बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पुलिस का कहना है कि उसने मनेर में तीन अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया जबकि उनके रिश्तेदारों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें घर से बुलाकर गोली मार दी।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर घाट के समीप शुक्रवार को तड़के पुलिस और अपराधियों की बीच मुठभेड़ हुई। इसमें पुलिस ने तीन बदमाशों को मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, तीनों किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए शेरपुर में इकट्ठा हुए थे। 20 मिनट तक चली मुठभेड़ में बदमाशों की तरफ से 24 जबकि पुलिस द्वारा 18 राउंड गोलियां चलाई गईं। बदमाशों की चलाई गोली मनेर थानेदार के बाएं बांह में लगी। जबकि अन्य पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे। पुलिस के मुताबिक, दानापुर के ताराचक निवासी जय प्रकाश राय, शाहपुर के गंगहारा निवासी राजा शर्मा उर्फ सूरज कुमार और बबलू यादव की मौत हो गई। उधर, मुठभेड़ के विरोध में मृतक के परिजनों ने दानापुर अस्पताल में पांच घंटे तक जमकर हंगामा। अस्पताल में सांसद मीसा भारती परिजनों से मिली और उन्हें सांत्वना दीं। एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने बताया कि घटनास्थल से दो देसी पिस्टल, एक कट्टा, नौ कारतूस और छह खोखे बरामद किए हैं। बदमाशों के खिलाफ हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हैं। तीनों ब्यापुर में पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार की हत्या में वांछित थे। हालांकि प्राथमिकी में इनका नाम नहीं था। एसटीएफ और पटना पुलिस शुक्रवार तड़के 4.30 बजे शेरपुर घाट के पास पहुंचे तो बदमाशों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।
रिश्तेदार बोले घर से बुलाकर गोली मारी
मनेर के कथित मुठभेड़ के बाद तीनों शवों को दानापुर अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया। वहां मृतक के गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा और पुलिस पर पथराव भी किया। पथराव से पुलिस की एक गाड़ी और एक एंबुलेंस क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस कर्मियों को हल्की चोटें भी आई। करीब पांच घंटे तक हंगामा चलता रहा। परिजन न्याय की मांग को लेकर पोस्टमार्टम के लिए शव को नहीं ले जाने देने पर अड़े थे। परिजनों ने अपराधियों से साठगांठ कर झूठे मुठभेड़ में तीनों की हत्या का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि घर से बुलवाकर पुलिस ने तीनों को गोली मार दी। दूसरी ओर, पुलिस के मुताबिक जय प्रकाश राय के खिलाफ दानापुर और मनेर में हत्या के तीन सहित नौ केस दर्ज हैं। सूरज कुमार पर शाहपुर, नौबतपुर और मनेर थाने में डकैती समेत तीन जबकि बबलू यादव पर दानापुर और मनेर में आर्म्स एक्ट के तहत दो प्राथमिकी दर्ज हैं।
क्रीमी लेयर सिर्फ मां-बाप की सैलरी या इनकम से तय नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता का वेतन या आय अपने आप में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को क्रीमी लेयर के आधार पर आरक्षण से बाहर करने का मानक नहीं हो सकता। माता-पिता के पद की स्थिति और श्रेणी की कसौटी पर भी इसे कसा जाना चाहिए। इस तरह शीर्ष अदालत ने अपने 11 मार्च के फैसले को बरकरार रखा है। गौरतलब है कि सरकार ने 11 मार्च, 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट से आगे की तिथि लागू करने का अनुरोध किया था। केंद्र ने याचिका में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत इस अदालत को फैसले को आगे की तिथि से लागू घोषित करने का अधिकार है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो यह उन कर्मचारियों के लिए अन्यायपूर्ण होगा, जो मुकदमे में पक्षकार तक नहीं थे। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने फैसला आगे की तिथि से लागू करने की केंद्र की मांग खारिज करते हुए कहा कि इसके क्रियान्वयन को टालने का कोई ठोस आधार नहीं है।
सेंसेक्स आठ महीने बाद 81 हज़ार के पार
जागरण ने लिखा है कि वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जमकर धन की वर्षा हुई और बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स करीब आठ महीने बाद 81 हजार के पार जाकर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई, का निफ्टी नौ महीने के उच्च स्तर पर पहुंचकर 25,000 के पार बंद हुआ। विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों और रुपये की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। ब्रेंट क्रूड 96.82 डालर प्रति बैरल पर आ गया।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: पटना जिले के मनेर में जिन तीन मुल्ज़िमों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया है अगर वह किसी हत्याकांड में वाकई शामिल थे तब भी यह सवाल तो किया जाना चाहिए कि क्या बिहार में अब क्राइम कंट्रोल का यही तरीका बच गया है? नीतीश कुमार तो बिहार में क्राइम कंट्रोल का दावा कर सत्ता से किनारे हो गए लेकिन उन्होंने अपनी बागडोर जिस नई सरकार को सौंपी है, वहां एनकाउंटर से क्राइम कंट्रोल का चलन देखने को मिल रहा है। यह ऐसा एनकाउंटर है जो अक्सर होता नहीं बल्कि किया जाता है और इस फर्क को समझना जरूरी है। यह एनकांउटर ऑन डिमांड होता है। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस जब किसी का एनकाउंटर करती है तो उसकी जाति देखकर प्रतिक्रिया सामने आती है। उदाहरण के लिए जब भोजपुर में एनकाउंटर किया गया तो उसमें मारे जाने वाले शख्स की जाति अलग थी। उस समय पुलिस की कार्रवाई पर बहुत सवाल खड़े हुए और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसमें पुलिस की गलती मानी और पुलिस वाले इस मामले में सस्पेंड भी किए गए। अब मनेर के एनकाउंटर पर राजद की सांसद मीसा भारती का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जाति देखकर नहीं बल्कि कानून के तहत होनी चाहिए। इससे पहले राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव भी सरकार पर जाति देखकर एनकाउंटर करने का आरोप लगा चुके हैं। दरअसल जब तक ऐसे एनकाउंटरों पर जाति का सवाल खड़ा होता रहेगा तब तक पुलिस ऐसी हरकतों से बाज नहीं आएगी क्योंकि उसे अपने राजनीतिक नेतृत्व से ऐसा ही संदेश मिला हुआ है। अब भारत के सुप्रीम कोर्ट जरूर इस बात का संज्ञान लेना चाहिए कि क्या क्राइम कंट्रोल के लिए अदालत अब बेकार हो चुकी है और पुलिस जिसे जब चाहे जैसे मार दे और उसे एनकाउंटर का नाम दे दे। पुलिस यह कह सकती है कि उसने कानून का पालन करते हुए पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई लेकिन पुलिस क्या यह कह सकती है कि उसके पास एनकाउंटर की वीडियोग्राफी भी है और वह उसे सबके सामने लाएगी? बिहार और भारत के आम लोगों को भी एक नया एक दिन ही तय करना होगा कि क्राइम कंट्रोल अदालत की कार्रवाई से होगी या पुलिस के ऐसे ही ऑन डिमांड एनकाउंटर से?
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