बिहार में बाढ़: किसकी मुसीबत, किसकी कमाई

बिहार में बाढ़ हर साल की समस्या है। इस साल भी बिहार के आधे से अधिक ज़िले बाढ़ झेल रहे हैं। यह जहां किसानों और आम लोगों के लिए तबाही लाती है, वहीं बहुत से लोगों के लिए यह कमाई का जरिया बनती है।
कितनी सरकारें बनीं और बदलीं लेकिन बाढ़ झेलने वालों की हालत नहीं बदली। इसका एक और दुखद पहलू यह भी है कि इतनी बड़ी आबादी बाढ़ से तबाह रहती है लेकिन अखबार और टीवी में इसे सही जगह नहीं मिलती। हमारे नेता इसपर चर्चा के नाम पर महज खानापूर्ति करते हैं।
बिहार लोक संवाद डॉट नेट ने कोशिश की है कि इस समस्या पर चर्चा की जाए और यह बताया जाए इसका इसके कारण क्या हैं और इसे ठीक करने के लिए हमें क्या करना चाहिए। इस चर्चा में शामिल हैं डॉक्टर दिनेश मिश्रा, रंजीव कुमार और महेंद्र यादव।
डॉ मिश्रा आईआईटियन हैं और इन्होंने बाढ़ पर जितना अध्ययन किया है, वह अतुलनीय है। इन्होंने बाढ़ और बाढ़ से निपटने के उपायों पर कई किताबें भी लिखी हैं।
श्री रंजीव कुमार भी बाढ़ पर किताब लिख चुके हैं। ये गंगा मुक्ति आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। इस समय भी कई इलाकों में घूम कर वह बाढ़ की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
महेंद्र यादव जी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और कोसी की बाढ़ पर इन्होंने कई जन पहल की है। इस समय वह सुपौल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के काम में जुटे हैं और वहां से आंखों देखा हाल बता रहे हैं।
आइए देखते हैं यह परिचर्चा।

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