बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय में फर्जीवाड़े की कोशिश का एक बड़ा मामला सामने आया है (साथ लगी तस्वीर एआई जेनरेटेड है)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता स्थल से उठकर चला गया। बिहार के सभी प्रखंडों में पहली बार अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारियों की नियुक्ति होगी।
और, परिवारवाद के विरोध की राजनीति करने वाले नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने उनके बेटे निशांत को पार्टी का भविष्य बताया।
पहली ख़बर
प्रभात खबर के अनुसार देशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सात स्तरीय निगरानी के दावों के बीच रविवार को आयोजित नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय में फर्जीवाड़े की कोशिश का एक बड़ा मामला सामने आया है. प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर नौ फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर) को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों में दो इंटर्न डॉक्टर, पांच एमबीबीएस छात्र व अन्य बताये जा रहे हैं. इस खेल में बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी निजी एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध पायी गयी है, जिसके सात कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये स्कॉलर मोटी रकम के एवज में असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे. लखीसराय पुलिस की जांच देर रात तक जारी रही. सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार लोगों की संख्या और बढ़ सकती है. पकड़े गये लोगों में नालंदा, पटना, भागलपुर, यूपी आदि जगहों के लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. पकड़े गये स्कॉलर्स की शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है. एसडीओ प्रभाकर कुमार ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार कई युवक खुद को मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा बता रहे हैं. सूत्रों के अनुसार इनमें कुछ छात्र पीएमसीएच, एएनएमएमसीएच गया और दिल्ली के मेडिकल संस्थानों के हैं. पकड़े गये छात्रों में गया के एएनएमएमसीएच से एमबीबीएस फोर्थ ईयर का छात्र अर्पित राज भी शामिल है.
ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने वार्ता छोड़ी
हिन्दुस्तान के अनुसार पश्चिम एशिया में शांति बहाली के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेताओं के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में वार्ता शुरू हुई। हालांकि इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट के माध्यम से ईरान को धमकी दी। इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता स्थल से उठकर चला गया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने दावा किया कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ वार्ता शुरू होने के दौरान ही ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने मध्यस्थता कर रहे देशों में से एक कतर के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की और फिर बातचीत वाले भवन से बाहर निकल गया। हालांकि, इस बातचीत पर नजर रख रहे एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अधिकारी ने फ्रांसीसी समाचार एजेंसी को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ईरान ने बातचीत का बहिष्कार नहीं किया है। उन्होंने पुष्टि की कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी इस शांति वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है और उसने मध्यस्थों को अपनी वापसी का कोई संकेत नहीं दिया है। दोनों देशों ने 10 सप्ताह बाद आमने-सामने बैठक शुरू की। शांति वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष बाधेर गालिबफ ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बताया जा रहा है कि 80 मिनट तक यह वार्ता चली जिसमें ईरान ने अपनी जब्त की गई संपत्ति और तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने के प्रस्ताव पर चर्चा की।
अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारियों की नियुक्ति दिसंबर तक
जागरण के अनुसार पटना राज्य के सभी प्रखंडों में पहली बार अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारियों की नियुक्ति होगी। यह नियुक्ति दिसंबर तक होगी। इससे अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण तथा सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में विभिन्न 1076 पदों पर नई नियुक्ति होनेवाली है। इसकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए विभाग नै अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) को भेजी है।
बिहार के स्कूल-कॉलेजों में होगी योग की पढ़ाई
भास्कर के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगले वर्ष से बिहार के स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में योग को शामिल किया जायेगा। बिहार के स्कूल व कॉलेजों में शारीरिक प्रशिक्षण की व्यवस्था पहले से लागू है। उन्होंने पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का उद्घाटन किया। लोगों के साथ योगाभ्यास किया। कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। स्वस्थ एवं खुशहाल रखने के लिए उन्होंने आयुष्मान भारत योजना से 50 करोड़ लोगों को जोड़ा है। लोगों से कहा कि दिनचर्या को 24 घंटे में बांटकर नियमित योगाभ्यास करें।
निशांत कुमार को पार्टी का भविष्य बताया गया
जागरण के अनुसार जदयू की राष्ट्रीय और राज्य परिषद की बैठक में रविवार को तय हो गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत ही पार्टी की कमान संभालेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने दोनों बैठकों में इसकी घोषणा की। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, जदयू विधायक दल के नेता एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और मंत्री अशोक चौधरी ने भी अपने संबोधन में पार्टी की इस लाइन की पुष्टि की। संजय झा ने कहा कि निशांत जदयू का नेतृत्व करने के लिए सक्षम हैं। स्वास्थ्य मंत्री के नाते वे अपनी क्षमता साबित भी कर रहे हैं। हम आशा कि वे आने वाले 30-40 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व करेंगे। संजय झा और दूसरे नेता अपने संबोधन में निशांत को जदयू का भविष्य बता रहे थे। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नीतीश कुमार और राज्य परिषद की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर उमेश सिंह कुशवाहा के निर्वाचन की पुष्टि की गई।
कुछ और सुर्खियां:
- तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में सीफूड फैक्ट्री में अमोनिया गैस लीक होने से सात महिलाओं की मौत
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर आज दे सकते हैं इस्तीफा
- तुषार मेहता को 3 साल के लिए फिर से सॉलिसिटर जनरल बनाया गया
- पटना के दानापुर द्वारा क्षेत्र में गंगा स्नान के दौरान डूबने से तीन बच्चों की मौत
- समर वेकेशन के बाद से आज से मॉर्निंग होंगे 80000 सरकारी स्कूल
अनछपी: हमारे अस्पतालों की हालत कितनी खस्ता हो चुकी है, नेताओं की घोषणाओं के बीच इसकी चर्चा कम ही होती है। बिहार में अक्सर डॉक्टरों की कमी और अस्पतालों में इमरजेंसी में भर्ती होने में जो परेशानी होती है उसकी खबरें आती रहती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार जो बड़े-बड़े दावे करती थी, उसमें एक यह भी है कि कई नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले गए लेकिन कभी इस बात पर गंभीर चर्चा नहीं हुई कि उन मेडिकल कॉलेजों में इलाज और पढ़ाई की व्यवस्था कितनी खस्ता है। अक्सर जगह बिल्डिंग बनाने पर सरकार का बहुत जोर रहा है हालांकि उसमें भी मेडिकल के छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी की खबर भी चिंता का विषय रहा है। अभी एक ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है कि पीएमसीएच में एक्सपर्ट डॉक्टरों की भारी कमी है और 589 में से 203 पद खाली हैं। मगर क्या कभी अपने विधान सभा या विधान परिषद में इस विषय पर गंभीर बहस होते सुना है? डॉक्टरों की कमी की वजह से मरीजों के इलाज के साथ-साथ एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई में जो परेशानी है उसे कौन नहीं समझता है। बताया गया है की सबसे ज्यादा खराब हालत बर्न, मेडिसिन, सर्जरी, रेडियोलॉजी और चेस्ट यूनिट की है। ऐसा नहीं है कि इस समस्या से मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और दूसरे अधिकारी अवगत नहीं है लेकिन उनकी मजबूरी है कि वह अपने स्तर से विभाग को जानकारी देने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। इत्तेफाक की बात है कि इस समय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के पास स्वास्थ्य विभाग है और उनके पास कुमार रवि जैसा सक्षम सचिव भी। निशांत कुमार के प्रदर्शन के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती लेकिन कुमार रवि से ही उम्मीद की जा सकती है कि वह इस समस्या पर ज़रूर ध्यान देंगे।
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