छपी-अनछपी: हवा में भिड़े सुखोई-मिराज, जीविका दीदियां चलाएं शराब के खिलाफ मुहिम: नीतीश

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारतीय वायु सेना के दो लड़ाकू विमान सुखोई और मिराज की हवा में टक्कर की खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है। बिहार से शराबबंदी खत्म करने की मांग के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों से कहा है कि वे शराब और दहेज के खिलाफ आंदोलन चलाएं। बिहार के मदरसों में धांधली की शिकायत के बाद 27 जिलों में वेतन अनुदान स्थगित करने की खबर भी प्रमुखता से छपी है।

हिन्दुस्तान की पहली खबर है सुखोई-मिराज विमान गिरे, पायलट सहित। जागरण की लीड भी यही है: आकाश में टकराए सुखोई-मिराज। भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: हवा में भिड़े सुखोई-मिराज, हिस्से मप्र-राजस्थान में गिरे। अखबारों के अनुसार: भारतीय वायुसेना के दो लड़ाकू विमान सुखोई एमकेआई और मिराज-2000 शनिवार को एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में एक पायलट शहीद हो गया, जबकि दो अन्य पायलट घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि सुखोई-30 एमकेआई विमान में दो पायलट थे। दोनों सुरक्षित बाहर निकल गए, जबकि मिराज-2000 का पायलट शहीद हो गया।

पासवान जी के घर तक सड़क

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: लोग बोलते हैं पर पासवान जी के गांव तक रोड हमने ही बनवाई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को मुख्यमंत्री समाधान यात्रा के क्रम में कहा कि देश की महान विभूति रामविलास पासवान जी खगड़िया के ही रहने वाले थे। लोग बहुत कुछ बोलते हैं, लेकिन पासवान जी के गांव घर तक सड़क नहीं थी। लोग नाव से आते जाते थे, वहाँ सड़क और पुल हमने बनवाए। उन्होंने विधायक डॉक्टर संजीव कुमार का हाथ पकड़ते हुए कहा कि इनसे और उनके पिताजी से पूछ लीजिए की पहले खगड़िया और अलौली में क्या था और अब क्या बदलाव आया? सीएम ने अलौली प्रखंड के रौन में बने इंजीनीरिंग कॉलेज का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही।

शराब नहीं, घर में लग रहा वेतन

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: अब शराब नहीं, घर में खर्च हो रहा है वेतन या कमाई का पैसा: मुख्यमंत्री। अख़बार लिखता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाधान यात्रा के दौरान शनिवार को अलौली में कहा कि अब वेतन या कमाई के पैसे शराब में नहीं, घर परिवार पर खर्च हो रहे हैं। 27% दुर्घटनाएं शराब पीने के कारण होती थीं। शराबबंदी के बाद एक करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया।

“शराबबंदी में लगें जीविका दीदी”

हिन्दुस्तान में पहले पेज पर सुर्खी है: जीविका दीदियां दहेज व शराब के खिलाफ आंदोलन करें: नीतीश। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों का आह्वान किया कि दहेज व शराब के विरुद्ध आंदोलन चलायें। उन्होंने कहा, “इसको लेकर दीदियां जहां भी जायें, लोगों को समझाएं। दीदियों पर मुझे सबसे ज्यादा भरोसा है। दीदियों के विकास के लिए कई योजनाएं हमलोग चलायें हैं। आगे और भी कई काम उन्हें सौंपने का निर्णय लिया गया है, ताकि उनकी आमदनी और बढ़े।”

मदरसों का अनुदान रुका

हिन्दुस्तान में पहले पेज पर यह खास खबर है: 27 जिलों के मदरसाकर्मियों का वेतन अनुदान स्थगित। अखबार लिखता है: राज्य के 27 जिलों के मदरसों के कर्मियों का वेतन अनुदान स्थगित कर दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर जाली अनापत्ति प्रमाण पत्र पर अनुदान लेने को लेकर 2459 मदरसों की जांच कराई जा रही है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने इसे लेकर आदेश दिया है। अपर मुख्य सचिव ने डीईओ और डीपीओ को निर्देश दिया है कि जब तक जांच नहीं हो जाती है कि कौन मदरसा विभागीय संकल्प के अनुरूप संचालित है और कौन सा नहीं, तब तक इनके सभी कर्मियों का वेतन अनुदान स्थगित रहेगा। सीतामढ़ी में जाली प्रमाण पत्र पर अनुदान लेने का मामला सामने आने पर हाईकोर्ट ने राज्य के 2459 मदरसों की जांच का आदेश दिया था। शिक्षा विभाग ने 30 जनवरी को जिलास्तर पर गठित जांच कमेटियों के अध्यक्ष को पटना बुलाया है। तीन सदस्यीय कमेटी में डीएम की ओर से प्राधिकृत वरीय उप समाहर्ता अध्यक्ष हैं। डीईओ सदस्य सचिव और संबंधित प्रखंड के बीईओ सदस्य हैं।

अस्पताल में आग

सभी अखबारों ने धनबाद के एक अस्पताल में आग लगने से डॉक्टर पति-पत्नी समेत पांच के जिंदा जलने की खबर भी प्रमुखता से दी है। यह आग पुराना बाजार एक्सचेंज रोड स्थित आरसी हजरा मेमोरियल अस्पताल में शुक्रवार की देर रात लगी थी। इस हादसे में डॉक्टर विकास हाजरा उनकी पत्नी डॉ प्रेमा हाजरा की दम घुटने और आग की तपिश से झुलसने के कारण मौत हो गई। अस्पताल से ठीक सटे आवासीय परिसर में डॉक्टर विकास हाजरा अपने परिवार के सदस्यों के साथ रह रहे थे। दोनों भवनों के बीचो-बीच सीढ़ी के चौताल के बगल में एक स्टोर है। स्टोर के अंदर बिजली बोर्ड और सीसीटीवी कैमरे के सर्वर के पास शार्ट सर्किट होने से स्टोर रूम में आग धधक उठी।

कश्मीरी युवती ने धर्म बदला, धोखा के बाद ज़हर खाया

भास्कर में पहले पेज पर खबर हैः कश्मीरी युवती ने शादी के लिए अपना धर्म बदला, पति ने दिया धोखा तो जहर खाया। अखबार के अनुसार बेगूसराय जिले के सहूरी का निवासी लालो सिंह श्रीनगर में काम करने गया था जहां उसकी दोस्ती वहीं की हुमैरा खान से हो गयी। यवती का नाम हिन्दुस्तान में समर हनीफ बताया गया है। मई 2022 में हुमैरा खान ने लालो के कहने पर बेगूसराय आकर धर्म बदलकर अपना नाम अंजलि सिंह रख लिया। फिर दोनों की शादी हुई लेकिन लालो ने उसे नंवबर में मायके भेज दिया और कहा कि सरस्वती पूजा के बाद वापस ले आएगा हालांकि उसने इसके बाद उसे नहीं बुलाया और हालचाल लेना भी छोड़ दिया। शनिवार को वह अपनी ससुराल पहुंची तो वहां उसे अपनाने से इनकार कर दिया गया जिसके बाद उसने जहर खा लिया। आपसाप के लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया जहां इलाज चल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कुछ और सुर्खियां

  • डाक विभाग में 40 हज़ार बहाली होगी
  • छापा: नक्सल क्षेत्र से एके-47 सहित हथियारों का जखीरा ज़ब्त
  • मुगल गार्डन का नाम अमृत उद्यान हुआ
  • दाखिल खारिज आवेदन रद्द करने के बाद फिर स्वीकार नहीं कर सकेंगे सीओ-आरओ
  • 1600 अस्पतालों में आग से सुरक्षा उपायों की जांच नहीं
  • नरकटियागंज में धर्म परिवर्तन के आरोप में पांच धराए, अमेरिकी नागरिक को पुलिस ने छोड़ा
  • कॉलेजियम सिफारिश रोकना लोकतंत्र के लिए है घातक
  • योगी बोले- सनातन ही राष्ट्रीय धर्म, कांग्रेस ने उठाए सवाल

अनछपी: इसमें कोई शक नहीं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शराबबंदी हटाने का भारी दबाव है। दबाव शराब माफिया और कुछ ऐसे राजनेता दे रहे हैं जो शराबबंदी नहीं चाहते। इस मामले में उन्हें मीडिया से भी अक्सर आलोचना का शिकार बनना पड़ता है। चूंकि बिहार के पड़ोसी राज्यों और नेपाल में शराबबंदी नहीं है इसलिए सूबे में शराबबंदी लागू करना बहुत मुश्किल हो रहा है। इस वजह से शराब माफिया और तस्करों का धंधा बढ़ गया है। जाहिर है इसके लिए क़ानून के साथ साथ सामाजिक स्तर पर भी मेहनत करने की जरूरत है। नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों पर काफी भरोसा किया है और उन्हें कई कामों में लगाया है। अब वे चाहते हैं कि दहेज और शराब जैसी बुराइयों पर काबू पाने के लिए इनका सहयोग लिया जाए तो इसे अच्छा कदम ही माना जाना चाहिए। ध्यान रखने की बात यह है कि 2016 से पहले बिहार में शराबबंदी नहीं थी और तब भी नकली शराब से लोगों की मौत होती थी। उस दौर में महिलाओं ने नीतीश कुमार से शराबबंदी की मांग की थी जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया। हालांकि इस वजह से बिहार को राजस्व का काफी घाटा हुआ लेकिन नीतीश कुमार की कोशिश यह है कि दूसरे जरिए उसे पूरा किया जाए। जरूरत इस बात की है कि शराबबंदी हटाने के लिए जो बहाने बनाए जा रहे हैं उसका सामाजिक स्तर पर जमकर विरोध किया जाए और महिलाओं की बात मानकर इसे और मजबूती से लागू किया जाए।

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