छ्पी-अनछपी: आंधी बारिश से कई जगह तबाही, सुप्रीम कोर्ट बोला- पेपर लीक की जवाबदेही तय हो

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में प्री-मानसून गतिविधियों ने अचानक जोर पकड़ लिया और इसकी वजह से आई आंधी-बारिश में 20 लोगों की मौत हो गई। मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ के पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब दे ही तय करने को कहा।

और, जानिएगा कि एक साल में बैंकिंग सिस्टम में नकली नोटों की संख्या 5.7% बढ़ी।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार बिहार में प्री-मानसून गतिविधियों ने अचानक जोर पकड़ लिया है. पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में तेज आंधी, वज्रपात और भारी बारिश हुई. शुक्रवार सुबह से ही अचानक मौसम का मिजाज बदल गया था. पटना समेत नालंदा, सीवान, औरंगाबाद, खगड़िया और गोपालगंज जैसे कई जिलों में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश हुई. इससे तापमान में चार से सात डिग्री तक की गिरावट आयी है, जिससे गर्मी से लोगों को राहत मिली. हालांकि, कई जिलों से नुकसान और तबाही की भी खबरें हैं. कई जगह पेड़ गिर गये, तो बिजली के खंभे भी उखड़ गये. वहीं, ठनका गिरने से राज्य में 20 लोगों की मौत हो गयी. राज्य में सबसे तेज हवा पटना में चली, जहां हवा की गति 107 किलोमीटर प्रति घंटा थी. गया में भी 74 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं. तेज हवा और बारिश से कई जगहों पर पेड़ गिरा और बिजली आपूर्ति प्रभावित रही.

पेपर लीक की जवाबदेही तय हो: सुप्रीम कोर्ट

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी का पेपर लीक मामले में जवाबदेही पर जोर देते हुए शुक्रवार को कहा कि असली समस्या तब तक हल नहीं होगी, जब तक जवाबदेही तय नहीं हो जाती। जवाबदेही तभी प्रभावी होगी, जब पता हो कि जिम्मेदारी किसके कंधों पर है। ऐसी घटनाएं वास्तव में बेहद दुखद हैं, हमें युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। केंद्र की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार युवाओं की चिंता के प्रति गंभीर है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि कमी न रह जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि हलफनामा दाखिल कर बताए कि क्या कदम उठाए जा रहे हैं जिससे सुनिश्चित हो कि 2024 और 2026 की घटनाओं की पुनवावृति नहीं होगी। जुलाई में फिर सुनवाई होगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ईरान से समझौता के करीब

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि हम ईरान के साथ समझौते के बहुत करीब हैं। उन्होंने कहा कि हालिया कार्रवाइयों से होर्मुज फिर से खुल जाएगा। ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताएं कमजोर होंगी और अमेरिका ऐसी स्थिति में आ जाएगा जहां वह तेहरान के परमाणु कार्यक्रम में पीछे धकेल सकेगा। मैरीलैंड के ज्वाइंट बेस एंडूयज में पत्रकारों से बात करते हुए वेंस ने कहा कि हम होर्मुज को फिर से खोल रहे हैं, हमने उनकी पारंपरिक सेना को पहले ही तबाह कर दिया है। हालांकि, बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, उन्होंने संकेत दिया कि प्रगति एक अहम पड़ाव के करीब पहुंच रही है।

एनआईए का बिहार के किशनगंज समेत चार राज्यों के 12 थानों पर छापा

भास्कर के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को एनआई की टीमों ने भारत पाकिस्तान सीमा के रास्ते हथियारों, गोला-बारूद और आईईडी की तस्करी के मामले में बिहार समेत चार राज्यों में एक साथ छापेमारी की। यह तलाशी अभियान कुल 12 संदिग्ध ठिकानों पर चलाया गया। इनमें बिहार के किशनगंज के 2, यूपी के 5, महाराष्ट्र के 3 और राजस्थान के 2 ठिकाने पर छापेमारी हुई। किशनगंज से एनआई ने मनोज दास को उठाया है। वो जूते-चप्पल का कारोबारी है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए।

बिहार में सरकारी बसों का किराया 15% बढ़ा

बिहार में बसों के किराये में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। बढ़ा किराया एक जून से प्रभावी होगा। हिन्दुस्तान के अनुसार परिवहन विभाग ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। 50 किमी तक 15%, 100 किमी तक 14%, 150 किमी तक 13%, 200 किमी तक 12%, 250 किमी तक 11% और 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर 10% किराया में वृद्धि हुई है। साधारण बस सेवा में 50 किमी तक यात्रा करने पर अब प्रति किलोमीटर 1.73 रुपये किराया देना होगा। पहले दर 1.50 रुपये थी।

बैंकिंग सिस्टम में नकली नोटों की संख्या 5.7% बढ़ी

जागरण के अनुसार पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकिंग प्रणाली में नकली नोटों की संख्या में 5.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसकी मूल वजह 500 और 200 रुपये के नकली नोटों की संख्या में तेज वृद्धि होना है। आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि 2025-26 में पकड़े गए नकली नोटों की संख्या बढ़कर 2,29,746 हो गई, जो 2024-25 में 2,17,396 थी। इसके अलावा, आरबीआई ने कहा है कि डिजिटल रुपये को सीमापार भुगतान के इस्तेमाल पर भी वह विचार करेगा। बीते वर्ष 500 रुपये के नकली नोट सबसे ज्यादा पकड़े गए और इनकी संख्या 20.5 प्रतिशत बढ़कर 1,41,907 हो गई जबकि 2024-25 में यह 1,17,722 थी। संख्या के लिहाज से 20 रुपये के नकली नोटों में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई और 2024-25 के 253 नकली नोटों के मुकाबले इनकी संख्या 47.4% बढ़कर 373 हो गई।

कुछ और सुर्खियां:

  • उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बेतवा नदी पर बना रहे पुल का पिलर टूटने से स्लैब गिरा, 6 लोगों की मौत
  • पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का दोबारा नोटिस, 10 सर्कुलर रोड का बंगला मिला मंत्री नंदकिशोर राम को
  • राजद प्रमुख लालू प्रसाद मेडिकल जांच के लिए सिंगापुर गए
  • शुक्रवार की सुबह अचानक मौसम खराब होने से पटना एयरपोर्ट आने वाले चार जहाज को लखनऊ और कोलकाता डायवर्ट किया गया

अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जब नोटबंदी लागू की थी तो यह दावा किया गया था कि इससे नकली नोटों का चलन बंद हो जाएगा लेकिन अब इस मामले में ना तो सरकार कुछ बताती है और न ही सरकार से कुछ पूछा जाता है। यह जरूर है कि नोटबंदी के दौरान लोगों को जो परेशानी हुई उस बात को ओझल करने की बहुत कोशिश की गई। यही वजह है कि जब कुछ लोगों को ऐसा लग रहा था कि नोटबंदी की परेशानी से तंग आकर लोग मोदी सरकार के खिलाफ वोट देंगे तो जाहिर तौर पर ऐसा नहीं हुआ हालांकि चुनाव आयोग की अपनी भूमिका एक अलग बहस का विषय है। अब रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 2024-25 में कैसे नकली नोटों का चलन बैंकिंग सिस्टम में बढ़ गया है। इस तरह सरकार का वह दावा बुरी तरह फेल हो गया जिसमें उसने नोटबंदी से नकली नोटों के चलन पर काबू करने का दावा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने इस बात में कामयाबी जरूर हासिल कर ली है कि चाहे जनता को परेशान करने वाली कितनी ही बातें क्यों ना हो जाएं उनका असर वोटिंग पर शायद ही पड़ता हो। अगर हम यह मान भी लें कि मोदी सरकार की जीत में काफी बड़ा रोल चुनाव आयोग का रहा है तब भी यह बात अपनी जगह बनी रहती है कि जब वोट देने की बारी आती है तो जनता को उन सब बातों के दर्द से दूर करने के लिए ऐसा नशा दिया जाता है जिससे समस्या तो हल नहीं होती लेकिन सरकार अपनी वाहवाही हासिल कर लेती है। देखना यह है कि विपक्षी दल आरबीआई की इस रिपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए नकली नोटों के बारे में आम जनता की जागरूकता किस हद तक बढ़ा पाते हैं। विपक्षी दलों की जिम्मेदारी केवल इतनी नहीं है कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट डाला जाए बल्कि केंद्र सरकार से तीखे सवाल किए जाएं और इस मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाया जाए।

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