छपी-अनछपी: डेंगू है, बहुत कमज़ोरी भी तो कोरोना टेस्ट की सलाह, नफरती भाषण पर सुप्रीम कोर्ट की पकड़

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। आज के हिन्दी  अखबारों में इतने पन्ने, इतने विज्ञापन और इतनी खबरें हैं कि उनको देख पाना मुश्किल है। इनमें सबसे अहम जानकारी यह लगी कि अगर किसी को डेंगू है और बहुत कमजोरी भी तो उसे कोरोना की जांच जरूर करा लेनी चाहिए। यह सलाह एम्स, पटना के विशेषज्ञ डॉक्टरों की है। वैसे अखबारों में सबसे बड़ी खबर स्वास्थ्यकर्मियों को दिए गए नियुक्ति पत्र, नगर निकाय चुनाव पर सीएम नीतीश कुमार का बयान और नगर निकायों में बहाली के मामले में पटना हाईकोर्ट का फैसला है।

जागरण की सबसे बड़ी खबर की सुर्खी है: मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नहीं रहेंगे तो यह अच्छी बात नहीं: मुख्यमंत्री। डॉक्टरों के गायब रहने की शिकायत पर यह बात मुख्यमंत्री ने 9426 स्वास्थ्य कर्मियों को नियुक्ति पत्र देने के लिए आयोजित सभा में कही। उन्होंने इस मौके पर बक्सर व बेगूसराय में 515-515 करोड़ से बनने वाले मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास भी किया। भास्कर में खबर है: बोले नीतीश- 37400 कर्मी 5 साल में बहाल, अगले वर्ष इतने और। 

इसी कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के एक सवाल का जवाब  हिन्दुस्तान की लीड है जिसकी सुर्खी है: आयोग की रिपोर्ट पर होगा नगर निकाय चुनाव: सीएम। इसके अनुसार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि “अतिपिछड़े वर्ग का आरक्षण रहना चाहिए, वह जरूरी है। इसके लिए आयोग बन गया है, उसकी जो रिपोर्ट आएगी, उसी के आधार पर नगर निकाय का चुनाव होगा।” 

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: सरकार नहीं, अब नगर निकाय ही करेंगे ग्रुप सी-डी कर्मियों की भर्ती। हिन्दुस्तान में यह दूसरी सबसे बड़ी खबर है जिसकी हेडिंग है: नगरपालिका संशोधन विधेयक असंवैधानिक। इसमें बताया गया है कि पटना हाईकोर्ट  ने कहा है कि निकायों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की नियुक्ति, स्थानांतरण का अधिकार निगम के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा।

हिंदुस्तान में पहले पेज पर यह महत्वपूर्ण खबर है: डेंगू पीड़ितों में ज्यादा कमजोरी कोरोना का खतरा। इसमें बताया गया है कि “डेंगू में बुखार से यदि अधिक कमजोरी हो तो कोरोना जांच अवश्य कराएं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार दोनों के लक्षण समान हैं। एम्स, पटना के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार डेंगू पीड़ित को स्पर्श करने से डेंगू नहीं होता। डेंगू वायरल बीमारी नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार डेंगू पीड़ित को कोरोना भी हो सकता है। बुखार से ज्यादा कमजोरी महसूस होने पर कोरोना जांच कराने से बीमारी की स्पष्ट पहचान हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक बिहार में अभी डेंगू के मौजूदा वेरिएंट-1 का प्रकोप अधिक है। इसमें तेज बुखार के बाद तीसरे दिन से प्लेटलेट्स में कमी आ रही है। साथ ही, डेंगू बुखार के दौरान पहले पीड़ित मरीज के शरीर में श्वेत रक्त कणिका (डब्ल्यूबीसी) की कमी हो जा रही है।”

प्रभात खबर में पहले पेज पर यह खबर प्रमुखता से छपी है: पूर्णिया नगर निगम का जूनियर इंजीनियर निकला करोड़पति। भास्कर में इसकी सुर्खी है: सोना-जमीन के शौकीन जेई ने बनाई बड़ी संपत्ति; निवेश के भी सबूत मिले, हिरासत में। जागरण ने लिखा है: जूनियर इंजीनियर ने जमीन फ्लैट में लगाई काली कमाई। जूनियर इंजीनियर शिव शंकर सिंह पर पटना, पूर्णिया व सहरसा में निगरानी ब्यूरो की छापेमारी में में यह जानकारी मिली है। हिंदुस्तान ने बताया है: अभियंता 18 भूखंड व मकान के मालिक।

जागरण में पहले पेज पर खबर दी गई है: इमरान खान को झटका, 5 साल तक सरकारी पद लेने पर लगी रोक। इसमें बताया गया है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को बड़ा झटका देते हुए वहां के चुनाव आयोग में 5 साल तक सरकारी पद लेने पर रोक लगा दी है। नेशनल असेंबली में उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है और 5 साल तक संसद के सदस्य बनने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इमरान खान अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के अध्यक्ष हैं और उन पर विदेशी शासनाध्यक्षों से मिले उपहारों को बेचने का आरोप है। 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ताजमहल के इतिहास और स्मारक परिसर में 22 कमरों को खोलने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है, यह खबर भी प्रमुखता से छपी है। कोर्ट ने कहा है कि यह पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है। यानी याचिका सिर्फ प्रचार पाने के लिए दायर की गई। न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें याचिका खारिज कर दी गई थी। 

भास्कर ने इस खबर को प्रमुखता दी है: नफरत का माहौल देश पर हावी हो गया है, धर्म की परवाह किए बिना कार्रवाई की जाए: सुप्रीम कोर्ट। इसमें यह भी कहा गया है कि प्रशासन स्वतः संज्ञान ले केस दर्ज करे। हिन्दुस्तान ने इस बारे में जानकारी दी है कि जस्टिस केएम जोसेफ और हृषिकेष राय की पीठ ने कहा कि संविधान कहता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। इसमें भाईचारा तथा आपसी गौरव की बात संविधान की प्रारंभिका में ही लिखा गया है। शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर विचार कर रही थी, जिसमें देश में मुसलमानों को निशाना बनाने और उन्हें डराने धमकाने को रोकने के लिए आदेश देने का आग्रह किया गया था। याचिका शाहीन अब्दुल्ला ने दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नफरती भाषण के मामलों में यूपी, दिल्ली और उत्तराखंड पुलिस स्वत कार्रवाई करे।

अनछपी: अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुसलमानों के बारे में नफरत भरे बयान देने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख साफ कर दिया है लेकिन सवाल यह है कि जिन राज्यों के बारे में यह शिकायत आई है, वहां की सरकारें क्या करेंगी। अक्सर देखा गया है कि राजनैतिक नेतृत्व के जिन लोगों से ऐसे मामलों में कार्रवाई की उम्मीद की जाती है उन्होंने ही ऐसे नफरत ही बयान दिए होते हैं। हाल ही में दिल्ली के भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा का बयान भी काफी चर्चित हुआ था लेकिन उन पर अभी तक किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं है। हेट स्पीच या नफरती बयान किसी एक सांसद तक सीमित मामला नहीं है बल्कि यह हिंदुत्व के नाम पर बने विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार किया जाने वाला घृणित काम है। ऐसे बयानों की आंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचती है लेकिन फिलहाल यह उम्मीद की जानी चाहिए कि जिनके बारे में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी की है, उन पर कोई न कोई करवाई जरूर होगी।

 

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