बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
बिहार केन्द्र से अपने कोटे का पूरा ऑक्सीजन नहीं ले पा रहा है क्योंकि राज्य के पास क्रायोजेनिक टैंकर की कमी है। यह बात बिहार सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार ने मंगलवार को पटना हाईकोर्ट में कही। दूसरी तरफ उन्होंने दावा किया कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी नहीं है।
बिहार के लिए केन्द्र की तरफ से 194 टन मेडिकल ऑक्सीजन का कोटा तय हैै। इस समय बिहार सरकार विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से 60 से 80 टन लिक्विड ऑक्सीजन ही ले पा रही है।
पटना हाईकोट ने तीन जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आदेश दिया कि राज्य सरकार पहले अपने कोटे के पूरे लिक्वड ऑक्सीजन के उठाव की व्यवस्था करे। न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की बेेंच ने यह भी कहा कि सरकार यह देखे कि होम आइसोलेशन में चल रहे मरीजों को ऑक्सीजन कैसे पहुंचाया जाए। कोर्ट ने ऑक्सीजन की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी बताने के लिए जो ईमेल आईडी दी थी वहां आईजीआईएमएस के निदेशक ने भी शिकायत दर्ज करायी थी। हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि 22 अप्रैल के बाद राज्य में कोविड के इलाज के लिए एक भी बेड क्यों नहीं बढ़ा। कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों को भी डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में बदलने की संभावना पर विचार करने को कहा।
इस बीच विभिन्न लोगों ने कहा कि बिहार में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने का दावा इसलिए अजीब लगता है कि पूरे राज्य से मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की शिकायतें मिल रही हैं।
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