बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका एक तरफ ईरान से बातचीत के दावे कर रहा है तो दूसरी तरफ उसके जरिए जहाज़ कब्जा करने और दूसरी चालबाजी की खबरें भी आ रही हैं। तमिलनाडु में एक पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट में 23 श्रमिकों की मौत हो गई। पटना में दिनदहाड़े एक ज्वेलरी दुकान से 20 लाख के गहने लूट लिए गए। कानपुर में रहने वाले गया के एक शख्स ने अपनी जुड़वां बेटियों की हत्या कर दी।
और, बिहार में पिछले 17 सालों में मात्र 5066 अल्पसंख्यक युवाओं को विशेष प्रशिक्षण के तहत रोजगार का अवसर मिला है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगता दिख रहा है। ईरान ने इस्लामाबाद में मंगलवार से प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में शामिल होने से इन्कार कर दिया है। आईआरएनए के अनुसार, ईरान प्रशासन का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में जारी नौसैनिक नाकेबंदी और अमेरिका की “बेतहाशा मांगों” के बीच वार्ता में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, वार्ता में भागीदारी या बहिष्कार को लेकर तेहरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की थी की शांति वार्ता मंगलवार से शुरू होगी।
ईरानी जहाज़ को अमेरिका ने क़ब्ज़े में लिया
बीबीसी के अनुसार अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी के तहत खाड़ी में ईरानी झंडे वाले एक कार्गो जहाज़ को रोक लिया है, यह बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ‘टोस्का’ नाम का जहाज़ अमेरिकी नौसेना ने तब कब्ज़े में लिया जब उसने रुकने की चेतावनी का जवाब नहीं दिया. इस घटना पर ईरान की तरफ़ से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है. यह घोषणा उस समय आई जब व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि ईरान के साथ जंग ख़त्म करने पर बातचीत के दूसरे दौर के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान में एक और प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.
तमिलनाडु की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने से 23 लोगों की मौत
प्रभात खबर के अनुसार तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट में 23 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गयी. वहीं, छह श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं. यह हादसा कट्टनरपत्ती स्थित ‘वनजा’ पटाखा फैक्टरी में हुआ. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी की तीन इमारतें मलबे में तब्दील हो गयीं और आसपास के मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा. हादसे के वक्त फैक्टरी परिसर में 100 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे. पुलिस और अग्निशमन विभाग के अनुसार, मलबे से अब तक 18 शव बरामद किए गये हैं, जिनमें से कई की पहचान करना मुश्किल है. हादसे में घायल छह लोगों को सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां चार की हालत नाजुक बनी हुई है. प्रारंभिक जांच के अनुसार, कच्चे माल के मिश्रण के दौरान हुए घर्षण से यह धमाका हुआ.
ज्वेलरी दुकान से 20 लाख की लूट
भास्कर के अनुसार पटना में अपराधियों ने दिनदहाड़े लूट की वारदात को अंजाम दिया। घटना रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र की है। रविवार दोपहर पौने दो बजे पांच लुटेरे दो बाइक से पहुंचे। लुटेरों ने घाना मोड़ स्थित ‘श्री लक्ष्मी अलंकार ज्वेलर्स’ से 20 लाख रुपए के गहने लूट ले गए। इसमें 100 ग्राम सोना और 4 किलो चांदी शामिल है। पूरी वारदात दो मिनट में हुई। पांच में से दो लुटेरे बाहर खड़े रहे। उन्होंने पिस्टल दिखाकर आसपास की दुकानें बंद कराईं। 3 लुटेरे अंदर गए और लूटपाट की। दो राउंड फायरिंग कर भागे। लूट के दौरान दुकानदार धनंजय कुमार पर हमला किया गया। बदमाशों ने पिस्टल की बट से उनके सिर पर वार किया। धनंजय के सिर में चार टांके आए हैं। पुलिस के अनुसार, घटना से पहले रेकी की गई थी।
बाप ने ही कर दी जुड़वां बेटियों की हत्या
कानपुर से जागरण की ख़बर है कि सो रहीं 11 साल की जुड़वां बेटियों को उनके पिता ने मौत की नींद सुला दिया। पहले उसने दोनों को गला घोटा, फिर चापड़ से रेत दिया। आधी रात इस निर्दयता के बाद पिता ने रविवार तड़के खुद पुलिस को फोन कर बुला लिया। घटना के वक्त पत्नी दूसरे कमरे में बेटे के साथ सो रही थी। उसे घटना का तब पता चला, जब पुलिस ने आकर दरवाजा खटखटाया। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) की नौकरी छोड़ने के बाद दवा कारोबार में उतरे हत्यारोपित ने पुलिस को बताया कि कारोबार बहुत अच्छा नहीं चल रहा था। सोचता था कि उसके बाद बेटियों का कौन ख्याल रखेगा। कई दिनों से हत्या की योजना बना रहा था। पांच दिन पहले चापड़ खरीदकर लाया था। खुद भी आत्महत्या करना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाया। त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में किराये के फ्लैट में बीते आठ साल से बिहार के गया निवासी शशिरंजन मिश्रा परिवार के साथ रह रहा था।
17 वर्षों में विशेष ट्रेनिंग से बस 5066 अल्पसंख्यकों को मिला रोज़गार
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में पिछले 17 सालों में मात्र 5066 अल्पसंख्यक छात्रों को विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार का अवसर मिला है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को रोजी-रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिलाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। इसे मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना के तहत पूरा किया जाना था। यह योजना राज्य में 2008-09 से ही लागू है, पर इस योजना को धरातल पर मजबूती के साथ उतारने में सफलता नहीं मिली।
कुछ और सुर्खियां:
- जनता दल यूनाइटेड के बिहार विधान मंडल दल की बैठक आज, नेता व उपनेता का होगा चुनाव
- पटना के दीघा थाना क्षेत्र में चार लोग डूबे, दो की लाश बरामद
- पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब के खिलाफ बेअदबी करने पर उम्रकैद की सजा का कानून मंजूर
- श्रीनगर हवाई अड्डे पर एक सेटेलाइट फोन के साथ दो अमेरिकियों को हिरासत में लिया गया
- बिहार की 40 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की दूसरी किस्त के तौर पर 20-20 हज़ार रुपये जल्द मिलेंगे
अनछपी: भारत में चुनाव क्षेत्र को नए सिरे से तय करने यानी परिसीमन के बारे में उत्तर और दक्षिण की बहस आप सुन रहे होंगे। आपने यह बहस भी सुनी होगी कि कैसे उत्तर भारत दक्षिण भारत के संसाधनों के इस्तीफे में भारी पड़ रहा है। गुजरात को वैसे दक्षिण भारत का हिस्सा नहीं माना जा सकता लेकिन उसकी चर्चा इसलिए की जाती है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में उत्तर भारत खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग रोजगार के लिए जाते हैं। वहां रह रहे बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों की खराब हालत की चर्चा करने पर इन राज्यों के नेता भड़क जाते हैं लेकिन वह वहां की सच्चाई से कैसे इंकार कर सकते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई इस रविवार को सामने आई जब गर्मी की छुट्टी की शुरुआत और कारखानों के काम में आई कमी की वजह से गुजरात के सूरत के पास उधना रेलवे स्टेशन पर इन दोनों राज्यों के मुसाफिरों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ऐसी ही एक ट्रेन उधना से बिहार के जयनगर के लिए रवाना हुई तो रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ की वजह से अफ़रातफरी देखी गई। इस ट्रेन पर सवार होने के लिए लोग 15-20 घंटे पहले से बिना खाए पिए कतार में लगे थे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 20 साल राज करने के बाद अब आराम कर रहे हैं लेकिन बिहार के लोगों को अब भी आराम नसीब नहीं हुआ है। रेलवे भी अपनी व्यवस्था करने की कोशिश तो करता है लेकिन फिर भी यात्रियों की शिकायत रहती है कि उन्हें खड़े होकर या टॉयलेट के अंदर सफर करना पड़ा है। चूंकि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार के पास अब काफी समय है इसलिए वह यह सोच सकते हैं कि आखिर वह ऐसा कुछ क्यों नहीं कर सके कि बिहार के लोगों को इस तरह की जिल्लत और परेशानी न झेलनी पड़े।
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