छपी-अनछपी: दो लाख कर्मी आज से पूरे बिहार में करेंगे जातीय गिनती, मई से ई-पासपोर्ट 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के सभी 38 जिलों में आज से जातीय गणना शुरू हो रही है। पटना के सभी हिंदी अखबारों की सबसे बड़ी सुर्खी यही है।

हिन्दुस्तान की पहली खबर है: बिहार के सभी जिलों में जातीय गणना आज से। (साथ लगी तस्वीर इंटरनेट से ली गयी है और इसके आंकड़े की शुद्धता तय नहीं।) जागरण की सबसे बड़ी खबर यही है: जाति आधारित गणना आज से, पहले सभी मकानों पर लिखी जाएगी संख्या। भास्कर ने सुर्खी लगाई है: नाम का है A,B, C …आगे? अखबारों के अनुसार इस प्रक्रिया को 21 जनवरी तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है। इसकी रिपोर्ट तैयार होने के बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें लोगों की जाति के आधार पर गणना की जायेगी। पहले चरण में सिर्फ उन्हीं मकानों को गिना जायेगा, जिनमें लोग रह रहे हैं। झुग्गी-झोपड़ी, सड़क, बांध समेत ऐसे अन्य स्थानों पर रहने वालों के आश्रय स्थलों को भी गिना जाएगा। पूरे राज्य में मकानों की गणना को पूरा करने के लिए प्रत्येक 700 की आबादी या 150 घर पर एक प्रगणक नियुक्त किये गये हैं।

पूरे राज्य में दो लाख से अधिक कर्मी घरों को गिनने के कार्य में लगाये गये हैं। दूसरे चरण की गणना के दौरान जाति, उप-जाति, नाम, पता, पिता या पति का नाम, लिंग, उम्र समेत 10 से 12 सवाल होंगे। इन्हें प्रगणक लोगों से पूछकर एक निर्धारित फॉर्मेट में भरेंगे। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि यहां की जाति गणना होने के बाद केंद्र को भी जानकारी दे देंगे। इससे देश के विकास और समाज के हर तबके के उत्थान में काफी मदद मिलेगी। लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी सरकार को होगी।

फुलवारी मामले की पहली चार्जशीट

एनआईए के अनुसार ‘देशविरोधी गतिविधियों’ में लगे जिन चार लोगों को फुलवारी शरीफ से गिरफ्तार किया गया था, उनमें से कथित ‘गजवा-ए-हिन्द’ मामले में मरगूब दानिश के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने की ख़बर पहले पेज पर है। पिछले साल जुलाई के इस मामले में यह पहली चार्जशीट मानी जा रही है। जागरण की सुर्खी है: आतंकवादियों का स्लीपर सेल तैयार कर रहा था मरगूब। अखबार लिखता है कि एनआईए के विशेष न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मल्होत्रा की अदालत में गजवा ए हिंद के एडमिन मरगूब के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है। आरोप पत्र में आईपीसी की धारा 121, 121a, 153a 153b, 120b और यूएपीए की धारा 13, 18 और 20 के तहत दाखिल किया गया है।

राशन नहीं बांटने वाले डीलर

हिन्दुस्तान में एक अहम सुर्खी है: राशन नहीं बांटने वाले जनवितरण दुकानदारों के लाइसेंस होंगे निरस्त। बिहार में करीब 55 हज़ार पीडीएस डीलर हैं। उनकी हड़ताल से आठ करोड़ 71 लाख गरीबों को राशन नहीं मिल रहा है। राशन डीलर एक जनवरी से हड़ताल पर हैं। इस बार की हड़ताल में फेयर प्राइस डीलर एसोसिएशन संयुक्त मोर्चा के चारों गुट शामिल हैं। इसलिए सभी जिलों में हड़ताल का असर दिख रहा है। राशन का बंटना पूरी तरह से बंद है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। सचिव विनय कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजते हुए राशन नहीं बांटने वाले दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त करने को कहा है।

लखनऊ एयरपोर्ट पर साल भर सोते रहे कंट्रोलर

जागरण ने अपने पहले पेज पर यह खास खबर दी है: एक साल तक हवाई अड्डे पर एटीसी सोते रहे, उड़ते-उतरते रहे विमान। लखनऊ एयरपोर्ट पर एयर ट्रेफिक कंट्रोलरों की नींद की खबर नींद उड़ाने वाली है। यह कंट्रोलर एक साल से रात 12 बजे से सुबह 5:00 बजे तक अपनी एरिया कंट्रोल सर्विलांस यूनिट को बंद कर सोते पाए गए हैं। इस दौरान एरिया रडार बंद रहे और यूनिट की स्क्रीन पर देखे बिना ही लखनऊ एयरपोर्ट आने वाले विमान अल्टरनेटिव प्रोसीजरल सिस्टम से उतरते रहे। इसी तरह सिस्टम को बाईपास कर उड़ान भी भरते रहे। पिछले दिनों डीजीसीए की टीम ने लखनऊ के एटीसी की जांच की तो यह लापरवाही सामने आई। एरिया कंट्रोल सर्विलांस यूनिट की लॉग बुक और पर्सनल लॉग बुक की जांच के बाद 37 एयर कंट्रोलरों को नोटिस जारी किया गया है।

मई से ई-पासपोर्ट 
हिन्दुस्तान की एक अहम खबर है: देश में मई से ई-पासपोर्ट बनने लगेंगे। इसके लिए विदेश मंत्रालय, एनआईसी और एनआईसी सर्विसेज के बीच जल्द एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसमें पासपोर्ट की बुकलेट पर एक रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेसन (आरएफआईडी) चिप लगी होगी। मंत्रालय के अनुसार पहले नये पासपोर्ट में इसे शुरू करने के साथ-साथ ही नवीनीकृत होने वाले पासपोर्टों को ई पासपोर्ट में बदला जाएगा। जैसे-जैसे पासपोर्ट का नवीनीकरण होगा, वे इस पासपोर्ट में तब्दील होते जाएंगे। सरकार ने कहा कि ई पासपोर्ट में आंकड़ों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा तथा किसी और कार्य के लिए उनका उपयोग नहीं होगा।

कुछ अन्य सुर्खियां

  • पटना समेत 10 जिलों में सीवियर कोल्ड डे
  • धक्का-मुक्की के कारण नहीं हो सका दिल्ली के मेयर का चुनाव
  • विमान में महिला पर पेशाब करने वाले को अमेरिकी कंपनी ने किया बर्खास्त
  • राहुल गांधी बोले, मोदी सरकार ने बना दिए दो भारत
  • इंजीनियरिंग के 40 फ़ीसदी छात्र नहीं जा रहे कॉलेज
  • कॉमर्स शिक्षकों के बिना चल रहे 5643 स्कूल
  • पाकिस्तान में बोटी क्या रोटी भी जेब से बाहर
  • बंद पड़ी रीगा चीनी मिल को फिर से चालू कराया जाएगा: मुख्यमंत्री
  • नीतीश बोले- जीविका दीदी की रिपोर्ट पर गैरहाजिर शिक्षक बर्खास्त हो सकते हैं
  • मध्य प्रदेश के रीवा में ट्रेनी विमान हुआ क्रैश, पटना के आनंदपुरी के पायलट की मौत
  • देश में जनगणना की कवायद एक बार फिर 30 सितंबर तक टली

अनछपी: बिहार की 14 करोड़ आबादी कितने घरों में बसती है, उम्मीद है कि इसका पता जून में चल जाएगा क्योंकि जाति आधारित गणना में पहला काम यही है और तब तक इसकी शरुआती रिपोर्ट आ जाएगी। इस गिनती में परिवार के सदस्यों के अलावा यह भी मालूम किया जाएगा कि किसके पास कितनी गाड़ियां हैं, कितने मोबाइल फोन हैं और आय का स्रोत क्या है। परिवार में बेरोजगार लोगों के स्किल के बारे में भी जानकारी ली जाएगी यानी वह कौन सा काम कर सकते हैं। जातीय गणना के बारे में दो तरह की बात कही जा रही है। एक वर्ग वह है जो कहता है कि इससे समाज में तनाव बढ़ेगा लेकिन दूसरा वर्ग यह कहता है कि इससे समाज में समावेशी विकास के लिए कार्य योजना तैयार करने में मदद मिलेगी। वास्तविकता यह है कि सवर्ण वर्ग यह नहीं चाहता कि जातीय गन्ना हो और यह पता चले कि सरकारी नौकरियों और अन्य संसाधनों पर किस वर्ग का सबसे बड़ा आधिपत्य है। यह सही है कि यह गिनती राजनैतिक फायदे के लिए इस्तेमाल की जा सकती है लेकिन यह भी सही है कि अगर समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलते और राज्य के संसाधनों में उनकी समान भागीदारी होती तो इस गिनती की जरूरत नहीं पड़ती। अब जबकि यह गिनती हो रही है तो खासकर उस वर्ग को इस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए जिससे लगता है कि उन्हें सरकारी नौकरियों और अन्य जगहों पर भागीदारी नहीं मिलती है।

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