नई बिहार विधानसभा में मुस्लिम मुक्त हुआ एनडीए

बिहार लोक संवाद ब्यूरो
पटना 13 नवंबर: एनडीए के मामले में बिहार विधानसभा मुस्लिम मुक्त हो गई है। इसकी वजह यह है कि एनडीए से जितने भी विधायक चुनकर आए हैं, उनमें एक भी मुसलमान नहीं है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में आरजेडी के सर्वाधिक 8 विधायक चुना कर आए। उसके बाद चैंकाने वाला नतीजा एमआईएम का रहा, जिसके 5 विधायक चुने गए। तीसरे नंबर पर कांग्रेस रही जिसके 4 जनप्रतिनिधि चुने गए। इसके साथ ही सीपीआईएमएल और बसपा के एक-एक मुस्लिम विधायक चुने गए।

Photo credit: economictimes

इस तरह विधायिका में मुसलमानों की संख्या लगभग 8 फीसद है। हालांकि उनकी संख्या लगभग 16 फीसद है। यानी उनकी आबादी का ठीक आधा फीसद।

राजद ने 15 मुसलमानों को जबकि कांग्रेस ने 10 मुसलमानों को टिकट दिया था।

जहां तक मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या का सवाल है तो जदयू ने 11 मुसलमानों को टिकट दिया था, लेकिन किसी को भी कामयाबी हासिल नहीं हुई। इसका सीधा असर नीतीश सरकार की कार्यशैली और नीति पर पड़ सकता है।

2015 में 24 मुसलमान जीत कर विधानसभा पहुंच थे। उनमें सबसे महत्वपूर्ण चेहरा राजद से अब्दुलबारी सिद्दीकी का था, जो इस बार के चुनाव में हार गए।

देखिए कौन कहां से जीता

List of Muslim MLAs in Bihar
1. Amour Akhtarul Iman (AIMIM) 52,515

2. Arariaa Abidur Rahman (Congress) 47,936

3. Bahadurganj Mohammad Anzar Nayeemi (AIMIM) 45,215

4. Baisi Syed Ruknuddin Ahmad ( AIMIM) 16,373

5. Balrampur Mahboob Alam (CPI-ML) 53,597

6. Chainpur Mohd. Zama Khan (BSP) 24,294

7. Gobindpur Md Kamran (RJD) 33,074

8. Jokihat Shahnawaz (AIMIM) 7,383

9. Kadwa Shakeel Ahmad Khan (Congress ) 32,402

10. Kanti Mohammad Israil Mansuri (RJD) 10,341

11. Kasba Md. Afaque Alam (Congress) 17,278

12. Kishanganj Izaharul Hussain (Congress) 1,381

13. Kochadhaman Muhammed Izhar Asfi (AIMIM) 36,143

14. Narkatia Shamim Ahmad (RJD) 27,791

15. Nathnagar Ali Ashraf Siddiquui (RJD) 7,756

16. Rafigannj Mohammad Nehaluddiin (RJD ) 9,429

17. Samastipur Akhtarul Islam Shahin (RJD ) 4,714

18. Simri Bakhtiarpur Yusuf Salahuddin (RJD) 1,759

19. Thakurganj Saud Alam (RJD ) 23,887

दूसरी ओर दैनिक प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में इस बार पिछड़ा वर्ग के विधायकों की हिस्सेदारी में कमी आयी है। करीब 41 फीसदी की भागीदारी कर इस वर्ग के विधायकों की संख्या 117 से घटकर 101 पर ठहर गयी है। वर्ष 2015 की तुलना में उनके 16 विधायक कम हुए हैं।

वैश्य को छोड़कर मुख्य पिछड़ी जातियों में शुमार किये जाने वाले यादव, कुर्मी और कुशवाहा विधायकों की संख्या घटी है। सबसे ज्यादा यादव विधायक कम हुए हैं। पिछली विधानसभा की तुलना में इस बार 9 सीटों का नुकसान हुआ है। फिर भी 52 की संख्या लाकर यादव अभी भी सबसे उपर हैं.

2015 में 61 यादव विधायक जीत कर आये थे। इनमें सबसे अधिक राजद में 35 हैं. विधानसभा में दूसरी सबसे अधिक वैश्य जाति के विधायक चुन कर आये हैं, जिसके 24 विधायक जीत कर सदन में पहुंचे। विधानसभा में यादव विधायकों की संख्या अब भी 21 फीसदी से कुछ अधिक ही है। पिछले चुनाव की तुलना में यह संख्या चार फीसदी कम है. चुनाव परिणामों के आकलन के मुताबिक यादव विधायकों में 35 राजद के हैं. भाजपा के 7, जदयू के 5, तीन वाम दल, वीआइपी और कांग्रेस का एक-एक यादव विधायक चुनाव जीते हैं। 1952 में प्रदेश की राजनीति में यादवों की भागीदारी 7.9 फीसदी थी. 2015 के चुनाव में इनकी भागीदारी करीब 25 फीसदी से कुछ अधिक थी।

इसी तरह दूसरी सबसे बड़ी पिछड़ी जाति कुशवाहा के विधायकों में कमी हुई है. चुनाव में कुशवाहों को विधानसभा में 4 सीटों का नुकसान हुआ है. 2015 की तुलना में उनके विधायकों की संख्या 20 से घटकर 16 हो गयी है।

हालांकि, सियासत में कुशवाहों की भागीदारी 65 साल में 4.5 फीसदी से बढ़ कर 2015 में 8 फीसदी और अब 6.58 फीसदी रह गयी है। कुर्मी विधायकों की संख्या 2015 की तुलना में 12 से घटकर नौ रह गयी है। इस तरह करीब एक फीसदी की गिरावट हुई है। कुर्मी जाति की 1952 के चुनाव में 3.6 फीसदी भागीदारी थी। पिछड़ों में शुमार वैश्य विरादरी के विधायकों की संख्या इस बार करीब 10 फीसदी 24 है। पिछली विधानसभा में इनके विधायकों की संख्या 16 है थी। पिछड़ों में यादवों के बाद विधायकों की यह सबसे बड़ी संख्या है। लेकिन बिहार चुनाव 2020 में अहीरों को 9 सीटों का नुकसान हुआ है। पिछली बार 61 थे, अब 52 पर सीमट गए हैं।

इस विधानसभा चुनाव में अपर कास्ट की राजनीतिक हिस्सेदारी में अपेक्षाकृत कुछ इजाफा हुआ है. कुल 64 विधायक चुने गये हैं. जो 26 फीसदी से कुछ अधिक है। हालांकि 2015 में यह हिस्सेदारी 20 फीसदी के आसपास थी।

इस चुनाव में राजपूतों को 8 सीटों का फायदा हुआ है। विधान सभा में उनकी संख्या 20 से बढ़कर 28 हो गई है। चुनाव में भूमिहारों को 3 सीटों का फायदा हुआ है। विधान सभा में इनकी संख्या 18 से बढ़कर 21 हो गई। 1952 के विधानसभा चुनाव में यहां अगड़ी जातियों की भागीदारी 46 फीसदी तक रही थी।

अनौपचारिक आंकड़ों के मुताबिक बिहार विधानसभा में इस बार दलित विधायकों की संख्या 39 और अति पिछड़ी जातियों के विधायकों की संख्या 22 है.

प्रभात खबर के अनुसार विधायिका में भागीदारी दलित की 16 और अतिपिछड़ों की 13 फीसदी के आसपास है।

 522 total views

Share Now

Leave a Reply