शाहनवाज़ हुसैन एमएलसी हो कर बनेंगे क्या? क्या करेंगे?

सैयद जावेद हसन बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
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पटना, 21 जनवरी: नीतीश मंत्रीमंडल के विस्तार की क़वायद के बीच बीजेपी के सीनियर लीडर सैयद शाहनवाज़ हुसैन के एमएलसी बनने का रास्ता साफ़ हो गया है। लेकिन सवाल यह है कि एमएलसी होकर वह बनेंगे क्या और करेंगे क्या?

दिलचस्प बात यह है कि शाहनवाज़ हुसैन केन्द्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी। इस तरह से उनका एमएलसी बनना उनके क़द को छोटा करना है। अब सवाल यह है कि अपने छोटे-से क़द में शाहनवाज़ बनेंगे क्या और करेंगे क्या?

ऐसी क़यास आराई है कि शाहनवाज़ बिहार के अगले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाए जा सकते हैं। इससे पहले की नीतीश सरकार में खुर्शीद अहमद उर्फ़ फ़ीरोज़ अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे। आपको याद होगा कि खुर्शीद अहमद अपने विभागीय काम के लिए कम, नीतीश भक्ति और जयश्री राम का नारा लगाने के लिए ज़्यादा मशहूर थे।

ग़ौरतलब बात ये भी है कि नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से फ़िलहाल पांच-पांच एमएलसी हैं। इनमें प्रोफ़ेसर गुलाम ग़ौस, मौलाना गुलाम रसूल बलियावी और पत्रकार ख़ालिद अनवर शामिल हैं। उम्मीद की जा रही थी नीतीश मंत्रीमंडल के विस्तार में इन तीनों में से किसी एक को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाया जाएगा। शाहनवाज़ के एमएलसी बनने के बाद इन तीनों के चेहरे की रंगत देखी जा सकती है। फ़िलहाल अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शिक्षा मंत्री डाॅक्टर अशोक चैधरी के पास है।

अगर शाहनवाज़ हुसैन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ज़िम्मेदारी संभालते भी हैं तो सवाल ये है कि उनके सामने चुनौतियां कौन-कौन सी हैं। सबसे बड़ी चुनौती तो वक़्फ़ सम्पत्तियों की हो रही लूट पर रोक लगाना है। शीया वक़्फ़ बोर्ड और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड दोनों ही इस मामले में नाकाम रही हैं।

दूसरी चुनौती अल्पसंख्यक संस्थानों को पुनर्जीवित करना है। बिहार उर्दू अकादमी और उर्दू परामर्शदात्री समिति दो साल से भी ज़्यादा अरसे से बिना चेयरमैन और सेक्रेटरी के चल रही हैं। इनका कामकाज लगभग ठप पड़ा है।

तीसरी चुनौती उर्दू की तरक़्क़ी है। पूरे बिहार में कई स्कूलों से उर्दू की यूनिटें ख़त्म कर देने की ख़बरें आ रही हैं।

बाक़ी बचे उर्दू टीईटी टीचरों की बहाली पिछले कई बरसों से पेंडिंग पड़ी है।

इसके अलावा, बिहार की एकमात्र गवर्नमेंट उर्दू लाइबे्ररी फ़ंड के अभाव में दम तोड़ रही है।

अब सवाल यह है कि शाहनवाज़ हुसैन इन समस्याओं को हल करने के लिए नई भूमिका में नज़र आने वाले हैं, बिहार में भाजपा का नया एजेंडा लागू होने जा रहा है या पश्चिम बंगाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए वो इस्तेमाल होने वाले हैं? इन सारे सवालों का जवाब तो आने वाला समय ही देगा।

वैसे, शाहनवाज़ कोई और बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं, इसकी कोई उम्मीद नज़र नहीं आती। दो-दो उपमुख्यमंत्री पहले से ही मौजूद हैं और शाहनवाज़ पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुलगफूर जैसा कुछ बन सकते हैं, इसका सपना तो शायद अमित शाह भी नहीं देख सकते।

Photo credit: Amar Ujala

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