खुदाबख़्श लाइब्रेरी का अस्तित्व ख़तरे में, जन अभियान चलाने की चेतावनी

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट

दुनियाभर में मशहूर पटना की खुदा बख़्श ओरियंटल पब्लिक लाइब्रेरी का वजूद ख़तरे में है। इसके अगले हिस्से को एलिवेटेड सड़क बनाने के लिए तोड़ा जा सकता है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड कारगिल चैक से एनआईटी, पटना तक एलिवेटेड सड़क बनाने जा रहा है। इसके लिए खुदा बख़्श लाइबे्ररी केे कर्ज़न रीडिंग रूम और लाइब्रेरी के बाग़ वाले हिस्से को तोड़ने की बात कही गई है।

खुदा बख़्श लाइब्रेरी भारतीय संस्कृति की धरोहर है जिसकी स्थापना 1891 में हुई थी। लाइब्रेरी में 21 हज़ार से अधिक फ़ारसी, पशतो, उर्दू, तुर्की और अरबी पाण्डुलिपियां हैं। इसके अलावा यहां हज़ारों प्रिंटेड किताबों का ज़ख़ीरा भी है। यहां महात्मा गांधी, लाॅर्ड कर्ज़न, वैज्ञानिक सीवी रमण, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और बहुत सारे गणमान्य लोग आ चुके हैं।

एलिवेटेड सड़क के निर्माण के सिलसिले में बिहार लोक संवाद डाॅट नेट के कंसल्टिंग एडिटर समी अहमद ने लाइब्रेरी की निदेशक डाॅ. शाइस्ता बेदार से विशेष बातचीत की। शाइस्ता बेदार ने बताया कि उन्होंने पिछले माह पटना के डीएम को पत्र लिखकर कोई वैकल्पिक मार्ग देखने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि ‘हम विकास के खि़लाफ़ नहीं हैं लेकिन इसके लिए इतनी महत्वपूर्ण लाइब्रेरी की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।’

लाइब्रेरी पर मंडला रहे खतरे को टालने के लिए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फाॅर आर्ट एंड कल्चरण हेरिटेज (इनटेक) ने बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार से अपील की है। इनटेक के पटना चैप्टर के संयोजक जेके लाल का कहना है कि हमें इस लाइब्रेरी को टूटने से बचाना है और जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। साथ ही जन अभियान भी चलाया जाएगा।

अब देखना है, आने वाले दिनों में इन तमाम कोशिशों का क्या नतीजा निकलता है।

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