारिज करते हुए जदयू ने वहां के विधायक रत्नेश सादा को सिंबल दे दिया है। जेडीयू ने तारापुर के बदले भाजपा से मुंगेर की मांग कर दी है। उधर लालू प्रसाद ने लगभग एक दर्जन उम्मीदवारों को सिंबल बनते हैं। इसी तरह भाकपा माले ने अपने 8 सिटिंग विधायकों को सिंबल दिया जो आज से नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
चुनाव बुलेटिन:
- जेएनयू के पूर्व छात्र नेता शरजील इमाम ने चुनाव लड़ने के लिए जमानत मांगी
- मोहनिया से निवर्तमान राजद विधायक संगीता कुमारी और विक्रम से निवर्तमान कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ सौरभ भाजपा में शामिल
- पूर्व मंत्री जयकुमार सिंह और पूर्व विधायक अशोक कुशवाहा में जेडीयू से इस्तीफा दिया
- नवादा की निवर्तमान राजद विधायक विभा देवी और रजौली के निवर्तमान राजद विधायक प्रकाश वीर जदयू में शामिल हुए
- जन सुराज की दूसरी सूची में 65 उम्मीदवारों के नाम, इनमें 14 मुसलमान, 8 पासवान
- लालू प्रसाद के बागी पुत्र तेज प्रताप वैशाली जिले के महुआ से चुनाव लड़ेंगे
- पटना के कुमरार विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अरुण कुमार सिन्हा ने चुनाव नहीं लड़ने की जानकारी दी
इसराइल की कैद से 2000 फलस्तीनी आज़ाद
प्रभात खबर के अनुसार ग़ज़ा शांति समझौते के तहत सोमवार को इसराइल लगभग 2000 फलस्तीनी कैदियों को छोड़ रहा है, तो बदले में हमास ने 20 इस्राइली बंधकों को रिहा किया है। 738 दिन बाद हमास की कैद से छूटे इसराइली बंधक रेडक्रॉस को सुपुर्द किये गये। वहीं, ग़ज़ा में युद्धविराम के बीच सोमवार की सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसराइल पहुंचे। ट्रंप ने घोषणा की कि इस समझौते ने युद्ध को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है तथा इसने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के द्वार खोल दिये हैं। जैसे ही ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान से उतरे वाहनों का एक काफिला हमास द्वारा समझौते के तहत रिहा किये गये पहले बंधकों को लेकर इसराइल पहुंचा।
आईआरसीटीसी घोटाला: लालू परिवार पर आरोप तय
हिन्दुस्तान के अनुसार आईआरसीटीसी घोटाले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और पुत्र तेजस्वी यादव के खिलाफ राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष अदालत ने सोमवार को आरोप तय किए। लालू प्रसाद पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। विशेष अदालत ने राबड़ी देवी और तेजस्वी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के साझा आरोप तय किए। यह मामला आईआरसीटीसी के दो होटलों के संचालन के ठेके निजी फर्म को देने में अनियमितताओं से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश के बाद तीनों नेताओं ने खुद को निर्दोष बताया। वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि आदेश की कॉपी मिलते ही उसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
2020 में जीते 66 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार विधानसभा के वर्ष 2020 में हुए चुनाव में जीत हासिल करने वाले 66 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले हैं। सोमवार को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वाच ने इसकी रिपोर्ट जारी की। साथ ही, एडीआर की रिपोर्ट सभी प्रमुख दलों के प्रदेश अध्यक्ष को भी मंगलवार को भेजा जाएगी, ताकि आगामी चुनाव में स्वच्छ छवि के उम्मीदवार बनाया जा सके। एडीआर एवं बिहार इलेक्शन वॉच के संयोजक राजीव कुमार ने सोमवार को बताया कि सभी दलों से यह आग्रह किया जाएगा कि वे उम्मीदवारों के चयन में उनकी पृष्ठभूमि की गहराई से समीक्षा करें, तभी उन्हें उम्मीदवार बनाए। एडीआर की रिपोर्ट 241 विधायकों के आपराधिक मामलों की रिपोर्ट के आधार पर विश्लेषित कर तैयार की गई है।
कुछ और सुर्खियां:
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- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलीं कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद, द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा
अनछपी: बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे के मामले में एनडीए ने बढ़त तो हासिल कर ली लेकिन जदयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नाराजगी की जैसी खबरें आ रही है उससे तो पिछले लोकसभा चुनाव के कुछ महीने पहले के हालात ताजा हो रहे हैं। तब इंडिया गठबंधन के सूत्रधार रहे नीतीश कुमार नाराज बताए जा रहे थे लेकिन वह इससे इनकार कर रहे थे। नीतीश कुमार की नाराजगी की कई वजहें थीं। फर्क यह था कि तब नीतीश कुमार खुद बोल रहे थे और अब उनके हवाले से बातें सामने आ रही हैं। तब भी यह आरोप लगा था कि नीतीश कुमार ऐसे लोगों से घिरे थे जो नहीं चाहते थे कि वह भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ वह किसी गठबंधन में रहें। अब तो यह बात खुलेआम कही जा रही है कि नीतीश कुमार पर भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा वाले जदयू के पदाधिकारियों ने पूरी तरह कब्जा कर लिया है। नीतीश कुमार ने भले ही चुप्पी साथ रखी हो और उनकी सेहत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हों लेकिन पलटी मारने का उनका इतिहास बार-बार लोगों को याद आता है। हालांकि इस बार उनके पलटी मारने की कोई गंभीर संभावना नहीं दिखती है लेकिन कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार अब भी कभी-कभी इस बात को लेकर बहुत सतर्क हो जाते हैं कि उन्हें भाजपा के जरिए दबाया तो नहीं जा रहा है। पिछली बार चिराग पासवान ने नीतीश कुमार की पार्टी के उम्मीदवारों को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस बार कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार इस बात से नाराज हैं कि चिराग पासवान को वैसी सीटें दी गई हैं जिन्हें जदयू अपनी सीटें समझता है। बिहार में बहुत कम लोग ही बचे हैं जो यह मानते होंगे कि नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बन सकते हैं यानी यह बात लगभग तय है कि मुख्यमंत्री चाहे जो बने नीतीश कुमार अब इस पद पर शायद नहीं रह पाएं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार की सेहत ऐसी है कि वह पहले की तरह चक्रव्यूह से निकलने में कामयाब हो जाएं और बिहार के लोगों को एक बार फिर चौका दें।
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