बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वोटर लिस्ट के एसआईआर और दूसरी धांधलियों के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली और पटना में धरना प्रदर्शन जारी रहा और कल जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन होने वाला है। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट जारी है और एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई है।
और, जानिएगा कि दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क ने क्यों पूछा कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस समेत पूरा इंडिया ब्लॉक गुरुवार को तीसरे दिन भी सड़क पर उतरा। पहले इन्होंने साथ लंच किया, फिर राजघाट तक बसों से मार्च निकाला। राजघाट पहुंचने के बाद राहुल, प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं को अंदर जाने की अनुमति एक घंटे बाद मिली, तब तक सभी बस में ही बैठे रहे। प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहेगा। इसमें पूरा इंडिया ब्लॉक जुटेगा। वहीं, यूथ कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस वजह से ज्ञानेश कुमार के ऑफिस, दिल्ली आवास की सुरक्षा सीआईएसएफ को दे दी गई है। दिल्ली में 9-10 अक्टूबर को शराब दुकानें बंद रहेंगी। अगले दो दिन दिल्ली सख्त सुरक्षा घेरे में रहेगी। वहीं, सीजेपी ने बेंगलुरु में प्रदर्शन किया। इसमें यूट्यूबर ध्रुव राठी, अभिनेता प्रकाश राज मौजूद रहे।
पटना में तेजस्वी के नेतृत्व में मार्च
हिन्दुस्तान के अनुसार एसआईआर के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर गुरुवार को पटना में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में शहीद स्मारक से लोकभवन मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त, केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई। पटना में तेजस्वी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेता शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि के बाद साढ़े 10 बजे लोकभवन मार्च को निकले। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए तीन जगह बैरिकेडिंग की थी। पहले सुरक्षा घेरा के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। इस बीच तेजस्वी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन वे धक्का-मुक्की करते आगे बढ़ गए। उनके पीछे मुकेश सहनी, मीसा भारती, आलोक मेहता, सुनील सिंह, आईपी गुप्ता, शकील अहमद खान भी आगे निकले। बाद में प्रशासन ने गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल को लोक भवन ले जाकर राज्यपाल से भेंट कराई।
शेयर बाजार में हाहाकार, 10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान
जागरण के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमत और बिकवाली दबाव से घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट आई और बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 1,045 अंक गिरा जबकि निफ्टी 21 महीने के निचले स्तर पर आ गया। कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू तथा वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के बीच ब्याज दर से संबंधित जिंस और दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) के शेयरों में बिकवाली से बाजार नुकसान में रहा। गुरुवार को शेयर बाजार में हुई बड़ी गिरावट के चलते निवेशकों को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 10,01,898.68 करोड़ रुपये घटकर 4,60,97,032 करोड़ रुपये (4.76 ट्रिलियन डालर) रह गया।
इंजीनियर की ससुराल से 51.5 लाख कैश मिला
प्रभात खबर के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में योजना व विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. गुरुवार को उनके भागलपुर, मुंगेर, पटना और मुजफ्फरपुर स्थित पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गयी. मुजफ्फरपुर स्थित ससुराल से टीम ने 51.50 लाख कैश व मुंगेर स्थित किराये के आवास से 30 लाख के गहने और 1.70 लाख की नकदी बरामद की है. पटना के कुसुमपुरम में डेढ़ करोड़ रुपये का 3.9 डिसमिल भूखंड मिला है.
बैंकिंग भर्ती परीक्षा में फर्जी उम्मीदवार गिरोह का भंडाफोड़
बैंकिंग भर्ती परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी बनकर शामिल होने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सीबीआइ ने भंडाफोड़ किया है. सीबीआइ की विशेष टीम ने बिहार के जहानाबाद, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में एक सांथ छापेमारी कर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के एक निरीक्षक समेत चार प्रमुख आरोपितों को गिरफ्तार किया है. मामला बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आइबीपीएस) की शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है. इसके बाद सीबीआइ की मुंबई स्थित विशेष कार्यबल शाखा ने कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई की. जांच में सामने आया कि आरोपित वास्तविक अभ्यर्थियों की पहचान का दुरुपयोग कर उनकी जगह परीक्षा और चयन प्रक्रिया में शामिल होते थे. गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और फर्जीवाड़े के तौर-तरीकों का पता लगाया जा रहा है. जांच एजेंसी गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी अभ्यर्थियों और उनकी मदद करने वालों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है. मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.
नाना पाटेकर को दी गई अंतिम विदाई
हिन्दुस्तान के अनुसार दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार तड़के गोवा स्थित आवास पर निधन हो गया। 76 वर्षीय बेबाक नाना ‘सलाम बॉम्बे’, ‘खामोशी’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में बेमिसाल किरदार से दर्शकों के दिलों में कायम रहेंगे। उनका असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था। नाना को पणजी के पास डोना पाउला स्थित उनकै अपार्टमेंट में तड़के बेहोश पाया गया। आशंका है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, लेकिन होश में नहीं आए। सुबह करीब 5:10 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
कनाडा की एमी कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल प्राइज
स्वीडिश अकादमी ने गुरुवार को साहित्य में नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी। इस बार यह सम्मान कनाडाई कवयित्री, निंबधकार और क्लासिकिस्ट (प्राचीन शास्त्रीय साहितय की जानकार) ऐनी कार्सन को दिया जा रहा है। कार्सन की रचना में कहानी, कविता और लेख तीनों अनोखा मेल है। ऐनी साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाली 122वीं साहित्यकार और 19वीं महिला साहित्यकार हैं। ऐनी को शास्त्रीय ग्रीक (यूनानी) साहित्य को समकालीन संवेदनाएं प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
एलन मस्क का सवाल, क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
जागरण के अनुसार भारत सरकार ने अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक के प्रमुख एलन मस्क के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया था कि कुछ भारतीय उद्योगपति उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट संचार सेवाओं को भारत में शुरू करने की राह में अड्चन डाल रहे हैं ताकि अपना एकाधिकार बनाए रख सकें। दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में सैटेलाइट संचार समेत सभी टेलीकाम सेवाओं के लिए निष्पक्ष व गैर-भेदभावपूर्ण नियमन ढांचा है और भेदभाव का आरोप आधारहीन है। भारत सरकार के बयान के कुछ घंटे बाद मस्क ने एक्स पर फिर लिखा कि भारत में जहां मोबाइल कनेक्शन नहीं हैं या कमजोर हैं, वहां स्टारलिंक बहुत मददगार साबित हो सकती है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिला है और पांच वर्षों से भारत सरकार के हर कानून व जरूरत का अनुपालन किया है फिर भी अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
कुछ और सुर्खियां:
- मधुबनी के बासोपट्टी थाना क्षेत्र के हीरा देवी महासेठ से जुड़े 12 ठिकानों पर एनआईए की टीम ने जाली नोट मामले में की छापेमारी
- पंजाब में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में पाकिस्तान ने शामिल होने से किया इनकार, उसकी जगह अब बांग्लादेश की टीम खेलेगी
- यूजीसी नेट दिसंबर के लिए 28 अक्टूबर तक आवेदन की तारीख
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की- पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की जयंती अगले वर्ष से राजकीय समारोह के रूप में मनेगी
- असम के तेजपुर में 20000 लीटर क्षमता का सुधा डेयरी प्लांट शुरू हुआ
अनछपी: ऐसा लगता है कि भारत में अब अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए पैसों की कमी नहीं है लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन में जरूर कमी रह जाती है। हाल ही में जापान में संपन्न हुए एशियाई खेलों में भारत के पदकों की संख्या पिछले एशियाड से कम होने के मामले में खबर आई है कि खेल मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है ताकि यह मालूम हो सके कि आखिर खिलाड़ियों का प्रदर्शन ऐसा क्यों रहा। खबरों में बताया गया है कि खिलाड़ियों की तैयारी के नाम पर तीन साल में भारत सरकार ने 700 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए लेकिन जापान में मेडल की तादाद बढ़ने के बजाय घट गई। पिछले एशियाई खेलों में भारत ने 28 गोल्ड मेडल के साथ 106 मेडल जीते थे लेकिन इस बार गोल्ड की तादाद भी घटकर 21 हो गई और कुल मेडल भी कम होकर पचासी रह गए। एशियाड में बेहतर प्रदर्शन के लिए जितने पैसे खर्च किए गए उसके हिसाब से कम से कम मेडल की तादाद 150 होनी चाहिए थी। खबरों में बताया गया है कि 23 इवेंट्स में 89 खिलाड़ी नाकाम रहे। जाहिर है खेल मंत्रालय इस बात की समीक्षा करेगा कि खिलाड़ियों और कोच का प्रदर्शन कैसा रहा और इस तरह की खबरों की भी समीक्षा की जाएगी कि कुछ खिलाड़ियों ने चोटिल रहने के बावजूद यह बात छिपाई और सिर्फ जापान का दौरा कर खाली हाथ भारत लौट आए। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पैसे और सुविधा बढ़ाना तो मेडल लाने के लिए जरूरी है ही लेकिन सही खिलाड़ियों का चयन हो, उनकी सही ट्रेनिंग हो और खिलाड़ी भी अपना भरपूर प्रदर्शन करें, भारत में इस संस्कृति की कमी है। इसके अलावा इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि 700 करोड़ रुपए में कितने पैसे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पर लगे और कितने पैसे इधर-उधर कर दिए गए।
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