औरंगाबाद के दो दलितों को थूक चाटने पर मजबूर किया, अब प्रशासन से मिला मुआवजा

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट। पटना
औरंगाबाद जिले के अंबा थाने की डुमरी पंचायत में 8 दिसंबर को मुखिया के चुनाव में एक प्रत्याशी द्वारा दलित समुदाय के दो लोगों को उठक-बैठक करवाने और थूक चटवाने के मामले में प्रशासन ने दो स्तर पर कार्रवाई की है।
एक ओर जहां आरोपित प्रत्याशी सिंघना गांव निवासी बलवंत सिंह को 12 दिसंबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है तो दूसरी ओर पीड़ितों- अनिल भुइयां और मंजीत भुइयां को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुआवजा दिया जा रहा है।
इस मामले में कार्रवाई का आधार वह वायरल वीडियो बना है जिसमें दोनों पीड़ितों को उठक-बैठक और थूक चाटने के लिए मजबूर किये जाते देखा गया है। इसके बाद आरोपित बलवंत सिंह पर एफआईआर की गयी है। जब इस बात की चर्चा बड़े पैमाने पर होने लगी तो प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है।
फिलहाल एक पीड़ित अनिल भुइयां को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया है और दूसरे पीड़ित की जांच के बाद उसे भी इतनी ही राशि देने की बात की गयी है।
इस वीडियो के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों पीड़ितों पर आरोप है कि उन्होंने इस मुखिया प्रत्याशी से वोट देने के लिए पैसे लेने के अलावा एक और प्रत्याशी से पैसे ले लिये। अजीब बात यह भी सामने आयी कि मारपीट, उठक-बैठक और थूक चटावने का यह वीडियो इस आरोपित के समर्थकों ने ही बनाया और इसे शेयर कर दिया। शायद उन्हें तब यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि इसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होगी और आरोपित को जेल जाना होगा।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि एससी-एसटी एक्ट के तहत केस होने पर पीड़ित को पहले 50 हजार रुपये का मुआवजा मिलता है। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद एक लाख और कार्रवाई पूरी होने पर 50 हजार रुपये देने का प्रावधान है।

 

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