पूर्वी चम्पारण: बेरोजगार युवाओं और परेशान किसानों की चुप्पी से प्रत्याशी परेशान

महताब आलम पूर्वी चंपारण से

मातिहारी, 25 अक्तूबर: पूर्वी चंपारण जिले के 12 विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला 7 नवंबर को ईवीएम में कैद हो जाएगा। मतदान का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है विभिन्न पार्टियों के द्वारा आम जनता के बीच संवाद का सिलसिला भी तेज हो रहा है। हाई कोर्ट से मिली अनुमति के बाद शहर के विभिन्न घरों पर बैनर पोस्टर लगाने का सिलसिला भी जारी है।

पिछली बार विजयी रहे डॉक्टर शमीम अहमद नरकटिया विधानसभा क्षेत्र से, फैसल रहमान ढाका विधानसभा क्षेत्र से जबकि प्रमोद कुमार मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र से दोबारा अपने राजनैतिक भविष्य का फैसला करने के लिए जनता के हवाले खुद को कर चुके हैं।

प्रत्येक पार्टी के प्रत्याशियों द्वारा अपने बैनर पोस्टर के साथ लोगों के बीच डोर टू डोर कैंपेन तेज हो चुका है और आखरी समय तक जनता से संपर्क करने की कोशिश जारी है। प्रत्येक पार्टी के उम्मीदवारों द्वारा जनता के मन में अपनी स्वच्छ छवि को उतार देने की कोशिश जारी है, लेकिन जिस प्रकार बिहार को पहले जातीय समीकरण के लिए जाना जाता था इस बार की स्थिति को समझने के लिए चुनावी जमीन के धरातल पर नजर डालें तो कुछ बदला-बदला सा प्रतीत होता है।

बेरोजगारी ने छात्रों के आक्रोश और परेशान किसानों की चुप्पी ने प्रत्येक प्रत्याशियों की दिल की धड़कन बढ़ा दी है। किस पार्टी के हक में बेरोजगार युवा और परेशान किसान अपने मत को दान करेंगे, यह तो मतगणना के बाद ही मालूम चलेगा। फि

 

 

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