छपी-अनछपी: भारत की जीत की धूम, राजीव गांधी फाउंडेशन के विदेशी चंदे पर पाबंदी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। दीवाली के एक दिन पहले टी-20 विश्वकप में पाकिस्तान पर भारत की जीत का जश्न अखबारों में छाया हुआ है। मेलबर्न में खेला गया वह मैच आखिरी गेंद तक रोमांच से भरा था जब भारत को दो रन बनाने की ज़रूरत थी मगर वह गेंद वाइड हो गयी, इससे एक रन मिल गया और अगली गेंद पर बाक़ी 1 रन बन गया।
केंद्र सरकार द्वारा कांग्रेस से जुड़ी दो संस्थाओं को विदेशी चंदे के लिए अयोग्य घोषित करने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। अयोध्या में दीपावली उत्सव में भाग लेने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भाषण भी प्रमुखता से छपा है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी सुर्खी है: दिवाली की पूर्व संध्या पर पाकिस्तान को रौंदा। बाकी तीन अखबारों ने बिल्कुल छोटी हेड लाइन लगाई है। जागरण: किंग कोहली। प्रभात खबर: विराट दिवाली। भास्कर: जीतोत्सव। पाकिस्तान ने टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट खोकर 20 ओवर में 159 रन बनाए थे। एक समय 34 रन पर 4 विकेट खोने वाले भारत ने 6 विकेट खोने के बाद 160 रनों का लक्ष्य 20 ओवर की आखिरी गेंद पर प्राप्त कर लिया। भारत की ओर से नाबाद रहते हुए विराट कोहली ने सबसे अधिक 82 रन बनाये। आज विराट कोहली की हर तरफ तारीफ हो रही है लेकिन इसी खिलाड़ी ने मोहम्मद शमी के समर्थन में बयान दिया था तो न सिर्फ कोहली को बल्कि उनकी बीवी और बेटी को भी गालियाँ दी गयी थीं। कोहली ने हाथरस रेप-मर्डर केस पर भी चिंता जाहिर की थी जबकि देश के बड़े खिलाड़ी ऐसे मुद्दों पर चुप रहते हैं और सरकार की तारीफ में आगे रहते हैं।
आज के अखबारों की दूसरी अहम खबर राजीव गांधी फाउंडेशन के विदेशी चंदे पर केंद्र की रोक को लेकर है। भास्कर की सुर्खी है: सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले दो एनजीओ के विदेशी चंदे के लाइसेंस केंद्र ने निरस्त किए। जागरण ने लिखा है: सोनिया की अध्यक्षता वाले दो एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द। एफसीआरए लाइसेंस विदेश से चंदा लेने के लिए दिए जाते हैं। हिन्दुस्तान के अनुसार: गृह मंत्रालय ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले दो एनजीओ राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरोप है कि दोनों संगठनों ने नियमों का उल्लंघन किया है।  सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय द्वारा 2020 में गठित अंतर-मंत्रालयी समिति की जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। एक अधिकारी ने कहा कि जांचकर्ताओं ने चीन सहित विदेशों से चंदा लेते समय धनशोधन, निधि के दुरुपयोग और आयकर रिटर्न में हेरफेर के आरोपों की जांच की थी।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की खबर को भी काफी अहमियत दी गई है। उन्हें रविवार को 5 साल के लिए रिकॉर्ड तीसरी बार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का जनरल सेक्रेटरी चुना गया। इस मौके पर जिनपिंग ने कहा संघर्ष करने की हिम्मत करो, जीतने की हिम्मत करो और कड़ी मेहनत करो।
भास्कर ने ब्रिटेन की खबर पहले पेज पर दी है: 145 सांसदों के समर्थन के साथ ऋषि ने पीएम पद की उम्मीदवारी की घोषणा की। लिज़ ट्रस के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में भारतीय मूल कर ऋषि सुनक का नाम काफी चर्चित है।
कर्नाटक के एक मंत्री द्वारा फरियादी महिला को थप्पड़ जड़ने की खबर हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर दी है।
कर्नाटक के विकास मंत्री वी.सोमन्ना ने एक कार्यक्रम में फरियादी महिला को थप्पड़ मारा था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रविवार को मंत्री ने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी। मामले में मुख्यमंत्री ने उनसे जवाब मांगा है। चामराजनगर के जिला प्रभारी मंत्री सोमन्ना बीते दिनों गुंडलूपेट के हंगला गांव में संपत्ति दस्तावेज वितरण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम में भीड़ के कारण धक्का लगने पर मंत्री नाराज हो गए और महिला को थप्पड़ जड़ दिया।
जागरण में दूसरी सबसे बड़ी खबर है: संविधान में मौलिक अधिकारों के प्रणेता हैं राम: पीएम मोदी। अखबार ने लिखा है,”मंदिर के भूमि पूजन के बाद पहली बार अयोध्या आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामराज में सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा की व्याख्या करते हुए कहा कि यह संयोग ही है कि संविधान की मूल प्रति के जिस पृष्ठ पर राम, लक्ष्मण व सीता के चित्र हैं, वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का पृष्ठ है। राम संविधान में मौलिक अधिकारों के प्रणेता हैं।”
अनछपी: अयोध्या पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान और मौलिक अधिकार की बात की है लेकिन विडंबना यह है कि इस समय भारत मौलिक अधिकारों के मामले में सबसे अधिक सवालों के घेरे में है। अल्पसंख्यकों को बिना किसी सबूत के लंबे समय तक जेल में बंद रखने का सिलसिला काफी लंबा होता जा रहा है। श्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय था जब हमारी सभ्यता के बारे में बात करने से बचा जाता था, राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े किए जाते थे। उन्होंने कहा, ” पहले मैं अयोध्या आता था मन दुखी हो जाता था। बनारस की गलियां देख कर परेशान हो जाता था।”  श्री मोदी ने ना सिर्फ मौलिक अधिकार की बात की बल्कि जागरण अखबार के अनुसार उन्होंने सेकुलर राजनीति पर भी परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि हमने पिछले 8 वर्षों में हीन भावना की यह बेड़ियां थोड़ी हैं। प्रधानमंत्री मोदी का दावा अपनी जगह लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले 8 वर्षों में भारत के विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच जो खाई चौड़ी कई गए हैं उसे भर पाना बहुत मुश्किल काम है। इस दौरान खासकर मुसलमानों के खिलाफ नफरत का जो माहौल पैदा किया गया है वह भी चिंतनीय है। ऐसे में यह कहना कि राम मौलिक अधिकारों के प्रणेता हैं, खोखला दावा होकर न रह जाए इसलिए जरूरी है कि नागरिकों के मौलिक अधिकार बहाल किए जाएं। साथ ही यह भी जरूरी है कि प्रधानमंत्री पूरे देश के प्रधानमंत्री के रूप में दिखें, न कि सिर्फ एक धर्म, एक संस्कृति के प्रधानमंत्री के रूप में नजर आएं।

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